नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने टैक्स वसूली बढ़ाने और राजस्व में हो रहे संभावित नुकसान का पता लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) से पूरे टैक्स सिस्टम का व्यापक अध्ययन कराने का फैसला किया है. इस अध्ययन में यह जांच होगी कि जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टांप ड्यूटी, वाहन कर और दूसरे प्रमुख राजस्व स्रोतों में कहां सुधार की जरूरत है और किन वजहों से सरकार को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल पा रहा है.
सरकार का मानना है कि अगर टैक्स प्रशासन, डेटा मॉनिटरिंग और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तो बिना टैक्स दर बढ़ाए भी राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी की जा सकती है. इसी उद्देश्य से एनआईपीएफपी को मौजूदा व्यवस्था की जांच परख करने के बाद सुधारों की सिफारिश करने का जिम्मा दिया गया है.
GST लक्ष्य से पीछे रहने के बाद लिया गया फैसला
दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी से 40 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था. हालांकि वास्तविक संग्रह इस लक्ष्य से कम रहा. सरकार के आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक जीएसटी और वैट से कुल 36,629.54 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. इसी अंतर के बाद सरकार ने यह समझने का फैसला किया कि टैक्स संग्रह में कमी की वजह आर्थिक परिस्थितियां हैं, प्रशासनिक चुनौतियां हैं या फिर कहीं टैक्स लीकेज हो रहा है.
किन विभागों की होगी जांच
अध्ययन के दौरान व्यापार एवं कर विभाग, आबकारी विभाग, परिवहन विभाग, राजस्व विभाग, स्टांप ड्यूटी और संपत्ति पंजीकरण से जुड़े सिस्टम की समीक्षा की जाएगी. विशेषज्ञ यह भी देखेंगे कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कितना प्रभावी है, डेटा एनालिटिक्स किस स्तर पर हो रहा है और टैक्स चोरी रोकने के मौजूदा उपाय कितने कारगर हैं.
ये हैं सरकार के बड़े लक्ष्य
सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टैक्स कलेक्शन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं.
| विभाग | 2026-27 का लक्ष्य (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| GST | 45,000 |
| स्टांप ड्यूटी | 11,000 |
| आबकारी | 7,200 |
| मोटर व्हीकल टैक्स | 3,800 |
सरकार का मानना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना होगा.
टैक्स टू जीडीपी अनुपात बढ़ाने पर भी फोकस
दिल्ली सरकार की कोशिश टैक्स टू जीडीपी अनुपात बढ़ाने की भी है. वर्ष 2024-25 में यह अनुपात 4.9 प्रतिशत था, जिसे 2025-26 में बढ़ाकर 5.16 प्रतिशत तक ले जाने का अनुमान है. किसी राज्य का टैक्स टू जीडीपी अनुपात जितना बेहतर होता है, उसकी विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने की क्षमता भी उतनी मजबूत मानी जाती है.
दूसरे राज्यों के मॉडल का भी होगा अध्ययन
एनआईपीएफपी सिर्फ दिल्ली के टैक्स सिस्टम का मूल्यांकन नहीं करेगा, बल्कि दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनाई जा रही सफल कर संग्रह व्यवस्था का भी अध्ययन करेगा. रिपोर्ट में यह सुझाव दिया जाएगा कि किन तकनीकों, निगरानी प्रणालियों और प्रशासनिक सुधारों को अपनाकर टैक्स लीकेज कम किया जा सकता है और राजस्व बढ़ाया जा सकता है. सरकार को उम्मीद है कि इस अध्ययन के बाद टैक्स प्रशासन पहले से ज्यादा मजबूत होगा और बिना नए टैक्स लगाए भी राजस्व संग्रह में सुधार किया जा सकेगा. इससे विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं के लिए सरकार के पास अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे.
