प्राइवेट यूनिवर्सिटी में लोकल स्टूडेंट्स का दबदबा, जानिए किस राज्य में कितनी सीटें हैं आरक्षित

नई दिल्ली (Domicile Reservation in Private Universities). प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई का खर्च और बढ़ता कॉम्पिटिशन अक्सर लोकल स्टूडेंट्स के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने अपने यहां के स्टूडेंट्स के लिए प्राइवेट कॉलेजों में 25% सीटें आरक्षित करने का फैसला किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोकल निवासियों को अपनी ही मिट्टी में उच्च शिक्षा का अवसर देने के मामले में दिल्ली अकेला राज्य नहीं है?

देश के कई प्रमुख राज्य बहुत पहले से ही अपने यहां के मूल निवासियों (डोमिसाइल धारकों) के हितों की रक्षा के लिए कानून बना चुके हैं. उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों से लेकर पश्चिमी और दक्षिणी भारत के राज्यों तक, सरकारें प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट और राज्य स्तरीय काउंसलिंग के जरिए लोकल स्टूडेंट्स के लिए सीटें आरक्षित करती आ रही हैं. दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल का मतलब समझने के साथ ही जानिए देश के अलग-अलग राज्यों में प्राइवेट कॉलेजों में रिजर्वेशन का क्या सिस्टम है.

Delhi Private University Bill 2026: दिल्ली के प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल में क्या है?

अगर आप दिल्ली में रहते हैं और 12वीं के बाद किसी अच्छी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. दिल्ली के रहने वाले बच्चों को प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में न सिर्फ 25% का सीधा आरक्षण मिलेगा, बल्कि फीस में भी बड़ी छूट दी जाएगी. सरकार ने ‘दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल 2026’ के ड्राफ्ट को हरी झंडी दे दी है. इससे दिल्ली के मिडिल क्लास और गरीब परिवारों के होनहार बच्चों को मनचाहे कोर्स में आसानी से एडमिशन मिल सकेगा. साथ ही महंगी पढ़ाई के बोझ से भी राहत मिलेगी.

दिल्लीवालों के नाम होंगी 25% सीटें

प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद दिल्ली की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को अपने हर कोर्स में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें दिल्ली के मूल निवासी स्टूडेंट्स के लिए आरक्षित रखनी होंगी. इसका मतलब है कि बाहरी राज्यों के भारी कॉम्पिटिशन के बीच दिल्ली के युवाओं के पास अपने ही शहर में पढ़ाई करने का अवसर रहेगा. यह एडमिशन प्रक्रिया दिल्ली सरकार की मौजूदा कोटा नीति के आधार पर ही पूरी की जाएगी.

फीस में भी मिलेगी बड़ी राहत (स्कॉलरशिप प्लान)

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की भारी-भरकम फीस को देखते हुए ड्राफ्ट में स्कॉलरशिप और फीस माफी की खास व्यवस्था की गई है:

  • 100% फीस माफ: कुल आरक्षित वर्ग के 5% सबसे मेधावी और जरूरतमंद स्टूडेंट्स की पूरी फीस माफ होगी.
  • 50% फीस माफ: 10% स्टूडेंट्स को आधी यानी 50 प्रतिशत फीस में छूट का फायदा मिलेगा.
  • 25% फीस माफ: बाकी बचे 10% स्टूडेंट्स को 25 प्रतिशत फीस में राहत दी जाएगी.

उत्तराखंड और हिमाचल: पहाड़ी युवाओं के लिए 25% कोटा तय

पहाड़ी राज्यों में शिक्षा के अवसरों को मजबूत करने के लिए सरकारों ने निजी विश्वविद्यालयों पर खास शर्तें लागू की हैं. ‘उत्तराखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट’ के तहत राज्य की सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में 25 प्रतिशत सीटें सिर्फ उन युवाओं के लिए रिजर्व रखी जाती हैं, जिनके पास राज्य का स्थायी निवास प्रमाण पत्र होता है. ठीक इसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी राज्य के डोमिसाइल धारक स्टूडेंट्स के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटों का आरक्षण अनिवार्य किया गया है.

हरियाणा और राजस्थान: स्थानीय और वंचित वर्गों का ध्यान

मैदानी राज्यों में भी यह नियम काफी सख्ती से लागू है:

  • हरियाणा: यहां स्थायी निवासी स्टूडेंट्स को प्राइवेट संस्थानों में 25% आरक्षण का लाभ दिया जाता है. इसकी खास बात है कि इस 25% कोटे के अंदर 10% सीटें अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़े वर्ग (BC) के स्थानीय छात्रों के लिए विशेष रूप से तय होती हैं.
  • राजस्थान: ‘राजस्थान यूनिवर्सिटी प्राइवेट एक्ट’ के तहत राज्य के मूल निवासी स्टूडेंट्स को निजी कॉलेजों में 15 से लेकर 25 प्रतिशत तक आरक्षित सीटों का लाभ मिलता है.

मध्य प्रदेश, गुजरात से लेकर दक्षिण भारत तक प्राथमिकता

केवल उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी एडमिशन नियमों के जरिए स्थानीय स्टूडेंट्स को राहत दी जाती है. मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में राज्य स्तरीय काउंसलिंग (State-Level Counselling) और एडमिशन पॉलिसी के तहत स्थानीय डोमिसाइल वाले स्टूडेंट्स के लिए या तो सीटें आरक्षित रखी जाती हैं या फिर मेरिट लिस्ट में उन्हें पहली प्राथमिकता दी जाती है.

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