नई दिल्ली: देश राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर के आसपास माहौल अचानक बदल गया. NEET पेपर लीक को लेकर CJO का प्रदर्शन चल रहा था. इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए कुछ ही देर में प्रदर्शन और भीड़ के बीच का फर्क खत्म होता नजर आया. दिल्ली पुलिस के ASI हेमेंद्र सिंह राठी भी उसी भीड़ के बीच मौजूद थे. उनका दावा है कि सुबह करीब 11 बजे एक हजार से ज्यादा लोग पीछे के गेट से बिल्डिंग में दाखिल हुए और इसके बाद पुलिसकर्मियों पर हमला शुरू हो गया. राठी के मुताबिक भीड़ में कुछ लोगों के पास पिठ्ठू बैग थे. इनमें पत्थर, ईंट और टाइल्स भरे होने का उन्होंने दावा किया. हालात संभालने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों को गालियां दी गईं. कुछ युवक लगातार ‘जय भीम’ के नारे लगा रहे थे. फिर अचानक राठी पर बड़े-बड़े पत्थरों से हमला हुआ. चेहरे पर चोट लगी और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गए.
होश आया तो सामने का दृश्य और भी डरावना था. राठी के मुताबिक जब उन्हें अस्पताल में होश आया तो वहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हालत में मौजूद थे. कई पुलिसकर्मी खून से लथपथ थे. खुद राठी के चेहरे पर तीन जगह फ्रैक्चर हुआ है. उनकी पीठ पर भी चोट आई. अस्पताल में उन्हें यह भी पता चला कि करीब चार-पांच पत्रकार भी घायल हुए हैं. राठी की यह आपबीती 20 जुलाई की हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों की मुश्किलों की एक तस्वीर सामने रखती है. खास बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने किसी मुश्किल ऑपरेशन में जोखिम उठाया हो. इससे पहले नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान भी वह एक चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन का हिस्सा रह चुके हैं.
राठी बताते हैं कि सुबह करीब 11 बजे एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ पीछे के गेट से बिल्डिंग में दाखिल हुई.
‘पीठ पर पिठ्ठू बैग, अंदर पत्थर-ईंट और टाइल्स’, ASI का दावा
ASI हेमेंद्र सिंह राठी के मुताबिक, 20 जुलाई को पुलिसकर्मी भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई. उनका दावा है कि भीड़ में शामिल कई लोगों के पास पिठ्ठू बैग थे. इन बैगों में पत्थर, ईंट और टाइल्स रखे हुए थे. राठी के मुताबिक, कुछ युवक ‘जय भीम’ के नारे लगा रहे थे और पुलिसकर्मियों को गालियां दी जा रही थीं.
राठी बताते हैं कि सुबह करीब 11 बजे एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ पीछे के गेट से बिल्डिंग में दाखिल हुई. इसके बाद पुलिसकर्मियों पर हमला शुरू हो गया. राठी के मुताबिक, उन पर बड़े-बड़े पत्थरों से चेहरे पर हमला किया गया. चोट इतनी गंभीर थी कि वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े. उनके चेहरे पर तीन जगह फ्रैक्चर हुआ और पीठ पर भी चोटें आईं.
‘हमला होते ही बेहोश होकर गिर गया’, अस्पताल में आया होश
राठी के मुताबिक, हमले के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. वहां होश आने पर उन्होंने जो देखा, वह उनके लिए बेहद परेशान करने वाला था. बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती थे. कई पुलिसकर्मी खून से लथपथ हालत में थे. राठी के मुताबिक, करीब चार-पांच पत्रकार भी वहां मौजूद थे. बाद में उन्हें पता चला कि पत्रकारों के साथ भी भीड़ ने मारपीट की थी.
ASI की आपबीती में उस वक्त की अफरातफरी साफ नजर आती है. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के सामने एक तरफ भीड़ को नियंत्रित करने की चुनौती थी और दूसरी तरफ खुद को हमले से बचाने का सवाल. राठी के मुताबिक, पुलिस ने हालात शांत करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति हिंसक होती चली गई.
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों में भी निभाई थी अहम भूमिका
हेमेंद्र सिंह राठी का पुलिस करियर पहले भी कई चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों से जुड़ा रहा है. 2021 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कराने में उनकी अहम भूमिका बताई जाती है. उस वक्त राठी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात थे.
बताया जाता है कि आरोपी तक पहुंचने के लिए राठी ने मुस्लिम वेशभूषा में करीब 20 दिन तक नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में रहकर उसकी तलाश की थी. लंबे ऑपरेशन के बाद आरोपी को गिरफ्तार कराने में सफलता मिली. इस ऑपरेशन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के चलते उन्हें आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन भी मिला था.
बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की रिट
20 जुलाई की हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है. हेमेंद्र राठी के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उनका कहना है कि हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों की स्थिति को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए.
परिवार की मांग है कि पुलिसकर्मियों पर हुए हमले की भी जांच हो और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए. उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं है. यह कानून-व्यवस्था संभालने वाले पूरे तंत्र पर हमला है.
तीन फ्रैक्चर के बाद भी परिवार को कार्रवाई का इंतजार
ASI हेमेंद्र राठी की आपबीती में हिंसा का वह पहलू सामने आता है, जिसमें ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी खुद हमले का शिकार हो गया. चेहरे पर तीन फ्रैक्चर और पीठ पर चोट के बावजूद उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने भीड़ को शांत करने और हालात नियंत्रित करने की कोशिश की थी.
अब परिवार चाहता है कि 20 जुलाई की घटना की जांच में घायल पुलिसकर्मियों के मामले को भी उचित महत्व मिले. हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान हो और उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए. राठी की कहानी सिर्फ एक घायल पुलिसकर्मी की कहानी नहीं है. यह उस दिन ड्यूटी पर मौजूद उन पुलिसकर्मियों की मुश्किलों की तस्वीर भी है, जो हिंसक भीड़ के बीच कानून-व्यवस्था संभालने की कोशिश कर रहे थे.
