नई दिल्ली: राजधानी में सालों से जारी पानी की किल्लत और कम प्रेशर की समस्या अब हमेशा के लिए बीते दिनों की बात बनने जा रही है. दिल्ली जल बोर्ड ने शहर के वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी तरह कायाकल्प करने के लिए 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के भारी भरकम प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है. इस बड़े कदम का सीधा मकसद दिल्ली के हर घर तक 24 घंटे पर्याप्त प्रेशर के साथ पीने का साफ पानी पहुंचाना है. इस महाप्लान के तहत वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट कमांड एरिया में एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद से 1,741 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे. इसके साथ ही वेस्ट और साउथ-वेस्ट दिल्ली के लिए 11,427 करोड़ रुपये के विशाल प्रोजेक्ट को प्रशासनिक मंजूरी मिली है. इस पूरी योजना में पुरानी पाइपलाइनों को बदलने, नए अंडरग्राउंड वाटर टैंक बनाने, 100 फीसदी स्मार्ट मीटरिंग करने और पानी के नुकसान को 15 फीसदी से नीचे लाने का मजबूत खाका खींचा गया है.
वजीराबाद कमांड एरिया के लाखों लोगों को मिलेगा 24 घंटे पानी
वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट कमांड एरिया में जलापूर्ति को आधुनिक बनाने के लिए 1,741 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट में एशियन डेवलपमेंट बैंक 70 फीसदी फंड देगा और बाकी 30 फीसदी रकम दिल्ली सरकार लगाएगी.
- इस योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें पहले हिस्से पर 805.95 करोड़ और दूसरे हिस्से पर 935.16 करोड़ रुपये का निवेश होगा. यह प्रोजेक्ट लगभग 44 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 8 विधानसभा सीटों को कवर करेगा.
- इस परियोजना से मॉडल टाउन, मुखर्जी नगर, जहांगीरपुरी, आजादपुर, पंजाबी बाग, केशवपुरम, पीतमपुरा, शालीमार बाग, शकूरपुर, त्रिनगर, पश्चिम विहार, रानी बाग, वजीरपुर और अशोक विहार के लाखों लोगों को भरपूर फायदा मिलेगा.
- इस इलाके के 7 अंडरग्राउंड जलाशयों की 110.53 एमएल क्षमता को अपग्रेड किया जाएगा. पूरे इलाके में 836 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क तैयार होगा, जिसमें 570 किलोमीटर बिल्कुल नई पाइपलाइन शामिल है.
- पानी की बर्बादी और लीकेज रोकने के लिए इलाके को 131 डिस्ट्रिक्ट मीटरिंग एरिया में बांटा जाएगा. इसमें 2.15 लाख नए हाउस सर्विस कनेक्शन दिए जाएंगे और सबकी शत-प्रतिशत मीटरिंग होगी.
- स्काडा सिस्टम और स्मार्ट मीटर की मदद से पानी के बहाव पर रियल टाइम नजर रखी जाएगी. इससे हर व्यक्ति को रोजाना 150 लीटर पानी मिलेगा और लीकेज का नुकसान घटकर 15 फीसदी से भी कम रह जाएगा.
वेस्ट दिल्ली के नौ विधानसभा क्षेत्रों में पाइपलाइन का जाल बदलेगा
वेस्ट दिल्ली के बड़े इलाके में पानी की पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को पूरी तरह बदलने का फैसला हुआ है. इस प्रोजेक्ट पर कुल 4,330.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें से 1,472.45 करोड़ रुपये कैपिटल वर्क पर और 2,858.27 करोड़ रुपये अगले 15 साल के ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर खर्च होंगे. यह प्रोजेक्ट करीब 90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 9 विधानसभा क्षेत्रों में फैला होगा.
