नई दिल्ली. भारतीय घरेलू क्रिकेट में इन दिनों अगर किसी एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वह हैं बिहार के 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और लंबे-लंबे छक्के लगाने की काबिलियत के लिए पहचाने जाने वाले वैभव दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में सेंट्रल जोन के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. ईस्ट जोन की उप-कप्तानी संभाल रहे वैभव के लिए क्वार्टर फाइनल मुकाबला बल्ले से भले ही खास न रहा हो, लेकिन गेंद से उन्होंने जो कमाल दिखाया, उसने फैंस और क्रिकेट दिग्गजों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. सेमीफाइनल से ठीक पहले भारतीय बीसीसीआई ने इस युवा सितारे का एक बेहद दिलचस्प इंटरव्यू शेयर किया है. इंटरव्यू में वैभव ने अपनी इस अप्रत्याशित गेंदबाजी और मैदान के माहौल पर खुलकर बात की.
नॉर्थ जोन के खिलाफ खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जब ईस्ट जोन के नियमित गेंदबाज विकेट निकालने के लिए जूझ रहे थे, तब टीम के कप्तान ईशान किशन (Ishan Kishan) ने एक अलग चाल चली. क्रीज पर पैर जमा चुके बल्लेबाजों की जोड़ी को तोड़ने के लिए उन्होंने गेंद वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) के हाथों में थमा दी. वैभव ने इस मौके को खाली नहीं जाने दिया और अहम मोड़ पर 2 अहम विकेट चटकाकर मैच का पासा पलट दिया. जिस खिलाड़ी को विरोधी टीम केवल एक खतरनाक बल्लेबाज मानकर रणनीति बना रही थी, उसने अपनी गेंदबाजी से ईस्ट जोन की मैच में वापसी करा दी.
वैभव सूर्यवंशी का इंटरव्यू बीसीसीआई ने जारी किया.
‘ईशान भैया को नहीं पता था मैं ‘विकेट टेकिंग’ गेंदबाज हूं’
वैभव ने बीसीसीआई की ओर से जारी वीडियो में मुस्कुराते हुए अपनी गेंदबाजी का अनुभव साझा करते हुए कहा, ‘अगर आप किसी भी बल्लेबाज से पूछेंगे, तो उसे गेंदबाजी करने में बहुत मजा आता है. ठीक वैसे ही जैसे एक गेंदबाज को बल्लेबाजी करने में मजा आता है. मैदान पर दोनों ही एक-दूसरे की भूमिका को खूब एन्जॉय करते हैं.’
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें गेंदबाजी कब और कैसे मिली, तो वैभव ने ड्रेसिंग रूम की मजेदार बात उजागर करते हुए बताया, ‘मैदान पर विकेट नहीं गिर रहा था, तो मुझे कप्तान ने बोला कि 2-3 ओवर डालो. ईशान भैया को लग रहा था कि वो मेरे हाथों में गेंद थमाकर एक रिस्क ले रहे हैं, लेकिन उन्हें शायद नहीं पता था कि मैं एक विकेट टेकिंग गेंदबाज हूं.’
‘5 विकेट भी ले लूं, तो भी 3 ओवर ही मिलेंगे’
अपनी गेंदबाजी के दौरान मन में चल रही बातों का जिक्र करते हुए 15 साल के इस युवा खिलाड़ी ने एक परिपक्व और बेफिक्र रवैया दिखाया. उन्होंने कहा, ‘गेंदबाजी करने जब मैं आया तो मेरे दिमाग में बस इतना ही चल रहा था कि अगर मैं 5 विकेट भी ले लूंगा, तब भी मुझे गेंदबाजी केवल 3 ही ओवर करने को मिलेगी. इसलिए मैंने सोचा कि जितने भी ओवर मिले, उसमें अपनी तरफ से बेस्ट डालूं और टीम के लिए योगदान दूं.’ बल्लेबाजी में जल्दी आउट होने की कसक को गेंदबाजी से पूरा करने पर वैभव ने कहा, ‘क्वार्टर फाइनल में बल्ले से मेरा प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं गया था, इसलिए गेंदबाजी में टीम के लिए योगदान देकर काफी खुशी मिली. जब एक विशुद्ध बल्लेबाज विकेट लेता है, तो उस खुशी का मजा ही कुछ और होता है. मैंने उस स्पेल को काफी एन्जॉय किया.’
ईस्ट जोन के उप-कप्तान, छोटी उम्र, बड़ी जिम्मेदारी
महज 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित रेड-बॉल प्रतियोगिता में ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाया जाना वैभव के भीतर छुपे नेतृत्व कौशल और प्रतिभा को दर्शाता है. इससे पहले उन्होंने जूनियर स्तर और घरेलू क्रिकेट में अपनी तूफानी पारियों से तहलका मचाया है. वह क्रीज पर आते ही पहली गेंद से गेंदबाजों पर दबाव बनाने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन क्वार्टर फाइनल में उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह केवल एक ‘एक-आयामी’ खिलाड़ी नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर वह गेंद से भी अपनी टीम के लिए एक्स-फैक्टर साबित हो सकते हैं. एक ऑलराउंडर के रूप में उनका यह नया रूप ईस्ट जोन के संतुलन को और अधिक मजबूत बनाता है.
सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन के खिलाफ चुनौती
30 अगस्त से शुरू हो रहे सेमीफाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन का सामना मजबूत सेंट्रल जोन की टीम से है. इस बड़े मुकाबले में सभी की नजरें एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी पर टिकी होंगी. ईस्ट जोन के फैंस और टीम प्रबंधन को उम्मीद होगी कि वैभव इस बार गेंदबाजी के साथ-साथ अपने मुख्य हथियार यानी बल्लेबाजी से भी मैदान पर गदर मचाएंगे. अपनी निडर सोच, बेबाक अंदाज और हर परिस्थिति में टीम के लिए योगदान देने के जुनून के साथ वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर एक ऐसा सितारा बनकर उभर रहे हैं, जिसकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहने वाली है.
