GDP में उछाल से नोएडा रियल एस्टेट में बूम की तैयारी, ₹50 हजार प्रति वर्गफुट तक जा सकते हैं लक्जरी फ्लैट्स के दाम, एक्सपर्ट से जानिए पूरा गणित

Noida News: भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.8 प्रतिशत की अप्रत्याशित विकास दर छूते ही अब इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर रियल एस्टेट बाजार में दिखने के संकेत मिलने लगे हैं. देश के सबसे तेजी से उभरते प्रॉपर्टी हब नोएडा में क्या घरों की कीमतें नए रिकॉर्ड बनाएंगी और क्या आगामी तिमाहियों में विदेशी पूंजी के साथ घरेलू निवेश में जबरदस्त तेजी आएगी? एक्सपर्ट्स की मानें तो मजबूत जीडीपी और बढ़ती क्रय शक्ति से नोएडा का रियल एस्टेट एक नए दौर में कदम रखने जा रहा है, जहां लक्जरी प्रॉपर्टीज के दाम 50 हजार रुपये प्रति वर्गफुट तक छू सकते हैं.

जीडीपी के मजबूत आंकड़े और ‘विकसित भारत 2047’ का विजन
लोकल18 की टीम ने रियल एस्टेट एक्सपर्ट और जेनिका वेंचर्स के संस्थापक एवं सीईओ अभिषेक राज से बात की. उन्होंने बताया कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत विजन होना बहुत जरूरी होता है. सरकार ने जिस तरह से वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना देखा है, उसके लिए इस तरह की आर्थिक ग्रोथ एक सकारात्मक संकेत है. उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है. आरबीआई का अनुमान 7 प्रतिशत के अंदर का था, जबकि जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत निकलकर आई है. उनके अनुसार, यह ओवरऑल इकोनॉमी के लिए एक बेहतरीन और सकारात्मक संकेत है और विकसित अर्थव्यवस्था बनने के भारत के लक्ष्य की दिशा में एक अच्छा संकेत माना जा सकता है.

बाइंग कैपेसिटी का असर: सिर्फ जीडीपी नहीं, नीतियां भी अहम
अभिषेक राज ने बताया कि जीडीपी ग्रोथ का मतलब लोगों की आय और उनकी खरीदने की क्षमता में बढ़ोतरी से भी जुड़ा होता है. जब लोगों की बाइंग कैपेसिटी बढ़ती है तो उसका असर रियल एस्टेट जैसे सेक्टर पर भी पड़ सकता है. कोई व्यक्ति अपना घर या दुकान खरीदना चाहता है तो यह एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट होता है, जिसमें लोग निवेश करना चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि केवल जीडीपी बढ़ने से यह मान लेना सही नहीं होगा कि रियल एस्टेट अपने आप बढ़ जाएगा. रियल एस्टेट की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी पॉलिसी, होम लोन और दूसरे कई फैक्टर्स से भी जुड़ी हुई है.

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की मजबूत स्थिति
उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल एक बैलेंस्ड इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बीते छह महीनों में जियो-पॉलिटिकल परिस्थितियों के कारण दुनिया के ज्यादातर देशों को अलग-अलग तरह के प्रभाव झेलने पड़े हैं और वहां के नागरिकों को भी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा. लेकिन उनके अनुसार भारत में लोगों की जिंदगी अपेक्षाकृत स्मूथ रही है. उन्होंने कहा कि सिर्फ अगली तिमाही की जीडीपी को लेकर बात करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे साल की आर्थिक स्थिति को देखना जरूरी है. उनका मानना है कि फिलहाल नीचे जाने का सवाल नहीं है और आने वाले समय में ग्रोथ और ऊपर जा सकती है, क्योंकि इससे जुड़े ज्यादातर फैक्टर्स सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कुछ उत्पादों पर महंगाई बढ़ना अस्थायी हो सकता है और इसके पीछे भी कई कारण होते हैं.

स्वदेशी और ‘मेक इन इंडिया’ से घरेलू निवेश को बढ़ावा
अभिषेक राज के मुताबिक, सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह स्वदेशी को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं, उसका एक अप्रत्यक्ष संदेश यह भी है कि जो लोग विदेशों में निवेश कर रहे हैं, वे अपने देश में भी निवेश की संभावनाओं को देखें. उनका मानना है कि वैश्विक परिस्थितियां अस्थायी रूप से बदलती रहती हैं, जबकि भारत में स्थायी रूप से निवेश और फायदा कमाने की बेहतर संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया का पूरा सिनेरियो भी इसी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

लक्जरी हाउसिंग: ₹50 हजार प्रति वर्गफुट तक जा सकते हैं रेट
रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर उन्होंने बताया कि बीते तीन साल, यानी 2022, 2023 और 2024 के दौरान कई बड़े प्लेयर्स ने बाजार में एंट्री की और लक्जरी प्रोजेक्ट लॉन्च किए. आने वाले समय में डिमांड और सप्लाई का गेम प्ले होगा, एक नया स्टैंडर्ड क्रिएट होगा और उसके बाद बाजार में और ज्यादा पोटेंशियल दिखाई देगा. उन्होंने बताया कि फिलहाल लक्जरी प्रोजेक्ट्स में करीब 20 से 35 हजार रुपये प्रति वर्गफुट तक का सेगमेंट देखने को मिल रहा है और आने वाले वर्षों में यह 50 हजार रुपये प्रति वर्गफुट तक पहुंच सकता है, ऐसा उनका अनुमान है.

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