इस सुधार से वेस्ट दिल्ली के करीब 14.16 लाख निवासियों को सीधा लाभ पहुंचेगा. इलाके में कुल 1,447 किलोमीटर लंबा वाटर नेटवर्क तैयार किया जाएगा. इसमें 275 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी और 1,172 किलोमीटर पुरानी गल चुकी लाइनों को पूरी तरह बदला जाएगा.
इसके साथ ही 8 अंडरग्राउंड जलाशयों की 39.77 एमजी क्षमता का नवीनीकरण होगा. पंपिंग मशीनों को बदलकर आधुनिक स्काडा सिस्टम से जोड़ा जाएगा. इससे न सिर्फ गंदे पानी की मिक्सिंग रुकेगी, बल्कि टेल एंड तक रहने वाले घरों में भी पूरा प्रेशर मिलेगा.
साउथ-वेस्ट दिल्ली के 22 लाख लोगों को पानी संकट से मिलेगी राहत
- साउथ-वेस्ट दिल्ली में पानी की समस्या काफी पुरानी और गंभीर रही है. इसे जड़ से खत्म करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने 7,096.35 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इस बजट में से 2,337.46 करोड़ रुपये नए निर्माण पर और 4,758.88 करोड़ रुपये 15 साल के मेंटेनेंस पर लगाए जाएंगे. यह योजना 273.50 वर्ग किलोमीटर और 11 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी.
- इस प्रोजेक्ट से साउथ-वेस्ट दिल्ली के करीब 22.23 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. इलाके में कुल 2,383 किलोमीटर का विशाल पाइपलाइन नेटवर्क बनेगा. इसमें 1,274 किलोमीटर नई लाइनें बिछाई जाएंगी और 1,109 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइनों को बदला जाएगा. इसके अलावा 12 जलाशयों की 58.69 एमजी क्षमता को पूरी तरह सुधारा जाएगा.
- इस पूरे प्रोजेक्ट के फंडिंग मॉडल में 25 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड से मिलेगा. इसमें 25 फीसदी रकम दिल्ली सरकार देगी और 50 फीसदी राशि लोन या पीपीपी मॉडल से जुटाई जाएगी. नेटवर्क में स्मार्ट मीटर, बल्क फ्लो मीटर, क्लोरीन और प्रेशर सेंसर लगाए जाएंगे, ताकि पानी की शुद्धता और दबाव लगातार बना रहे.
शकूर बस्ती और ओखला में नए अंडरग्राउंड वाटर टैंक से क्या बदलाव आने वाला है?
गर्मियों और पीक डिमांड के दौरान पानी का प्रेशर बनाए रखने के लिए नए अंडरग्राउंड वाटर टैंक बनाए जा रहे हैं. शकूर बस्ती विधानसभा के हर्ष विहार में 18 एमएलडी क्षमता का नया अंडरग्राउंड जलाशय बनाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 55.21 करोड़ रुपये तय की गई है. इस जलाशय के बनने से आसपास के बड़े इलाके में पानी का स्टोरेज बढ़ेगा और सप्लाई सामान्य रहेगी.
इसी तरह ओखला इलाके के निवासियों को भी पानी की किल्लत से बड़ी राहत मिलने जा रही है. बाटला हाउस में 2.2 एमजीडी और अबुल फजल एन्क्लेव में 3.7 एमजीडी क्षमता के नए जलाशय बनाए जाएंगे. इसके साथ एक हाईटेक बूस्टर पंपिंग स्टेशन भी तैयार किया जाएगा.
इस पूरे ओखला प्रोजेक्ट पर करीब 74 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इससे इलाके के लगभग 2 लाख लोगों को पानी का बेहतर स्टोरेज और तेज प्रेशर मिलेगा. लंबे समय से पानी की किल्लत झेल रहे इन सघन इलाकों में सप्लाई का सिस्टम पूरी तरह मजबूत हो जाएगा.
दिल्ली में सीवेज के ट्रीटेड पानी से भूजल की बर्बादी कैसे रुकेगी?
