UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के आने में अभी वक्त है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चुनावी तैयारियां अभी से अपने चरम पर पहुंच चुकी है. सीटों पर उम्मीदवार और जातिगत दांवपेच अभी से शुरु हो चुका है. तमाम राजनीतिक पार्टियां पिछले चुनावी नतीजों पर मंथन और अपने वोट बैंक से इतर प्रतिद्वंदी में सेंध लगाने की तैयारी कर रही है. इसी बीच हाई-प्रोफाइल सीट नोएडा को लेकर खबर आ रही है कि समाजवादी पार्टी (सपा) अपना चेहरा बदलने की तैयारी में है. राजनीतिक हलकों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि सपा इस बार नोएडा सीट पर बड़ा फेरबदल करते हुए एक नया और दमदार ब्राह्मण चेहरा उतारने की प्लानिंग कर रही है.
नोएडा सीट का राजनीतिक इतिहास देखें तो समाजवादी पार्टी ने पिछले लगातार तीन विधानसभा चुनावों यानी 2012, 2017 और 2022 में स्थानीय नेता सुनील चौधरी को ही अपना उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, तीनों ही चुनावों में भाजपा के मजबूत किले के सामने सपा को जीत हासिल नहीं हो सकी, लेकिन पार्टी हर बार दूसरे नंबर पर मजबूती से काबिज रही. अब अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं कि पार्टी नेतृत्व 2027 के रण में सुनील चौधरी की जगह किसी नए चेहरे को मौका देने पर विचार कर रहा है, ताकि बीजेपी के चक्रव्यूह को भेदा जा सके. इसी रणनीति के तहत एक प्रभावशाली ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारने की सुगबुगाहट है.
नोएडा का चुनावी इतिहास?
वर्ष 2012 में अस्तित्व में आई नोएडा विधानसभा सीट पर शुरुआत से ही भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा है.
2012 चुनाव: भाजपा के डॉ. महेश शर्मा ने 36.87 प्रतिशत वोट पाकर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा के सुनील चौधरी 20.06 प्रतिशत वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे.
2014 उपचुनाव: भाजपा की विमला बाथम ने 60.97 प्रतिशत वोट हासिल कर बड़ी जीत हासिल की, जहां सपा की काजल शर्मा दूसरे नंबर पर रहीं.
2017 चुनाव: भाजपा ने पंकज सिंह को मैदान में उतारा और उन्होंने 63.84 प्रतिशत वोट पाकर प्रचंड जीत दर्ज की. सपा के सुनील चौधरी 22.96 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे.
2022 चुनाव: भाजपा के मौजूदा विधायक पंकज सिंह ने अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए 70.16 प्रतिशत वोट हासिल किए और 1.81 लाख से अधिक रिकॉर्ड वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इस बार भी सपा के सुनील चौधरी दूसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 18.04 प्रतिशत वोट मिले.
सपा-कांग्रेस गठबंधन और वोट शेयर का गणित
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले तमाम चुनावों में सपा का वोट शेयर लगातार 18 से 25 प्रतिशत के बीच स्थिर बना हुआ है, जबकि कांग्रेस पार्टी का जनाधार इस सीट पर लगातार कमजोर हुआ है. 2012 में 12.15 प्रतिशत वोट पाने वाली कांग्रेस 2022 आते-आते 4 प्रतिशत से भी नीचे सिमट गई. ऐसे में यदि आगामी 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है, तो नोएडा सीट पर सपा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है.
भाजपा के गढ़ में कड़ी टक्कर देने की चुनौती
दूसरी ओर, भाजपा के लिए नोएडा सीट सबसे सुरक्षित गढ़ों में से एक है. मौजूदा विधायक पंकज सिंह के पास भारी-भरकम जनाधार, संगठन की ताकत और विकास कार्यों का मजबूत आधार है. ऐसे में सपा के नए ब्राह्मण चेहरे के सामने भाजपा के इस अजेय किले को ढहाना आसान नहीं होगा. हालांकि, शहरी मतदाताओं, बुनियादी सुविधाओं, ट्रैफिक और स्थानीय मुद्दों को आधार बनाकर विपक्ष इस बार चक्रव्यूह रचने की फिराक में है. देखना यह होगा कि 2027 के रण में सपा का यह नया दांव कितना असरदार साबित होता है.
