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CAG ने 2023 की रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के विभागों में 2000 करोड़ से ज्यादा की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है. रिपोर्ट में जीएसटी और बिजली सब्सिडी में बड़ी कमियां मिली हैं. बिना बिजली जलाए 50 हजार से ज्यादा लोगों को सब्सिडी बांट दी गई. ई-खरीद प्रणाली और परीक्षा खर्च में भी बड़ा झोल सामने आया है.
दिल्ली विधानसभा में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट. (Photo : PTI)
नई दिल्ली: दिल्ली को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की 2023 की रिपोर्ट गुरुवार को विधानसभा के पटल पर रखी गई. रिपोर्ट के अनुसार इन ऑडिट निष्कर्षों का कुल मौद्रिक मूल्य 2030.16 करोड़ रुपये आंका गया है. साल 2022-23 में दिल्ली सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियां 62703 करोड़ रुपये थीं. वहीं 2018-19 में यह आंकड़ा 43112.60 करोड़ रुपये था. इतनी बड़ी प्राप्तियों के बीच 2000 करोड़ से ज्यादा का झोल कई गंभीर सवाल खड़े करता है. साल 2023-24 में 22 इकाइयों की जांच में ही 145 मामले सामने आ गए. इनमें 220.59 करोड़ रुपये की गड़बड़ी मिली है. उस समय दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार थी.
जीएसटी ई-वे बिल और टैक्स चोरी में कैसे हुआ खेल?
CAG ने अपनी रिपोर्ट में जीएसटी ई-वे बिल प्रणाली की पोल खोल दी है. इसमें कई तरह की प्रणालीगत कमियां पाई गई हैं. पांच टैक्सपेयर्स ने 33.89 करोड़ की सप्लाई पर 4.68 करोड़ का टैक्स ही नहीं चुकाया. सबसे ज्यादा हैरान करने वाला मामला रद्द पंजीकरण वाले टैक्सपेयर्स का है. ऐसे 28 करदाताओं ने धड़ल्ले से 3629 ई-वे बिल बना डाले. इसका सीधा टैक्स प्रभाव 99.39 करोड़ रुपये रहा. तीन टैक्सपेयर्स ने 9.70 करोड़ का अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट भी ले लिया. इसके अलावा जीएसटी रिटर्न की जांच में 70 करदाताओं के 344 मामलों में खामियां मिली हैं. इन सभी मामलों का कुल राजस्व प्रभाव 3071.92 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी 1.91 करोड़ का कम भुगतान सामने आया है.
बिना बिजली जलाए कैसे बंट गई करोड़ों रुपये की फ्री सब्सिडी?
रिपोर्ट में बिजली सब्सिडी के मैनेजमेंट पर सबसे बड़े सवाल उठाए गए हैं. दिल्ली में बिजली सब्सिडी 2405.59 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा बढ़ गई. यह साल 2022-23 में बढ़कर 3161 करोड़ रुपये हो गई. CAG के मुताबिक इस सब्सिडी का लाभ लगभग सभी घरेलू उपभोक्ताओं को मिला है. लेकिन सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा शून्य खपत वाले मामलों में देखने को मिला. 50 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं ने लंबे समय तक शून्य बिजली खपत की. इसके बावजूद उन्हें 17.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे दी गई. यह डाटा सरकारी मॉनिटरिंग सिस्टम की बड़ी नाकामी दिखाता है. सरकार को इस लीकेज को रोकने के लिए तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है.
ई-खरीद प्रणाली और सरकारी परीक्षाओं में कहां हुआ बड़ा झोल?
सरकारी विभागों की ई-खरीद प्रणाली में भी कई नियंत्रण संबंधी कमियां सामने आई हैं. सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं. दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) के कामकाज पर भी उंगली उठी है. DSSSB द्वारा आयोजित जूनियर इंजीनियर परीक्षा पर 1.05 करोड़ रुपये का खर्च निष्फल पाया गया. यह जनता के पैसे की सीधे तौर पर बर्बादी है. CAG ने ई-खरीद प्रणाली में मजबूत सत्यापन लागू करने की साफ सिफारिश की है.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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