दिल्ली के खूंखार और हाई रिस्क गैंगस्टरों में से एक नीरज बवानिया को कल दिल्ली पुलिस उसके घर लेकर पहुंची. नीरज को उसकी बीमार पत्नी और अस्पताल में भर्ती नवजात बच्चों से मिलने के लिए पैरोल दी गई थी. कोर्ट ने उसे 6 घंटे के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच पैरोल पर छोड़ा था, हालांकि इसी दौरान अस्पताल के वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही अपनी नवजात बच्ची को देखकर उसे इंसानियत याद आ गई. उसने कहा कि उसका एक बच्चा मर गया, जबकि एक वेंटिलेटर पर है और तीसरा बच्चा CPAP सपोर्ट पर है. फिर भी उसे जमानत नहीं दी जा रही है.
बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में गैंगवार के लिए बदनाम नीरज बवानिया पिछले कई सालों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. नीरज ने पत्नी की तबीयत अचानक खराब होने और प्रीमैच्योर 3 बच्चों को जन्म देने के चलते उनकी देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी, लेकिन हाई रिस्क गैंगस्टर को देखते हुए कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया. हालांकि उसको पुलिस सुरक्षा के बीच 6 घंटे की पैरोल दी गई.
इसके बाद गुरुवार को उसे भारी पुलिस सुरक्षा में अपने परिवार से मिलवाने के लिए ले जाया गया.पहले वह हरिनगर अपने घर गया, जहां उसने अपनी पत्नी से मुलाकात की. फिर उसे मोतीनगर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी बेटी वेंटिलेटर पर है. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए नीरज बवाना ने इंसानियत की दुहाई देते हुए बताया कि उसका एक बच्चा मर चुका है और दूसरा वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है, इसके बावजूद कोर्ट ने उसे राहत नहीं दी. जिस मामले में वह सजा काट रहा है उसमें 11 साल से ज्यादा का समय हो चुका है.
नीरज ने कहा, ‘कानून बिल्कुल भी साथ नहीं दे रहा है, बिल्कुल भी इंसानियत नहीं रह गई है, ना मेरे केस को आगे बढ़ाया जा रहा है, ना ही बच्चों को देखते हुए किसी तरह की राहत दी जा रही है.’ बवाना ने कहा, ’14 साल उम्रकैद की सजा होती है, लेकिन मैंने 11 साल बिना किसी सजा के काट लिए.’
हाई कोर्ट और सेशल कोर्ट ने क्यों नहीं दी जमानत
नीरज ने अपनी पत्नी और बच्चों की देखभाल के लिए हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका लगाई थी.लेकिन सुरक्षा कारणों, गैंगवार की आशंका और उसके हाई-रिस्क कैदी होने के कारण अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी. इससे पहले सेशन कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया था.
वकीलों ने अदालत को बताया कि नीरज की पत्नी ने 27वें हफ्ते में ही 3 बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से एक ही जन्म के दौरान ही मृत्यु हो गई, जबकि बचे दोनों बच्चे मोती नगर के एक निजी अस्पताल के NICU में भर्ती हैं.
