Last Updated:
Scrub Typhus Prevention : कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे दिखाई देते हैं. लोकल 18 से गाजियाबाद के डॉ. भावजीत बताते हैं कि संक्रमण बढ़ने पर मरीज को अत्यधिक नींद या सुस्ती, सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है. गंभीर मामलों में कई अंगों के एक साथ काम करना प्रभावित हो सकता है. डॉ. भावजीत के मुताबिक, यह रोग संक्रमित माइट्स के काटने से इंसानों में फैलता है. ये माइट्स झाड़ियों, घास और लकड़ी या प्राकृतिक वनस्पति वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं.
गाजियाबाद. बारिश और बदलते मौसम के बीच घास, झाड़ियों और सुनसान हरियाली वाले इलाकों में घूमना सेहत के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. यहां मौजूद बेहद छोटे संक्रमित माइट्स के काटने से स्क्रब टायफस नाम का बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे दिखाई देते हैं इसलिए कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है. लोकल 18 से यशोदा हॉस्पिटल संजय नगर गाजियाबाद के एमडी मेडिसिन डॉ. भावजीत बताते हैं कि स्क्रब टायफस ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नाम के बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है. यह संक्रमित माइट्स के काटने से इंसानों में फैलता है. ये माइट्स मुख्य रूप से झाड़ियों, घास और लकड़ी या प्राकृतिक वनस्पति वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं. ऐसे स्थानों पर जाने वाले लोगों में इनके काटने से संक्रमण का खतरा रहता है.
किडनी तक असर
स्क्रब टायफस होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इसकी एक खास पहचान काटने वाली जगह पर बनने वाला काला घाव या निशान है जिसे एस्कर कहा जाता है. हालांकि हर मरीज में यह निशान दिखाई दे यह जरूरी नहीं है. यही वजह है कि लगातार बुखार और दूसरे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्क्रब टायफस गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. संक्रमण बढ़ने पर मरीज को अत्यधिक नींद या सुस्ती, सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है. इसके अलावा लिवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है और गंभीर मामलों में कई अंगों के एक साथ काम करना प्रभावित हो सकता है.
खुद से न लें दवा
डॉ. भावजीत बताते हैं कि बचाव के लिए झाड़ियों और घास वाले इलाकों में जाते समय शरीर को पूरी तरह ढककर रखना जरूरी है. पूरी आस्तीन के कपड़े, लंबी पैंट और जूते पहनें जरूरत पड़ने पर कीटरोधी क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें. घर, पार्क और आसपास के क्षेत्रों में अनावश्यक झाड़ियों और घास की सफाई भी कराते रहें. बुखार या दूसरे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच कराएं. पौष्टिक भोजन लेते रहें ताकि शरीर को पर्याप्त पोषण मिले और रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहे.
About the Author
प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
और पढ़ें
