नाना से सीखा संगीत, 4 साल में दिखाई प्रतिभा, आज T-Series और Tips जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुकीं डॉ. नीता सिंह

नई दिल्ली: कहते हैं कि शास्त्रीय गायन वही सुरीली और मधुर आवाज में गा सकता है, जिसके ऊपर मां सरस्वती का हाथ हो. मां सरस्वती के आशीर्वाद के बगैर शास्त्रीय गायन को सीख पाना भी बेहद कठिन होता है. इसीलिए डॉ. नीता सिंह को लोग मां सरस्वती कहकर भी पुकारते हैं. आपको बता दें कि डॉ. नीता सिंह एक बेहद मशहूर आध्यात्मिक एवं शास्त्रीय संगीत गायिका हैं, जिन्होंने 50 साल सिर्फ शास्त्रीय संगीत को दे दिए. आज युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत भी सीखा रही हैं. साथ में ही उनकी सरकार से भी यह गुजारिश है कि सरकार स्कूलों में शास्त्रीय संगीत को एक्टिविटी के तौर पर न रखकर एक अनिवार्य सब्जेक्ट बना दें, ताकि भारत के शास्त्रीय संगीत को आने वाली युवा पीढ़ी भी समझ सके, जान सके और इसे जिंदा रख सके.

लोकल 18 की खास बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका जन्म जरूर हरियाणा में हुआ, लेकिन वह हरियाणा में कभी रही नहीं. ज्यादातर वक्त उनका बनारस और देहरादून में ही बीता है. उन्होंने बताया कि परिवार में उनके नाना थे, जो भजन गायक थे. जिस वजह से नाना को लोग राम जी कहते थे. नाना से ही उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जाना और समझा. मात्र 4 साल की उम्र में भजन सुनाकर उन्होंने अपने माता-पिता को हैरान कर दिया था. इसके बाद उनके माता-पिता को भी शास्त्रीय संगीत और भजन का शौक हुआ.

बीएचयू से ली डॉक्टर ऑफ म्यूजिक की उपाधि

डॉ. नीता सिंह ने बताया कि उनके पहले गुरु कर्नाटक के थे, जिनका नाम पंडित शंकर एन पाटिल था. वह उनको और उनके साथ के बच्चों को हर जगह लेकर के जाते थे. देहरादून में उनका आश्रम था. वहां पर भी वह सभी बच्चों को शास्त्रीय संगीत की तालीम देते थे. उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की थी और इसके बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ म्यूजिक की उपाधि ली. तब उनकी उम्र सिर्फ 23 साल थी.

वहीं, एडवांस्ड ट्रेंनिंग के लिए भारतीय संगीत का केंद्र बनारस वह गई थी. जहां पर उन्हें इतनी बड़ी उपाधि मिली. उन्होंने बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उन्हें सीसीआरटी (CCRT) स्कॉलरशिप भी मिली थी. उन्होंने बताया कि उनकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट तब साबित हुआ, जब उनकी शादी 1989 में डॉ. अवनीश सिंह से हुई. तब उनके साथ वह मुंबई चली गई. जहां पर उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया.

हरिहरन, अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल के साथ किया काम

डॉ. नीता सिंह ने बताया कि जब वह अपने पति के साथ मुंबई गई, तब उनकी पहली एल्बम उनके पति ने ही रिलीज की थी. उनके पति अवनीश सिंह उनका बहुत सहयोग हमेशा ही करते रहे हैं. उन्होंने बताया कि अपने पति के साथ मुंबई में रहते हुए उन्हें टी-सीरीज और टिप्स जैसी बड़ी म्यूजिक कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिला. इसी के साथ ही अनूप जलोटा, पंडित जसराज और अनुराधा पौडवाल के साथ ही हरिहरन जैसे मशहूर सिंगर्स के साथ उन्हें परफॉर्मेंस करने का मौका मिला. सभी ने उनकी आवाज को काफी पसंद किया और प्रशंसा की. इसके अलावा मशहूर आध्यात्मिक चैनल आस्था पर भी उनके लगातार रिकॉर्डिंग और शो हुए.

संगीत नाटक अकादमी से 5 साल मिला प्रथम पुरस्कार

डॉ. नीता सिंह ने अपनी बचपन की याद को याद करते हुए बताया कि जब वह सावन के महीने में अपने दोस्तों के घर जाती थी तो उनकी मां कहती थी कि तुम्हें झूले पर तब बैठने देंगे. जब तुम गाना सुनाओगी. बचपन से ही वह भजन और आध्यात्मिक के साथ ही शास्त्रीय संगीत को गा रही हैं. उन्होंने बताया कि ठुमरी और कजरी उनके सबसे पसंदीदा हैं. आज उनके अधीन में बच्चे ऑफलाइन और ऑनलाइन ट्रेनिंग ले रहे हैं.

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ की संगीत नाटक अकादमी से उन्हें 5 साल लगातार प्रथम पुरस्कार भी मिला है और सफाईबाज फिल्म में उन्होंने लोरी गाई है. जो कि काफी मशहूर और प्रसिद्ध रही. उन्होंने बताया कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

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