Gandhari Movie Review: अंधेरे से जंग लड़ती एक मां का रौद्र रूप है 'गांधारी'

नई दिल्ली. जब एक मां के प्यार को चोट पहुंचती है, तो उसकी बेबसी दुनिया के सबसे डरावने गुस्से में बदल जाती है. नेटफ्लिक्स की नई एक्शन-थ्रिलर ‘गांधारी’ इसी जबरदस्त हिम्मत और बदले की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी है. महाभारत के पौराणिक संदर्भ से प्रेरित यह कहानी एक मां के बड़े संघर्ष को दिखाती है जो अपनी किडनैप हुई, मासूम बेटी को चाइल्ड ट्रैफिकिंग के अंधेरे अंडरवर्ल्ड से बचाने के लिए एक अंधेरी गली में जाती है. तापसी पन्नू की दमदार एक्टिंग और कनिका ढिल्लों की शार्प राइटिंग की वजह से यह फिल्म थ्रिल, एक्शन और इमोशंस का ऐसा तूफान है जो दर्शकों को आखिर तक बांधे रखता है.

कहानी
फिल्म की शुरुआत पश्चिम बंगाल के एक शांत और रहस्यमयी शहर जोयपुरा से होती है. जोयपुरा रेलवे स्टेशन पर बानी (तापसी पन्नू) और उनके पति (इश्वाक सिंह) अपनी छोटी बेटी मिष्टी के साथ एक सफर पर निकलते हैं. लेकिन, चीजें तब खतरनाक मोड़ ले लेती हैं जब एक अनजान, नकाबपोश औरत भीड़ का फायदा उठाकर उनकी बेटी को किडनैप कर लेती है. अपनी बेटी को बचाने के लिए दौड़ते हुए बानी का एक्सीडेंट हो जाता है और वह एक भारी लोहे की रॉड से टकरा जाती है, जिससे उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है. आंख जाने के बावजूद, बानी अपनी बेटी को ढूंढने की ठान लेती है. लोकल पुलिस का गैर-जिम्मेदार और सुस्त रवैया मामले को और उलझा देता है. हालांकि, जांच में एक तेज सेंट्रल ऑफिसर (जतिन सरना) की एंट्री होती है, जो यह पता लगाता है कि जोयपुरा सिर्फ एक शहर नहीं है, बल्कि ‘ऑपरेशन ब्लैक होल’ नाम के एक खतरनाक बच्चों की तस्करी और किडनैपिंग सिंडिकेट का अड्डा है. इस रैकेट का मास्टरमाइंड एक खतरनाक क्रिमिनल (प्रशांत नारायणन) है. कहानी तब मोड़ लेती है जब रैकेट जॉयपुरा में बड़े ‘चौमुखी माता’ मेले के दिन एक बड़े क्राइम का प्लान बनाता है. क्या आंखों पर पट्टी बंधी बानी इस खूनी दलदल से निकलकर अपनी बेटी को वापस ला पाएगी? यही सस्पेंस और ट्विस्ट पूरी कहानी को आगे बढ़ाता है.

एक्टिंग
‘गांधारी’ की असली जान तापसी पन्नू की परफॉर्मेंस है. तापसी ने अपने करियर में कई वुमन-सेंट्रिक फिल्मों में काम किया है, लेकिन बानी के रोल में उनकी परफॉर्मेंस एक नए लेवल पर पहुंच जाती है. एक लाचार मां की बेबस चीखों से लेकर जिसने अपनी आंखों की रोशनी खो दी है, उसकी बेटी के एक खतरनाक योद्धा में बदलने तक… जो अपने गुनाहगारों का खात्मा करती है, तापसी अपनी बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के एक्सप्रेशन से हर इमोशन को जिंदा कर देती हैं. एक्शन सीक्वेंस में उनकी फुर्ती और इमोशनल सीन के दौरान उनकी आंखों का दर्द सीधे दर्शकों से जुड़ता है. सपोर्टिंग कास्ट भी इस थ्रिलर को जबरदस्त ताकत देती है. जतिन सरना ने एक सीरियस और ईमानदार इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के तौर पर शानदार परफॉर्मेंस दी है. बानी के पति के रोल में इश्वाक सिंह ने कहानी के सस्पेंस में एक नया ट्विस्ट लाते हुए एक इमोशनल माहौल बनाया है. विलेन के रोल में प्रशांत नारायणन अपने आने पर एक डरावना एहसास और डर पैदा करते हैं. इसके अलावा मीता वशिष्ठ, छाया कदम, स्वास्तिका मुखर्जी और चंदन रॉय जैसे अनुभवी एक्टर अपने छोटे लेकिन असरदार रोल से जॉयपुरा के रहस्यमयी माहौल को जिंदा और तनावपूर्ण बनाए रखते हैं.