- दिल्ली में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अब सीवेज के साफ किए गए पानी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा. जल बोर्ड की रीक्लेम्ड वाटर पॉलिसी 2026 के तहत ट्रीटेड सीवेज को नॉन-ड्रिंक परपज के लिए अनिवार्य किया जा रहा है. दिल्ली में हर रोज लगभग 750 एमजीडी सीवेज ट्रीट किया जाता है.
- पर्यावरणीय जरूरतों को पूरा करने के बाद करीब 483 एमजीडी ट्रीटेड पानी दोबारा इस्तेमाल के लायक बचता है. फिलहाल दिल्ली में सिर्फ 120 एमजीडी पानी का ही पुन उपयोग हो पा रहा है. बाकी बचे 363 एमजीडी पानी को अब पूरी तरह उपयोग में लाने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है.
- इस पॉलिसी के लागू होने से बागवानी, निर्माण कार्य, लैंडस्केपिंग, गाड़ियों की धुलाई और फैक्ट्रियों की कूलिंग में पीने का पानी इस्तेमाल नहीं होगा. नोटिफाइड इलाकों में 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े कंस्ट्रक्शन साइट्स पर धूल नियंत्रण, तराई और धुलाई के लिए रीक्लेम्ड पानी का उपयोग अनिवार्य होगा. साल 2036 तक सभी बड़े बल्क कंज्यूमर्स को 100 फीसदी रीक्लेम्ड पानी पर शिफ्ट करने का लक्ष्य है.
रीक्लेम्ड वाटर रेगुलेशन के नए नियमों का पालन न करने पर क्या सख्ती होगी?
रीक्लेम्ड वाटर रेगुलेशन 2026 के तहत कड़े नियम और मानक तय किए जा रहे हैं. जल बोर्ड जरूरत के हिसाब से अलग-अलग कामों के लिए रीक्लेम्ड पानी की क्वालिटी तय करेगा. इसके लिए पानी की अलग पाइपलाइन बिछाई जाएगी और उनकी कलर कोडिंग की जाएगी.
सभी यूजर्स के लिए ऑन-साइट स्टोरेज और अलग मीटर लगाना अनिवार्य होगा. जल बोर्ड के अधिकृत अधिकारियों को किसी भी परिसर में जाकर निरीक्षण करने, रिकॉर्ड जांचने और पानी के सैंपल लेने का पूरा अधिकार होगा. अगर कोई संस्थान या बिल्डर नियमों का उल्लंघन करेगा, तो उस पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
डीजेबी के पेंशनर्स के लिए कैशलेस इलाज और जमीनों की कमाई का क्या है नया प्लान?
दिल्ली जल बोर्ड ने अपने रिटायर्ड कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस मेडिकल सुविधा शुरू करने का फैसला किया है. अब सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को पैनल में शामिल अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिलेगा. इसमें इमरजेंसी के साथ-साथ सामान्य बीमारियों का इलाज भी शामिल होगा. यह सुविधा ओपीडी और आईपीडी दोनों स्तरों पर पूरी तरह लागू रहेगी.
इसके साथ ही जल बोर्ड अपनी खाली जमीनों और इमारतों से कमाई बढ़ाने की बड़ी तैयारी कर रहा है. इसके लिए एक प्रोफेशनल ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया जाएगा. यह एडवाइजर जल बोर्ड की संपत्तियों के कमर्शियल इस्तेमाल और डेवलपमेंट की रूपरेखा बनाएगा.
झंडेवालान स्थित वरुणालया हेडक्वार्टर, हैदरपुर और लाजपत नगर की आवासीय संपत्तियों की पहचान की गई है. मकसद यह है कि जल बोर्ड के काम में रुकावट डाले बिना इन संपत्तियों से लगातार राजस्व जुटाया जाए. इस कमाई का इस्तेमाल दिल्ली के वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा मजबूत बनाने में किया जाएगा.
