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दिल्ली में फायर सेफ्टी के नियमों को बेहद सख्त करने की तैयारी है. दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम, 2026 के तहत इमारतों तक फायर ब्रिगेड को आसानी से पहुंचाने के लिए 6 मीटर चौड़े रास्ते को अनिवार्य कर दिया गया है. इसके अलावा, ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन, अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, फायर पंप, इमरजेंसी पावर सप्लाई और मॉर्डन फायर कंट्रोल रूम को लेकर भी अहम फैसले लिए गए हैं. जानें दिल्ली के नए फायर सेफ्टी नियमों में क्या-क्या बदलने वाला है.
दिल्ली में नए फायर सेफ्टी नियमों के तहत अब इमारतों में आग से बचाव के इंतजाम बेहद सख्त करने की तैयारी है. (एआई इमेज)
नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में आग से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहतर बनाने के मकसद से फायर सेफ्टी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है. दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम, 2026 के तहत इमारतों में फायर सेफ्टी से जुड़े कई नए नियमों को जोड़ा गया है. इन नए नियमों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के लिए कम से कम 6 मीटर चौड़ा रास्ता, ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, इमरजेंसी पावर सप्लाई और मॉर्डन फायर कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है. नए नियम लागू होने के बाद इमारतों की फायर सेफ्टी जांच पहले से ज्यादा विस्तृत होगी. फायर सेफ्टी ऑडिटर को हर सुरक्षा व्यवस्था की मौके पर जाकर जांच करनी होगी. साथ ही, दस्तावेजों में यह दर्ज करना होगा कि संबंधित इमारत में नियमों का पालन हो रहा है या नहीं.
नए नियमों में क्या-क्या बदला
- फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के लिए 6 मीटर का रास्ता जरूरी: इमारत या परिसर तक फायर इंजन आसानी से पहुंच सके, इसके लिए कम से कम 6 मीटर चौड़ा रास्ता उपलब्ध कराना होगा. इमारत के गेट और इमारत के चारों ओर मौजूद इंटरनल अप्रोच रोड की चौड़ाई भी फायर सेफ्टी ऑडिट में देखी जाएगी.
- आग और धुएं को फैलने से रोकने की व्यवस्था: इमारतों में फायर चेक डोर और जरूरत के अनुसार प्रेसराइजेशन सिस्टम का प्रावधान होगा. फायर एण्ड स्मोक बैरियर, फायर स्टॉप और स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम भी सुरक्षा मानकों का हिस्सा होंगे. इलेक्ट्रिक शाफ्ट की सीलिंग, फायर, स्मोक, वॉटर कर्टन और फायर डैंपर जैसी जैसी व्यवस्थाओं की भी जांच होगी.
- फायर एक्सटिंग्विशर और होज रील हुए अनिवार्य: इमारत में जरूरत के हिसाब से पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर यानी आग बुझाने वाले सिलेंडर होने चाहिए. अधिकारियों की टीम यह भी जांचेगी कि ये किस प्रकार के हैं और उन पर IS मार्किंग सही है या नहीं. इसके अलावा हर मंजिल पर फायर होज रील की संख्या, पाइप की लंबाई और नोजल का आकार भी जांचा जाएगा.
- ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम: इमारतों में आग का पता लगाने के लिए ऑटोमेटिक फायर डिटेक्टर और अलार्म सिस्टम लगाना जरूरी होगा. जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि किस तरह के डिटेक्टर लगे हैं और मुख्य कंट्रोल पैनल व रिपीटर पैनल सही जगह पर हैं या नहीं. बिजली जाने की स्थिति में अलार्म सिस्टम चलता रहे, इसके लिए वैकल्पिक बिजली व्यवस्था की भी जांच होगी.
- स्प्रिंकलर और आग बुझाने की व्यवस्था: जहां जरूरी होगा, वहां इमारतों में ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर और आग बुझाने वाले सिस्टम लगाने होंगे. बेसमेंट से लेकर ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों तक इनकी जांच की जाएगी.
- हाइड्रेंट और फायर पंप की जांच: इमारतों में आग बुझाने के लिए इंटरनल हाइड्रेंट, वेट राइजर, डाउन-कॉमर और यार्ड हाइड्रेंट की व्यवस्था करनी होगी. हर मंजिल पर हाइड्रेंट और होज बॉक्स की संख्या की जांच होगी. फायर पंप हाउस के साथ मुख्य पंप, जॉकी पंप और बैकअप पंप की क्षमता और उनकी कार्यप्रणाली भी जांची जाएगी.