डायरेक्शन
डायरेक्टर देवाशीष मखीजा ने ‘गांधारी’ में कमर्शियल थ्रिलर और आर्ट-हाउस सिनेमा के बीच एक परफेक्ट बैलेंस दिखाया है, जो पहले ‘भोसले’ और ‘जोराम’ जैसी अपनी गहरी, रियलिस्टिक और इंटेंस फिल्मों के लिए जाने जाते थे. देवाशीष ने फिल्म को एक टिपिकल बॉलीवुड मसाला फिल्म की तरह नहीं दिखाया है. उन्होंने जॉयपुरा शहर की अंधेरी गलियों, सीलन भरी दीवारों और लोकल कल्चरल फेस्टिवल को बैकग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल किया है, जिससे शहर खुद एक नेगेटिव कैरेक्टर जैसा लगता है. डायरेक्टर की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि वह एक्शन और इमोशन के बीच की लय को कभी नहीं तोड़ते. जब अंधी फीमेल लीड अपने दुश्मनों का सामना करती है, तो डायरेक्टर एक्शन को रियलिस्टिक, क्लॉस्ट्रोफोबिक और रॉ रखते हैं, बजाय इसके कि इसे एक अनरियलिस्टिक ‘सुपरह्यूमन’ स्टंट की तरह इस्तेमाल करें. देवाशीष ने बहुत अच्छे से दिखाया है कि बानी माहौल को समझने के लिए अपने दूसरे सेंस का इस्तेमाल कैसे करती है.

सिनेमैटोग्राफी
‘गांधारी’ की सिनेमैटोग्राफी इस थ्रिलर को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का विजुअल फील देती है. कैमरावर्क न सिर्फ सीन को कैप्चर करता है बल्कि बानी के अंदर फैले मेंटल और फिजिकल अंधेरे को भी दिखाता है. जॉयपुरा स्टेशन के धुंधले सीन, तंग गलियों के शॉट्स और ऑपरेशन ब्लैक होल के सीक्रेट ठिकानों का लाइटिंग सेटअप शानदार है. ‘चौमुखी माता मेला’ सीन में कैमरे का इस्तेमाल खास तौर पर तारीफ के काबिल है. एक तरफ मेले की चमक-दमक, तेज म्यूजिक और रंगीन कपड़े हैं, तो दूसरी तरफ भीड़ के बीच अपनी बेटी को ढूंढती एक अंधी मां का अकेलापन और डर है. यह कंट्रास्ट एक जबरदस्त विजुअल इम्पैक्ट पैदा करता है. एक्टर्स के चेहरों पर डर और गुस्से को कैप्चर करने वाले क्लोज-अप शॉट्स सिनेमैटोग्राफर की टेक्निकल काबिलियत का सबूत हैं.

म्यूजिक
एक सस्पेंस-एक्शन थ्रिलर में म्यूजिक का काम सिर्फ गाने देना ही नहीं होता, बल्कि कहानी का टेंशन बढ़ाना भी होता है. ‘गांधारी’ का बैकग्राउंड स्कोर इस मामले में पूरी तरह सफल है. कहानी की रफ्तार के साथ दर्शकों की धड़कनें तेज रखने में फिल्म का म्यूजिक और साउंड डिजाइन अहम भूमिका निभाते हैं. जब बानी अपनी बेटी की तलाश में अंधेरी गलियों में भटकती है, तो धीमा, सस्पेंस वाला बैकग्राउंड म्यूजिक डर को और गहरा कर देता है. इस बीच एक्शन और क्लाइमैक्स सीन में ड्रम और लोक म्यूजिक का फ्यूजन इस्तेमाल किया गया है, जो सच में ‘चौमुखी माता’ की थीम और देवी के रौद्र रूप के आइडिया को सपोर्ट करता है. साउंड इफेक्ट्स का सही इस्तेमाल जैसे ट्रेन की सीटियां, मेटल के टकराने की आवाज और भारी सांसों की आवाज… फिल्म के माहौल को और बेहतर बनाता है, जिससे माहौल ज्यादा असली लगता है.

कमियां
अपनी कई खूबियों के बावजूद ‘गांधारी’ पूरी तरह से कमियों से खाली नहीं है. फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसके दूसरे हाफ की पेसिंग है. जहां पहले हाफ में सस्पेंस तेजी से बढ़ता है, वहीं दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी धीमी होने लगती है. किडनैपिंग रैकेट और ‘ऑपरेशन ब्लैक होल’ की मेन कहानी कुछ जगहों पर काफी प्रेडिक्टेबल हो जाती है. एक और कमी यह है कि कुछ एक्शन सीन में सिनेमैटिक लिबर्टी ली गई हैं. बिना आंखों वाली एक औरत का इतने सारे प्रोफेशनल हथियारबंद क्रिमिनल्स पर हावी होना कई बार थोड़ा अनरियलिस्टिक लगता है. इसके अलावा, क्लाइमैक्स में कुछ सीन थोड़े ज्यादा लंबे खींचे गए हैं और अगर एडिटिंग और क्रिस्प होती, तो फिल्म का थ्रिलिंग इम्पैक्ट और भी ज्यादा हो सकता था.

अंतिम फैसला
‘गांधारी’ सिर्फ एक आम बदला या किडनैपिंग थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह एक मां के अटूट प्यार, जीने की उसकी इच्छा और न्याय पाने के लिए किसी भी हद तक जाने की उसकी इच्छा की कहानी है. कनिका ढिल्लों की राइटिंग और देवाशीष मखीजा का डायरेक्शन तारीफ के काबिल है, जिस तरह से उन्होंने पौराणिक बातों को एक मॉडर्न क्राइम थ्रिलर की बारीकियों के साथ मिलाया है. अगर आपको डार्क, इंटेंस, रॉ एक्शन और मजबूत इमोशनल फिल्में पसंद हैं, तो नेटफ्लिक्स पर ‘गांधारी’ जरूर आपकी वीकेंड लिस्ट में होनी चाहिए. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *