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What is Lumpy Virus : बारिश का मौसम आते ही लंपी रोग का खतरा बढ़ जाता है. गाजियाबाद में लंपी स्किन डिजीज के 22 मामले सामने आने के बाद पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. लोकल 18 ने गाजियाबाद के पशुचिकित्सक अधिकारी डॉ. एसपी पाण्डेय बताते हैं कि ये ऐसी संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और दूसरे गोवंश के लिए घातक है. यह बीमारी सीधे हवा की बजाय संक्रमित पशु के संपर्क, मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के जरिए फैलती है. पशु को तेज बुखार, अचानक सुस्त और कमजोर होना, खुराक कम कर देना और दूध का उत्पादन घट जाना इसके लक्षण हैं. इसके बाद शरीर पर लाल चकत्ते और गांठें उभरने लगती हैं.
गाजियाबाद. यूपी के गाजियाबाद में गोवंशों को एक बार फिर लंपी वायरस ने अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है. जिले में लंपी स्किन डिजीज के 22 मामले सामने आने के बाद पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. यह बीमारी आखिर कितनी खतरनाक है, कैसे फैलती है और पशुओं को इससे कैसे बचाया जा सकता है, लोकल 18 ने इस बारे में गाजियाबाद के पशुचिकित्सक अधिकारी डॉ. एसपी पाण्डेय से बात की. डॉ. एसपी पाण्डेय बताते हैं कि लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से गाय और दूसरे गोवंश को प्रभावित करती है. बीमारी में तेज बुखार के साथ पशु सुस्त पड़ जाता है उसकी भूख कम हो जाती है और शरीर पर लाल चकत्ते व गांठें निकलने लगती हैं. यह बीमारी सीधे हवा से नहीं, बल्कि संक्रमित पशु के संपर्क और मच्छर, मक्खी व किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के जरिए तेजी से फैल सकती है. पशुओं के आसपास गंदगी और पानी जमा होना खतरे को बढ़ा देता है.
फूटने के बाद मवाद
डॉ. एसपी पाण्डेय बताते हैं कि लंपी वायरस मुख्य रूप से गोवंश में देखा जाता है. संक्रमित पशु के संपर्क में आने या उसके आसपास मौजूद मच्छर-मक्खी जैसे कीटों के काटने से संक्रमण दूसरे पशुओं तक पहुंच सकता है. पशुपालक बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकते हैं. पशु को तेज बुखार आना, अचानक सुस्त और कमजोर होना, खुराक कम कर देना और दूध का उत्पादन घट जाना इसके प्रमुख संकेत हैं. इसके बाद शरीर पर लाल चकत्ते या गांठें दिखाई देने लगती हैं. ये गांठें एक-दो दिन में बड़ी हो सकती हैं और कई मामलों में फूटने के बाद उनमें से मवाद निकलता है.
न ले जाएं इधर-उधर
लंपी वायरस का कोई कारगर सीधा इलाज नहीं है, इसलिए बीमारी से बचाव में टीकाकरण सबसे अहम है. गाजियाबाद में पशुपालन विभाग अब तक 40 हजार से अधिक गोवंश का टीकाकरण करा चुका है और अभियान लगातार जारी है. जिले में करीब 66 हजार गोवंश मौजूद हैं. अब तक सामने आए 22 मामलों में किसी भी पशु की हालत गंभीर नहीं बताई गई है. विभाग की ओर से पशुपालकों को सलाह दी जा रही है कि लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग रखें. पशु को अनावश्यक रूप से इधर-उधर ले जाने से बचें और बिना पशु चिकित्सक की सलाह के खुद से कोई दवा या उपचार न करें.
खिलाएं इसकी पत्तियां
डॉ. एसपी पाण्डेय के मुताबिक, बीमारी से बचाव के लिए पशुओं के आसपास साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है. बाड़े में गंदगी और पानी जमा न होने दें क्योंकि ऐसी जगहों पर मच्छर, मक्खी और दूसरे कीट तेजी से पनपते हैं. पशुओं को पर्याप्त साफ पानी और पौष्टिक संतुलित आहार दें. डॉ. हल्दी, गिलोय और चकवड़ की पत्तियां पशुओं को दी जा सकती हैं. हालांकि इन्हें चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. तेज बुखार, सुस्ती, भूख कम होना, दूध कम होना, शरीर पर चकत्ते या गांठें और चलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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