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biggest flop debut story: क्रिकेट इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो पाएंगे कि कई खिलाड़ियों ने शानदार शुरुआत की और गुमनाम हो गए, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा भी था जिसका डेब्यू इतिहास का सबसे बड़ा फ्लॉप साबित हुआ, पर उसने अपनी जिद और कड़े संघर्ष से खुद को एक लेजेंड के रूप में स्थापित किया. श्रीलंका के पूर्व कप्तान मार्वन अटापट्टू एक ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने टीम में अपने आपको स्थापित करने के लिए 6 साल मेहनत की और टीम से अंदर बाहर होते रहे
टेस्ट क्रिकेट का सबसे खराब डेब्यू श्रीलंका के मार्वन अटापट्टू के नाम
नई दिल्ली. ये क्रिकेट नहीं आसान बस इतना समझ लीजिए एक आग का दरिया है और रोज इसमें गोता लगाकर पार जाना है. इस शायराना लाइन को बोलना जितना आसान है उसको अमल में लाना उतना ही मुश्किल क्योंकि किस कोशिश में आप डूबेंगे और कितनी कोशिश के बाद आप पार होंगे ये कोई नहीं जानता. इसीलिए क्रिकेट खेल में किस्मत का बड़ा रोल होता है. कहते है ना किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जो कभी हार नहीं मानते. यह कहावत क्रिकेट की दुनिया में श्रीलंका के महान बल्लेबाज और पूर्व कप्तान मार्वन अटापट्टू पर एकदम सटीक बैठती है.
क्रिकेट इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो पाएंगे कि कई खिलाड़ियों ने शानदार शुरुआत की और गुमनाम हो गए, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा भी था जिसका डेब्यू इतिहास का सबसे बड़ा फ्लॉप साबित हुआ, पर उसने अपनी जिद और कड़े संघर्ष से खुद को एक लेजेंड के रूप में स्थापित किया. श्रीलंका के पूर्व कप्तान मार्वन अटापट्टू एक ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने टीम में अपने आपको स्थापित करने के लिए 6 साल मेहनत की और टीम से अंदर बाहर होते रहे.
पहली 6 पारियाँ और पांच 0
मार्वन अटापट्टू ने साल 1990 में भारत के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का आगाज किया था किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए यह एक बड़ा मौका था, लेकिन अटापट्टू के लिए यह किसी बुरे सपने जैसा रहा. अपने डेब्यू मैच की दोनों पारियों में वह खाता भी नहीं खोल पाए और 0 और 0 पर आउट होकर टीम से बाहर हो गए. इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में रन बनाए और 2 साल बाद यानी 1992 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी टीम में वापसी हुई. उम्मीद थी कि इस बार वह कुछ कमाल करेंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. इस कमबैक मैच की पहली पारी में वह फिर 0 पर आउट हो गए, जबकि दूसरी पारी में उन्होंने जैसे-तैसे अपना पहला अंतरराष्ट्रीय रन (1 रन) बनाया. इसके तुरंत बाद उन्हें फिर ड्रॉप कर दिया गया. सिलसिला यहीं नहीं रुका. साल 1994 में भारत के खिलाफ उन्हें तीसरा मौका मिला. इस बार भी कहानी नहीं बदली और अटापट्टू दोनों पारियों में शून्य (0-0) पर पवेलियन लौट गए. यानी अपने करियर की पहली 6 पारियों में वह 5 बार शून्य पर आउट हुए थे और उनके बल्ले से कुल जमा 1 रन निकला था. कोई भी साधारण खिलाड़ी होता तो शायद उसका करियर यहीं खत्म हो जाता और वह डिप्रेशन में चला जाता.
तीन साल की तपस्या और वापसी
लगातार तीन बार टीम से निकाले जाने के बाद अटापट्टू ने हार नहीं मानी. उन्होंने अगले तीन साल तक घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा किया और अपनी तकनीक की कमियों को सुधारा. साल 1997 में जब उन्होंने चौथी बार टीम में वापसी की, तो दुनिया ने एक बदला हुआ मार्वन अटापट्टू देखा. इसके बाद अटापट्टू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह श्रीलंकाई बल्लेबाजी के मजबूत स्तंभ बन गए. उन्होंने अपने टेस्ट करियर में शानदार वापसी करते हुए कुल 16 शतक जड़े. इतना ही नहीं, लंबी और मैराथन पारियाँ खेलने की अपनी कला के दम पर उन्होंने क्रिकेट इतिहास में 6 शानदार दोहरे शतक भी अपने नाम किए. टेस्ट क्रिकेट में 5502 रन बनाने वाले मार्वन अटापट्टू की यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की कहानी नहीं है, बल्कि यह हर उस इंसान के लिए एक सीख है जो असफलताओं से डरकर प्रयास करना छोड़ देता है. अटापट्टू ने साबित किया कि शुरुआत भले ही कितनी भी खराब क्यों न हो, अगर आपके पास धैर्य, कड़ी मेहनत और खुद पर भरोसा है, तो आप इतिहास को बदल सकते हैं.
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राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …
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