400 गज का मकान, 5000 से ज्यादा पौधे…गाजियाबाद के डॉक्टर ने घर को बना दिया मिनी जंगल, मरीजों को दवा के साथ पौधे देते हैं गिफ्ट

गाजियाबाद: आमतौर पर घर में कुछ पौधे सजावट के लिए लगाए जाते हैं, लेकिन गाजियाबाद के कवि नगर में एक घर ऐसा भी है, जहां पौधों की संख्या गिनते-गिनते शायद आप थक जाएं. 400 गज के इस मकान में 5000 से ज्यादा पौधे हैं. घर का लगभग हर कोना हरियाली से भरा हुआ है. कहीं रंग-बिरंगे फूल हैं, कहीं औषधीय पौधे तो कहीं घर में इस्तेमाल होने वाली सब्जियां उग रही हैं. इस पूरे पौधों के संसार को पिछले 46 साल से डॉक्टर अखिलेश गोमत संभाल रहे हैं.

डॉ. अखिलेश ने वर्ष 1980 में गाजियाबाद में अपना मकान बनाया था. उसी समय उन्होंने घर में कुछ पौधे लगाए थे. धीरे-धीरे पौधों के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया और कुछ पौधों से शुरू हुआ यह सिलसिला आज 5000 से ज्यादा पौधों तक पहुंच चुका है. खास बात यह है कि डॉक्टर का काम काफी व्यस्त होने के बावजूद उनकी सुबह की शुरुआत अपने पौधों को देखने और उनकी जरूरत के हिसाब से देखभाल करने से होती है.

धूप से लेकर पानी तक, पौधों के लिए खास इंतजाम

डॉ. अखिलेश ने पौधों को स्वस्थ रखने के लिए घर में अलग-अलग इंतजाम किए हैं. जिन पौधों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती, उनके लिए खास लाइटों की व्यवस्था की गई है. पौधों को नियमित पानी देने के लिए टैंक लगाए गए हैं. उनके घर में इनडोर और आउटडोर दोनों तरह के पौधे हैं. फूलों के अलावा औषधीय पौधे और कई तरह की सब्जियां भी उगाई जाती हैं. डॉ. अखिलेश पौधों की जरूरत और उनकी देखभाल के तरीकों पर भी बारीकी से ध्यान देते हैं. किस पौधे को कितनी धूप चाहिए, पानी कितना देना है और खाद या उर्वरक का किस तरह इस्तेमाल करना है, वह इन चीजों पर खुद नजर रखते हैं.

बचपन से ही था पेड़-पौधों से लगाव

डॉ. अखिलेश बताते हैं कि पेड़-पौधों से उनका लगाव बचपन से रहा है. बचपन में वह खेतों और बागों में काफी समय बिताते थे. इसी दौरान पौधों में उनकी रुचि बढ़ी और धीरे-धीरे यह उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. उन्होंने वर्ष 1967 में सरकारी डॉक्टर के रूप में नौकरी शुरू की. इस दौरान केजीएमसी, मुरादाबाद और गाजियाबाद में सेवाएं दीं. बाद में सरकारी नौकरी के बाद उन्होंने गाजियाबाद में अपना घर बनाया और यहीं से पौधों को बड़े स्तर पर लगाने और संवारने का सिलसिला शुरू हुआ.

व्यस्त दिन के बीच पौधों के लिए जरूर निकालते हैं समय

डॉक्टर होने के कारण उनका दिन काफी व्यस्त रहता है, लेकिन पौधों की देखभाल के लिए वह समय जरूर निकालते हैं. उनका कहना है कि सुबह उठने के बाद सबसे पहले वह अपने पौधों को देखते हैं. इसके बाद जिस पौधे को जिस चीज की जरूरत होती है, उसके हिसाब से उसकी देखभाल करते हैं. डॉ. अखिलेश के मुताबिक, पौधों के बीच समय बिताने से तनाव कम होता है और मन को सुकून मिलता है. उनका मानना है कि किसी भी शौक के लिए सबसे जरूरी है कि उसे मन लगाकर किया जाए. इसी लगाव की वजह से इतने सालों बाद भी पौधों की देखभाल उनके रोज के जीवन का हिस्सा बनी हुई है.

मरीजों और रिश्तेदारों को भी देते हैं पौधे

पौधों के प्रति उनका लगाव सिर्फ अपने घर तक सीमित नहीं है. क्लीनिक पर आने वाले मरीजों और घर आने वाले रिश्तेदारों को भी वह अक्सर गिफ्ट के तौर पर पौधे देते हैं. उनका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पौधों से जुड़ें और अपने आसपास हरियाली बढ़ाएं. डॉ. अखिलेश का मानना है कि पौधे घर के वातावरण को बेहतर बनाने के साथ प्रदूषण से राहत देने में भी मदद करते हैं. एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच वह लोगों से घरों में पौधे लगाने की अपील करते हैं. उन्होंने अपने घर के सामने भी बड़े पेड़ लगाए हैं, ताकि राहगीरों को छांव मिल सके और आसपास की हरियाली बनी रहे.

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