साउथ दिल्ली से गुरुग्राम अब मजे में जाएंगे, छतरपुर के ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति, ₹700 करोड़ का फ्लाईओवर वाला प्लान

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दिल्ली से गुरुग्राम अब मजे में जाएंगे, पढ़ें ₹700 करोड़ का फ्लाईओवर वाला प्लान

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South Delhi to Gurugram Flyover: दिल्ली सरकार ने दक्षिण दिल्ली और गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 700 करोड़ रुपए की लागत वाली 4 किलोमीटर लंबी सिग्नल-फ्री फ्लाईओवर परियोजना को मंजूरी दे दी है. यह कॉरिडोर अनुव्रत मार्ग जंक्शन से DLF फार्म्स, छतरपुर तक बनाया जाएगा. वर्तमान में इस दूरी को तय करने में 35 मिनट तक का समय लगता है, लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा समय घटकर लगभग 5 मिनट रह सकता है. इससे लाडो सराय, साकेत, महरौली, छतरपुर, सैनिक फार्म, वसंत कुंज और गुरुग्राम की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. सरकार के अनुसार DPR तैयार है और जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी. निर्माण कार्य पूरा होने में लगभग दो साल लग सकते हैं. इस परियोजना से ट्रैफिक जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी और दक्षिण दिल्ली की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. (सभी फोटो AI)

साउथ दिल्ली और गुरुग्राम के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. दिल्ली सरकार ने छतरपुर इलाके में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मंजूर कर दिया है. पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) की ओर से SSN मार्ग पर करीब 4 किलोमीटर लंबा सिग्नल-फ्री फ्लाईओवर कॉरिडोर बनाया जाएगा. इस परियोजना का मकसद दक्षिण दिल्ली से गुरुग्राम की ओर जाने वाले यात्रियों को तेज और सुगम कनेक्टिविटी देना है. फिलहाल इस रूट पर लाल बत्ती, भारी ट्रैफिक और अतिक्रमण के कारण लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन नया फ्लाईओवर बनने के बाद सफर काफी आसान होने की उम्मीद है.

दिल्ली सरकार के अनुसार यह नया कॉरिडोर अनुव्रत मार्ग जंक्शन से लेकर छतरपुर स्थित DLF फार्म्स तक बनाया जाएगा. वर्तमान में इस 4 किलोमीटर की दूरी को तय करने में पीक ऑवर्स के दौरान 30 से 35 मिनट तक का समय लग जाता है. कई बार वाहनों की औसत रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटा से भी नीचे चली जाती है. अधिकारियों का दावा है कि फ्लाईओवर बनने के बाद यही दूरी महज 5 मिनट में पूरी की जा सकेगी और औसत स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इससे रोजाना हजारों यात्रियों का समय और ईंधन दोनों बचेंगे.

यह परियोजना करीब 700 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की जाएगी. PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इस रूट पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है. खासकर शादी के सीजन में छतरपुर और आसपास के फार्महाउसों में होने वाले कार्यक्रमों के कारण जाम की स्थिति और खराब हो जाती है. अनुव्रत मार्ग के सिग्नल पर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे पूरे इलाके का यातायात प्रभावित होता है. फ्लाईओवर के जरिए इस समस्या को काफी हद तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. विभाग का मानना है कि ग्रेड-सेपरेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से ट्रैफिक का दबाव सड़क और फ्लाईओवर के बीच बंट जाएगा.

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अधिकारियों के मुताबिक परियोजना का फिजिबिलिटी अध्ययन पूरा हो चुका है और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) भी तैयार कर ली गई है. अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी. टेंडर जारी होने और ठेका आवंटित होने के बाद निर्माण कार्य जमीन पर शुरू होगा. सरकार का अनुमान है कि पूरे प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब दो साल का समय लगेगा. इस दौरान आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और बेहतर सड़क डिजाइन का भी इस्तेमाल किया जाएगा ताकि भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को भी संभाला जा सके.

इस फ्लाईओवर का फायदा सिर्फ छतरपुर या गुरुग्राम जाने वालों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि दक्षिण दिल्ली के कई बड़े इलाकों को भी राहत मिलेगी. लाडो सराय, साकेत, महरौली, धन मिल, सैनिक फार्म, सतबरी, जोनापुर, डेरा मंडी और असोला जैसे क्षेत्रों के लोगों के लिए आवागमन आसान होगा. इसके अलावा वसंत कुंज, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एमजी रोड और गुरुग्राम की ओर जाने वाले यात्रियों को भी ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. यह परियोजना पूरे दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी.

SSN मार्ग दक्षिण दिल्ली का एक महत्वपूर्ण यातायात कॉरिडोर माना जाता है. इसका उत्तरी हिस्सा कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन के पास अनुव्रत मार्ग से जुड़ता है, जहां से महरौली, लाडो सराय और साकेत की ओर से आने वाला ट्रैफिक गुजरता है. वहीं इसका मध्य भाग छतरपुर क्षेत्र से होकर निकलता है, जहां पिछले कुछ सालों में तेजी से शहरी विकास हुआ है. कई आंतरिक सड़कें सीधे इस मार्ग से जुड़ती हैं, इसके कारण दिनभर भारी यातायात बना रहता है. यही वजह है कि यह जंक्शन दक्षिण दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रैफिक पॉइंट्स में गिना जाता है.

सरकार का मानना है कि यह फ्लाईओवर केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि दक्षिण दिल्ली और गुरुग्राम के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. रोजाना लाखों लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए इस रूट का इस्तेमाल करते हैं. बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रा समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है. यदि तय समय पर निर्माण पूरा हो जाता है तो आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर दिल्ली-एनसीआर के सबसे अहम ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकता है.

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