- आग बुझाने के लिए अलग पानी का इंतजाम: आग लगने की स्थिति के लिए इमारत में अलग से पानी का स्टोरेज रखना होगा. अंडरग्राउंड और ओवरहेड पानी की टंकियों की क्षमता जांची जाएगी. फायर सर्विस इनलेट और टैंक तक आसानी से पहुंचने की व्यवस्था भी देखी जाएगी.
- इमरजेंसी एग्जिट के लिए सख्त नियम: इमारत में बाहर निकलने के रास्तों यानी एग्जिट का साफ संकेत होना जरूरी होगा. हर फ्लोर की नंबरिंग स्पष्ट होगी और एग्जिट तक जाने वाले रास्तों पर चमकदार रिफ्लेक्टिव टेप लगाने होंगे. नियमों में फायर टावर और फायर लिफ्ट की व्यवस्था भी शामिल की गई है.
- बिजली जाने पर भी चलते रहेंगे जरूरी सिस्टम: आग के दौरान बिजली कटने पर फायर सेफ्टी सिस्टम बंद न हो, इसके लिए इमरजेंसी पावर सप्लाई जरूरी होगी. इससे फायर पंप, स्मोक वेंटिंग सिस्टम, फायरमैन लिफ्ट, एग्जिट साइन बोर्ड, इमरजेंसी लाइट और फायर अलार्म जैसे सिस्टम चलते रहने चाहिए. पब्लिक एड्रेस सिस्टम और फायर कंट्रोल रूम की लाइटिंग के लिए भी बैकअप बिजली की व्यवस्था करनी होगी.
- फायर चेक फ्लोर और रिफ्यूज एरिया: ऊंची इमारतों में फायर चेक फ्लोर और रिफ्यूज एरिया की व्यवस्था भी होनी चाहिए. रिफ्यूज एरिया वह सुरक्षित जगह होती है, जहां आग लगने की स्थिति में लोग कुछ समय के लिए सुरक्षित रुक सकते हैं. ऑडिट के दौरान इन जगहों की लोकेशन और कुल क्षेत्रफल दर्ज किया जाएगा.
- मॉर्डन फायर कंट्रोल रूम होगा जरूरी: इमारतों में लगातार निगरानी रखने वाले ऑटोमेटेड सिस्टम के साथ फायर कंट्रोल रूम बनाने का प्रावधान किया गया है. यहां फायर डिटेक्टर पैनल, फ्लो स्विच पैनल, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बैटरी बैकअप और इमारत का फ्लोर प्लान मौजूद होना चाहिए.
- फायर सेफ्टी ऑडिट भी होगा ज्यादा विस्तृत: नए फॉर्म-जे के तहत फायर सेफ्टी ऑडिटर को इमारत की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी. इसमें इमारत का नाम और पता, हर मंजिल का इस्तेमाल, पुराने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की जानकारी, निरीक्षण की तारीख और जांच के समय मौजूद मालिक या प्रतिनिधि का विवरण शामिल होगा. ऑडिटर को हर सुरक्षा मानक के सामने साफ-साफ बताना होगा कि इमारत में संबंधित व्यवस्था मौजूद है या नहीं. जरूरत पड़ने पर वह अपनी टिप्पणी भी दर्ज कर सकेगा.
किन चीजों की होगी जांच?
- इमारत तक पहुंचने वाला रास्ता और गेट की चौड़ाई
- इमारत के चारों तरफ की अंदरूनी सड़क
- फायर चेक डोर
- सीढ़ियों, लिफ्ट और लिफ्ट लॉबी में प्रेसराइजेशन सिस्टम
- आग और धुएं को रोकने वाले बैरियर
- इलेक्ट्रिकल शाफ्ट की सीलिंग
- धुआं निकालने का सिस्टम
- फायर एक्सटिंग्विशर
- फायर होज रील
- ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम
- स्प्रिंकलर और फायर सप्रेशन सिस्टम
- इंटरनल और यार्ड हाइड्रेंट
- फायर पंप और पंप हाउस
- आग बुझाने के लिए पानी का भंडार
- एग्जिट साइनेज और फ्लोर नंबरिंग
- फायर टावर और फायर लिफ्ट
- इमरजेंसी बिजली व्यवस्था
- फायर चेक फ्लोर और रिफ्यूज एरिया
- ऑटोमेटेड सिस्टम से लैस फायर कंट्रोल रूम
कब लागू होंगे नए नियम?
About the Author
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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