कार बनाएंगी बेटियां, मारुति सुजुकी 30% महिलाओं को देगी 'सीखो और कमाओ' का मौका

अगर आपको लगता है कि कारों की मैन्युफैक्चरिंग और भारी मशीनों वाले काम सिर्फ लड़कों के लिए हैं, तो मारुति सुजुकी इस सोच को पूरी तरह से बदलने जा रही है. कंपनी ने महिलाओं को ऑटोमोटिव सेक्टर में आगे लाने के लिए एक शानदार पहल की है, जहां उन्हें सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं मिलेगी, बल्कि जेब खर्च भी दिया जाएगा.

हरियाणा के मानेसर में स्थित जापान-भारत मैन्युफैक्चरिंग इंस्टिट्यूट (JIM) में मारुति सुजुकी ने छात्राओं की संख्या बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है. फिलहाल यहां महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 5% है, जिसे अगले कुछ सालों में यानी एकेडमिक ईयर 2028-29 तक बढ़ाकर 30% करने का टारगेट सेट किया गया है.

लड़कियों के लिए क्या हैं खास ऑफर्स?

ऑटोमोटिव सेक्टर से जुड़े 9 अलग-अलग ट्रेड्स में लड़कियों की एंट्री को आसान और आकर्षक बनाने के लिए कंपनी ने कई बड़े ऐलान किए हैं.

  • पूरी पढ़ाई फ्री: चुनी गई योग्य महिला छात्राओं की 100% ट्यूशन फीस माफ रहेगी.
  • हर महीने स्टाइपेंड: ट्रेनिंग के दौरान लड़कियों को 3,000 प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाएगा. खास बात ये है कि यह ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के दौरान भी चालू रहेगा.
  • रहने की टेंशन खत्म: महिला ट्रेनीज के लिए एक खास और सुरक्षित हॉस्टल की सुविधा भी तैयार की जाएगी.
  • बेहतर सपोर्ट सिस्टम: संस्थान की फैकल्टी और सपोर्ट स्टाफ में भी महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि छात्राओं को एक अच्छा और सहयोगी माहौल मिल सके.

लड़कियां पहले ही गाड़ रही हैं झंडे

मारुति सुजुकी का यह कदम यूं ही नहीं है; लड़कियां खुद को साबित कर रही हैं. इसी साल JIM ऊंचा माजरा की दो महिला छात्राओं ने मैन्युफैक्चरिंग ट्रेड्स में हरियाणा स्टेट टॉपर का खिताब जीता है. इसके अलावा, चार अलग-अलग ट्रेड्स में तो स्टेट लेवल पर टॉप रैंक इसी संस्थान के छात्रों के नाम रहे हैं, जिनमें से दो में तो टॉप-3 की सभी पोजीशन इन्हीं के पास हैं.

सीखो और कमाओ का बेहतरीन जापानी मॉडल

जापान-भारत मैन्युफैक्चरिंग संस्थान (JIM) असल में भारत और जापान सरकार की एक साझा पहल है, जिसका मकसद इंडस्ट्री के लिए कुशल कामगार तैयार करना है. मारुति सुजुकी ने भारत में ऐसे 4 संस्थान खोले हैं. गुजरात के मेहसाणा व गांधीनगर में और हरियाणा के मानेसर और सोनीपत में. यहां खास तरह की ट्रेनिंग होती है. यानी क्लासरूम की पढ़ाई के साथ-साथ इंडस्ट्री का सीधा प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है.

छात्रों को हर साल 7 महीने की पेड इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग मिलती है, जिससे वे सीखते हुए कमाने का अनुभव ले पाते हैं. ये संस्थान भारत के NCVT यानी राष्ट्रीय व्यावसायिक ट्रेनिंग परिषद और जापान के म‍िन‍िस्‍ट्री ऑफ इकॉनमी ट्रेड एंड इंडस्‍ट्री से मान्यता प्राप्त हैं.

मारुति सुजुकी के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती का स्पष्ट कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग स्किल्स में 360-डिग्री निखार लाने के लिए डायवर्सिटी बहुत जरूरी है. यह पहल उन युवतियों के लिए एक गोल्डन चांस है, जो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के शॉप-फ्लोर पर अपना करियर बनाना चाहती हैं.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *