जब जिंदगी में आया गैंगस्‍टर, क्राइम से हो गई मोहब्‍बत, मैडम जहर बन गईं दिल्‍ली की लेडी डॉन

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दिल्‍ली के चौहान बांगर इलाके में ब्‍यूटी पार्लर चलाने वाली खुशनुमा अंसारी को क्राइम वर्ल्‍ड में ‘मैडम जहर’ के नाम से पहचाना जाता है. गैंगस्‍टर लॉरेंस बिश्नोई के शॉर्प शूटर्स महफूज अली उर्फ ‘बॉबी कबूतर’ के इश्‍क में पड़ने के बाद मैडम जगह अपराध के दलदल में घुसती चली गई. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग, नादिर शाह हत्याकांड और जाफराबाद डबल मर्डर केस में अहम भूमिका निभाने वाली इस मैडम जहर की क्‍या है पूरी कहानी, जानने के लिए पढ़े पूरी कहानी.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ी खुशनुमा अंसारी उर्फ ‘मैडम जहर’ चौहान बांगर में ब्यूटी पार्लर की आड़ से लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गिरोह के ड्रग्स व हथियारों का नेटवर्क चला रही थी.

Gangs Of Delhi- Part-7: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चौहान बांगर इलाके में ब्‍यूटी पार्लर चलाने वाली खुशनुमा अंसारी उर्फ नेहा की पहचान बेहद साधारण, सलीके से बात करने वाली और अपने काम में माहिर मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर थी. किसी दुल्हन का प्री-वेडिंग ग्रूमिंग सेशन हो, पार्टी मेकअप हो या रोजमर्रा की हेयर स्टाइलिंग हो, खुशनुमा हमेशा मुस्कुराते हुए अपने काम में जुटी दिखती थी. मोहल्ले की महिलाओं के बीच उसकी पहचान एक मेहनती और आत्मनिर्भर लड़की की थी, जो दिन-रात मेहनत करके अपने पैरों पर खड़ी थी.

किसी को दूर-दूर तक इस बात का अंदेशा नहीं था कि जिस लड़की के हाथों में लिपस्टिक, लाइनर और मेकअप ब्लेंडर हैं, पर्दे के पीछे वही हाथ खूंखार गैंगस्टरों के लिए ऑटोमैटिक बंदूकों, कारतूसों और हेरोइन के पैकेट्स का हिसाब-किताब संभाल रहे थे. दरअसल, सामान्य सी दिखने वाली इस जिंदगी में तूफान तब आया, जब करीब सात साल पहले खुशनुमा की जिंदगी में महफूज अली उर्फ ‘बॉबी कबूतर’ की एंट्री हुई. बॉबी कबूतर कोई मामूली युवक नहीं था. दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के अंडरवर्ल्ड में उसका नाम खौफ का दूसरा पर्याय था.

वह लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा सिंडिकेट का सबसे भरोसेमंद शार्प शूटर और मुख्य हथियार सप्लायर था. पिछले लगभग एक दशक से दिल्ली पुलिस, पंजाब पुलिस और स्पेशल सेल की मोस्ट वांटेड लिस्ट में उसका नाम टॉप पर चल रहा था. कई मर्डर, एक्सटॉर्शन और आर्म्स स्मगलिंग के केस उसके नाम पर दर्ज थे और वह लगातार खाकी से बचता हुआ फरारी काट रहा था. बॉबी की दबंग लाइफस्टाइल, अंडरवर्ल्ड में उसका रसूख, जेब में हमेशा भरा रहने वाला कैश और कानून को ठेंगे पर रखकर जीने का बेपरवाह अंदाज इन सबने खुशनुमा को अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया था.

देखते ही देखते दो-दो गैंगस्‍टर की रीढ़ बन गई मैडम जहर

  1. शुरुआती मुलाकातों का यह आकर्षण देखते ही देखते गहरे प्यार में बदल गया. दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए और जल्द ही लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे. इस रिश्ते में आने के बाद खुशनुमा के लिए यह बात कोई मायने नहीं रखती थी कि उसका हमसफर कानून की नजरों में एक इनामी मुजरिम है, जिसके सिर पर पुलिस कभी भी गोली चला सकती है.
  2. उसने बॉबी की खूनी और खतरनाक दुनिया को न केवल पूरी तरह कबूल कर लिया, बल्कि खुद भी उस अंधेरी राह पर कदम बढ़ाने का फैसला कर लिया. शुरुआत में खुशनुमा सीधे किसी वारदात को अंजाम देने के लिए सड़कों पर नहीं उतरी थी. उसका शुरुआती रोल था बॉबी कबूतर की मजबूत ढाल बनना था. जब दिल्ली पुलिस की बॉबी की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही थीं, तब बॉबी को पुलिस के गिरफ्त से बचाए रखने का पूरा लॉजिस्टिक्स खुशनुमा ही ग्राउंड लेवल पर संभाल रही थी.
  3. बॉबी कभी भी एक ठिकाने पर ज्यादा दिन नहीं टिकता था. ऐसे में नए सेफ हाउस की तलाश करना, फर्जी पहचान पत्रों और जाली दस्तावेजों के जरिए सुरक्षित मकान किराए पर लेना, उन फ्लैट्स का किराया चुकाना और राशन-पानी की व्यवस्था करना, यह सब खुशनुमा का रोज का काम बन चुका था. इसके अलावा, वह सिंडिकेट के कम्युनिकेशन सिस्टम की मास्टर बन चुकी थी.
  4. बॉबी कबूतर को सीधे अपने मोबाइल या साधारण नेटवर्क से बात करने की सख्त मनाही थी. खुशनुमा ही एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, विदेशी वर्चुअल नंबर्स और इंटरनेट कॉल्स के जरिए लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गिरोह के खास गुर्गों से बॉबी की बातचीत करवाती थी. पुलिस की मूवमेंट, इलाके में गश्त और खुफिया खबरों पर भी उसकी पैनी नजर रहती थी.
  5. चौहान बांगर में उसका ब्यूटी पार्लर इस दोहरी जिंदगी के लिए सबसे मुफीद आड़ साबित हो रहा था. दिन में जहां आम महिलाएं ग्रूमिंग के लिए आती थीं, वहीं शाम ढलते ही उसी पार्लर के भीतर से दोनों गिरोह के सेफ ऑपरेशंस, पैसों के लेन-देन और सुरक्षित ठिकानों के कोडवर्ड्स तय किए जाते थे. देखते ही देखते मैडम जहर लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गिरोह के लिए रीढ़ की हड्डी बन चुकी थी.

जोया खान से मुलाकात के बाद बन गई ‘मैडम जहर’

  1. जब सिंडिकेट में एक बड़ा भूचाल आया. हाशिम बाबा की पत्‍नी जोया खान को दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के दौरान, जोया के कब्‍जे से करीब एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम हेरोइन बरामद हुई थी. जोया खान की गिरफ्तारी के बाद खुशनुमा का कद तब अचानक बहुत बड़ा हो गया.
  2. जोया खान के तिहाड़ जेल जाने के बाद लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा सिंडिकेट की ड्रग्स सप्लाई चेन पूरी तरह लड़खड़ा गई. गिरोह का जो सबसे बड़ा आर्थिक स्रोत था, उस पर अचानक ताला लग गया. गिरोह के बड़े सरगनाओं को किसी ऐसे भरोसेमंद चेहरे की सख्त तलाश थी, जिस पर पुलिस का कोई पुराना रिकॉर्ड न हो और जो पूरे नेटवर्क को बिना शक के बेहतर तरीके से चला सके.
  3. यहीं से खुशनुमा अंसारी ने पर्दे के पीछे से निकलकर सीधे फ्रंट फुट पर कदम रखा. उसने जोया खान की खाली हुई पूरी जगह को अपने कंट्रोल में ले लिया. ड्रग्स सिंडिकेट की कमान अब पूरी तरह खुशनुमा के हाथों में थी. दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के इलाकों में हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की खेप कहां से आएगी, उसे किन पैडलर्स के जरिए रिटेल मार्केट में खपाया जाएगा और उससे आने वाले लाखों-करोड़ों रुपयों का कलेक्शन कैसे होगा, इस सब का फैसला खुशनुमा करने लगी थी.
  4. इसके साथ ही, उसने व्यापारियों और टारगेटेड लोगों से होने वाली अवैध वसूली के पैसों का हिसाब-किताब भी अपने हाथ में ले लिया. उसकी शातिर प्लानिंग, और किसी भी खतरे के सामने बेखौफ खड़े रहने के तेवर को देखकर सिंडिकेट के गुर्गों ने उसे एक नया नाम ‘मैडम जहर’ दिया था.

‘मैडम जहर’ की सह पर बॉबी कबूतर के सनसनीखेज कारनामे

पीछे से जब खुशनुमा ने पूरे लॉजिस्टिक्स, ड्रग्स मनी और सेफ हाउस मैनेजमेंट की मजबूत कमान संभाल रखी थी, तब आगे से महफूज अली उर्फ बॉबी कबूतर बेखौफ होकर एक के बाद एक बड़ी और खूनी वारदातों को अंजाम दे रहा था.

  1. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड (मई 2022): पंजाब के मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की मानसा में दिनदहाड़े की गई हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड से पहले मूसेवाला की गतिविधियों, उनके घर से निकलने के समय और आने-जाने वाले रास्तों की सटीक रेकी करने में बॉबी कबूतर ने बड़ी भूमिका निभाई थी. उसने हमलावरों तक मूसेवाला के मूवमेंट और रूट की सटीक रियल-टाइम जानकारी पहुंचाई थी.
  2. दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग: बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के बरेली स्थित आवास पर दहशत फैलाने और वसूली का दबाव बनाने के लिए अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. इस सनसनीखेज वारदात में जिन सोफिस्टिकेटेड विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हुआ था, उनकी पूरी व्यवस्था और डिलीवरी बॉबी कबूतर ने मैडम जहर के जरिए करवाई थी.
  3. नादिर शाह हत्याकांड: राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में एक जिम के बाहर जिम संचालक नादिर शाह की ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर सरेआम हत्या कर दी गई थी. इस पूरे ऑपरेशन में शूटरों को राजधानी में एंट्री दिलाने, उन्हें छिपाने और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का जिम्मा बॉबी कबूतर के सिर था.
  4. जाफराबाद डबल मर्डर (दिसंबर 2025): दिल्ली के जाफराबाद इलाके में दो सगे भाइयों की सरेआम 48 राउंड गोलियां चलाकर हत्या कर दी गई थी. इस सामूहिक नरसंहार में मुख्य हमलावरों में बॉबी कबूतर खुद शामिल था और उसने बेहद करीब से गोलियां दागी थीं.

आईएसआई और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करों से मिला कनेक्‍शन
जांच एजेंसियों के कान तब और खड़े हो गए जब बॉबी कबूतर और इस पूरे सिंडिकेट का कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय आर्म्स स्मगलिंग नेटवर्क से जुड़ा पाया गया. पुलिस सूत्रों के के अनुसार, बॉबी कबूतर का सीधा संपर्क कुख्यात हथियार तस्कर सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ से था. सलीम पिस्टल पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर भारत में आधुनिक हथियारों की खेप पहुंचाता था. वह सीमा पार से अत्याधुनिक ऑटोमैटिक पिस्तौलें और असाल्ट वेपन्स भारत में सप्लाई करता था. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने सलीम पिस्टल को भारत-नेपाल सीमा से दबोच लिया था, लेकिन उससे पहले हथियारों की जो खेप बॉबी कबूतर तक पहुंची थी, उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल सिद्धू मूसेवाला मर्डर और दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग जैसी बड़ी वारदातों में किया गया था. इन हथियारों को विभिन्न शहरों में सुरक्षित छिपाकर रखने और जरूरत पड़ने पर शूटरों तक पहुंचाने में खुशनुमा की भूमिका अहम पाई गई थी.

महिपालपुर फ्लाईओवर पर उतरा ब्‍यूटीशियन वाला नकाब
लंबे समय तक जुर्म के इस साम्राज्य को परदे के पीछे से चलाने के बाद खुशनुमा अंसारी को यह मुगालता हो गया था कि उसका ब्यूटीशियन वाला नकाब कभी नहीं उतरेगा. लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट लगातार इस सिंडिकेट के डिजिटल फुटप्रिंट्स, डार्क वेब कॉल्स और मुखबिरों के नेटवर्क को डिकोड कर रही थी. फरवरी 2026 के मध्य में सुरक्षा एजेंसियों को एक पुख्ता इनपुट मिला. स्पेशल सेल ने सबसे पहले घेराबंदी करते हुए दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर के पास से मोस्ट वांटेड बॉबी कबूतर को दबोच लिया. बॉबी की गिरफ्तारी की भनक जैसे ही सिंडिकेट के निचले स्तर पर लगी, खुशनुमा ने तुरंत मोर्चा संभाला और बची हुई खेप व हथियारों को किसी सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट करने की तैयारी में जुट गई. लेकिन वह अपने मंसूबों में सफल होती, इससे पहले स्‍पेशल सेल ने मैडम जहर को उसके दो गुर्गों के साथ अरेस्‍ट कर लिया.

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अनूप कुमार मिश्रAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…

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