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दिल्ली के शांति निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे की कुछ तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो काफी परेशान करने वाली हैं. घर पूरी तरह जमींदोज हो गया और उसके नीचे से लोग निकाले जा रहे हैं;
दिल्ली में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं. हादसे की सामने आई पहली तस्वीरें बताती हैं कि इमारत का बड़ा हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया है.
हादसा दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ. इमारत के गिरने के बाद सड़क और आसपास का हिस्सा मलबे से भर गया. तस्वीरों में टूटे हुए कंक्रीट के स्लैब, ईंटें, लोहे की सरिया और निर्माण का सामान बिखरा नजर आ रहा है. मलबे के बीच बिजली और दूसरी तारें भी लटकती दिखाई दे रही हैं, जिससे मौके की स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
हादसे की तस्वीरों में आसपास की इमारतें भी काफी नजदीक दिखाई दे रही हैं. जिस जगह इमारत गिरी, वहां सड़क संकरी है और आसपास बड़ी संख्या में दुकानें और मकान हैं. ऐसे में बचाव दल के लिए भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाना और मलबा हटाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. हादसे के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर जमा हो गए.
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शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत गिरने की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की गाड़ियां और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं. बचावकर्मी मलबे को सावधानी से हटाकर अंदर किसी व्यक्ति के फंसे होने की तलाश कर रहे हैं. ऐसे मामलों में मलबे को तेजी से हटाने के बजाय काफी सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि उसके नीचे कोई व्यक्ति जीवित हो सकता है और अचानक मलबा हटाने से खतरा बढ़ सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कितने लोग मौजूद थे. कुछ शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में हॉस्टल संचालित होने की बात भी सामने आई है, लेकिन इस बारे में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. प्रशासन की ओर से जैसे-जैसे जानकारी सामने आएगी, मलबे में फंसे या लापता लोगों की संख्या की तस्वीर साफ हो सकेगी.
इमारत आखिर किस वजह से गिरी, इसका जवाब भी अभी सामने नहीं आया है. दिल्ली-एनसीआर में बारिश का दौर चल रहा है, लेकिन सिर्फ बारिश को हादसे की वजह मानना जल्दबाजी होगी. इमारत की उम्र, उसकी नींव, निर्माण की गुणवत्ता, किसी तरह के अवैध निर्माण या आसपास चल रही गतिविधियों समेत कई पहलुओं की जांच की जा सकती है. जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी.
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है. घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है. हादसे की पहली तस्वीरों ने एक बार फिर दिल्ली में पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि इस मामले में जिम्मेदारी और लापरवाही को लेकर कोई निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए.
