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Monsoon Gardening Tips : मानसून का सीजन चल रहा है. ये मौसम नए पौधे लगाने के लिए बेस्ट है. इस मौसम में पौधों की जड़ जल्दी मिट्टी पकड़ती है और उनकी ग्रोथ तेजी से होती है. हालांकि गार्डनिंग के शौकीन लोग एक गलती अक्सर कर बैठते हैं. वे पौधे तो सही चुनते हैं, लेकिन गमलों के चयन में गलती कर बैठते हैं. गलत गमले में पौधे की जड़ें ठीक से विकसित नहीं हो पातीं और ज्यादा पानी जमा होने से पौधा सूखने लगता है. बहुत छोटे गमले में जड़ों को फैलने की जगह नहीं मिलती, जबकि जरूरत से ज्यादा बड़े गमले में मिट्टी ज्यादा देर तक गीली रहती है. गमला कितना सुंदर है, यह देखने से पहले उसके नीचे बने ड्रेनेज होल जरूर जांचें.
घर में पौधे लगाते समय हम अक्सर मिट्टी, खाद और पानी पर ही ध्यान देते हैं लेकिन गमले का चुनाव भी उतना ही जरूरी है. गलत गमले में पौधे की जड़ें ठीक से विकसित नहीं हो पातीं और ज्यादा पानी जमा होने से परेशानी शुरू हो सकती है. हर पौधे की जरूरत अलग होती है इसलिए पौधा खरीदने के साथ उसके लिए सही गमला चुनना भी जरूरी है. इससे जड़ों को सही जगह मिलती है और पौधे की ग्रोथ भी अच्छी बनी रहती है.
मिट्टी के गमले पौधों के लिए पुराने समय से पसंद किए जाते हैं इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये हवा को अंदर तक पहुंचने देते हैं और अतिरिक्त नमी भी जल्दी बाहर निकलती है, इसलिए जिन पौधों को ज्यादा पानी पसंद नहीं होता, उनके लिए ये अच्छा विकल्प हैं. कैक्टस, सुक्युलेंट और जेड प्लांट जैसे पौधों को मिट्टी के गमले में लगाया जा सकता है. गर्मी में भी इनकी मिट्टी अपेक्षाकृत जल्दी सूख जाती है, जिससे जड़ों में पानी रुकने की समस्या कम होती है.
प्लास्टिक के गमले हल्के, सस्ते और आसानी से एक जगह से दूसरी जगह रखे जा सकते हैं. इनमें मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है इसलिए बार-बार पानी देने की जरूरत नही पड़ती है. ऐसे पौधे जिन्हें थोड़ी ज्यादा नमी पसंद है, उनके लिए प्लास्टिक पॉट काम आ सकते हैं. हालांकि इसमें पानी ज्यादा देर तक रुक सकता है इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर जांचें. गमले में नीचे पर्याप्त छेद होना भी बहुत जरूरी है.
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सिरेमिक या ग्लेज्ड गमले देखने में काफी खूबसूरत होते हैं और घर की सजावट भी बढ़ा देते हैं लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय पौधे की जरूरत समझना जरूरी है. ऐसे गमले नमी को लंबे समय तक रोक सकते हैं. अगर पौधे को सूखी मिट्टी पसंद है तो इसमें पानी देने में सावधानी रखनी होगी. सबसे जरूरी बात यह है कि सिरेमिक पॉट में ड्रेनेज होल जरूर हो. बिना छेद वाले गमले में अतिरिक्त पानी जमा होकर जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है.
रामपुर के किसान गेंदालाल बताते हैं कि सिर्फ गमले की सामग्री ही नहीं, उसका आकार भी पौधे की ग्रोथ पर असर डालता है. बहुत छोटे गमले में जड़ों को फैलने की जगह नहीं मिलती, जबकि जरूरत से बहुत बड़ा गमला भी परेशानी पैदा कर सकता है. बड़े गमले में मिट्टी ज्यादा देर तक गीली रह सकती है. इसलिए पौधे के आकार और उसकी जड़ों को देखकर पॉट चुनें. अगर जड़ें गमले से बाहर निकलने लगें या पौधा तेजी से बढ़ रहा हो तब बड़े गमले में शिफ्ट करना बेहतर रहता है.
गमला कितना सुंदर है, यह देखने से पहले उसके नीचे बने ड्रेनेज होल जरूर जांचें. पानी निकलने की सही व्यवस्था पौधे की जड़ों के लिए बेहद जरूरी होती है. अगर पानी नीचे से बाहर नहीं निकलेगा तो मिट्टी लगातार गीली रह सकती है और जड़ों में सड़न की समस्या शुरू हो सकती है. कई सजावटी पॉट में छेद नहीं होते, ऐसे पॉट में सीधे पौधा लगाने के बजाय कवर पॉट की तरह इस्तेमाल करना बेहतर है. पौधे को छेद वाले गमले में रखें.
सब्जियां या कुछ तेजी से बढ़ने वाले पौधे लगाने के लिए केवल पारंपरिक गमले ही विकल्प नहीं हैं. इनके लिए ग्रो बैग भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इनमें मिट्टी भरना और पौधों की जगह बदलना आसान रहता है. टमाटर, मिर्च, बैंगन और कई दूसरी सब्जियों को उचित आकार के ग्रो बैग में उगाया जा सकता है, खासकर छत या बालकनी में खेती करने वालों के लिए ये उपयोगी हो सकते हैं. बस बैग की क्षमता पौधे की जड़ों और उसके अंतिम आकार के हिसाब से चुनना चाहिए.
