कुवांरों की शादी हुई पक्की तो मन में फूटे लड्डू, जब दुल्हन से मिलने की आई बारी तो हो गया खेल

दिल्ली पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है. ठगी की इस कहानी में शादी के लिए तरसते कुंवारे लड़के भी थे, रिश्ते की बात करने वाले लोग भी थे, फोटो भी और बातचीत भी लेकिन बस नहीं थी तो कोई दुल्हन. बिना दुल्हन की मौजूदगी के ही यहां रिश्ते पक्के किए जा रहे थे और दूल्हा बनने की आस लगाए बैठे कुंवारों को ठगने के लिए फर्जी मैचमेकिंग गिरोह चलाने का पूरा खेल चल रहा था.

यह पूरा रैकेट इतने शानदार तरीके से चल रहा था कि इसमें फर्जी सिर्फ दुल्हन थी, बाकी मैचमेकिंग साइट के रजिस्ट्रेशन से लेकर साइट और बैंक खाते, सिम और दफ्तर तक सब असली था. यह सब इस तरह से डिजाइन किया गया था कि लड़कों को लगता था कि वे असली मैचमेकिंग साइट पर बात कर रहे हैं और उनकी शादी बस फिक्स ही होने वाली है. इसी भरोसे में वे सभी फीस तक देते जाते थे.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार यह गिरोह उत्तर प्रदेश के आगरा में एक कॉल सेंटर से काम करता था. जिसका नाम था ‘शादी पार्टनर’. इस वेबसाइट पर प्रोफाइल दिखती थी, लड़कों को लड़कियों की फोटो भेजी जाती थी, फोन पर लड़की और उसके परिजनों से बात भी कराई जाती थी. सब कुछ इतना असली लग रहा था कि पीड़ित युवक आसानी से पैसा जमा कर देते थे. पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड एक 29 साल का वकील अमित कुमार था. जबकि फर्म की मालकिन के रूप में एक महिला जय शक्या का नाम था.

कैसे चलता था यह पूरा खेल
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के लोग सोची समझी साजिश के तहत सबसे पहले सोशल मीडिया, मैट्रिमोनियल साइट्स और वेबसाइट से उन युवकों के नंबर निकालते थे जो दुल्हन की तलाश में थे. फिर उनकी आर्थिक हालत का अंदाजा लगाते थे. इसके बाद उनसे सोशल मीडिया या फोन नंबर के माध्यम से कॉन्टेक्ट कर इंटरनेट से सुंदर लड़कियों की फोटो निकालकर उन्हें भेज देते थे. साथ में वेबसाइट पर बनाई गई नकली प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट भी भेजते थे ताकि सब कुछ उन्हें असली लगे.

इसके बाद साइट के लोग उस युवक से लगातार संपर्क करते रहते थे. जब युवक दिलचस्पी दिखाता, तो कॉल सेंटर की महिला कर्मचारी दुल्हन बनकर उससे बात करती. कई दिनों तक लड़के और लड़की की बातचीत चलती. लड़का जब पूरी तरह फंस चुका होतो तो बीच-बीच में कभी परिवार के सदस्य बनकर भी कोई उनसे बात कर लेता. युवक को लगता कि रिश्ता पक्का होने वाला है. फिर अलग-अलग नामों से पैसे मांगे जाते—रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल एक्टिवेशन, कॉन्टैक्ट अनलॉक, सिक्योरिटी डिपॉजिट. पैकेज दो हजार पांच सौ रुपये से लेकर पंद्रह हजार रुपये तक के होते थे.

कम पैसे ज्यादा ठगी
सबसे चालाकी वाली बात यह थी कि इनके चार्जेस फिक्स थे और ये ज्यादा पैसे नहीं मांगते थे. ज्यादातर मामलों में पंद्रह हजार रुपये तक ही ठगी करते थे. पुलिस कहती है कि यह ‘छोटा ठगो, ज्यादा लोगों को ठगो’ वाली रणनीति पर काम करते थे. ज्यादा पैसा मांगने से शिकायत बढ़ जाती, इसलिए सीमा तय कर रखी थी.

फिर कुछ दिनों की बातचीत के बाद रिश्ता अचानक टूट जाता. लड़के को वजह बताई जाती कि लड़की मांगलिक है, परिवार राजी नहीं है, या लड़की की कहीं और से सगाई हो गई. पीड़ित युवक हैरान रह जाता. पैसे तो चले गए, दुल्हन भी नहीं मिली.

कैसे खुली पोल
चूंकि यह रैकेट पैन इंडिया युवकों को अपना शिकार बना रहा था तो इस मामे में दिल्ली निवासी एक युवक ने पंद्रह हजार रुपये गंवाने के बाद शिकायत दर्ज कराई. उसने महसूस किया कि फोटो वाली लड़की कोई और थी और उसकी बात किसी किसी और से बात हो रही थी. जब जांच शुरू हुई और बैंक खाते की पड़ताल में पता चला कि पैसा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में जा रहा था, जो ‘एम/एस शादी पार्टनर डॉट कॉम’ के नाम पर था. जांच में सामने आया कि इस खाते में पैसे देने वाले देशभर से छह और लोगों ने शिकायत कराईं.

दिल्ली पुलिस ने मारा छापा
इसके बाद 4 सितंबर को दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर टीम ने आगरा के सिकंदरा स्थित रामाजी धाम अपार्टमेंट में छापा मारा. वहां जय शक्या और आठ महिला टेली-कॉलर्स को गिरफ्तार किया गया. बाद में मास्टरमाइंड अमित कुमार भी गिरफ्तार हुआ. पुलिस का कहना है कि फर्म एमएसएमई और श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थी. इसके सिम कार्ड और बैंक खाते भी फर्म के नाम पर थे. यह सब इसलिए किया गया था कि सब कुछ वैध दिखे. कुछ भी फर्जीवाड़ा न लगे.

पुलिस का बयान
डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर ने बताया कि यह पैन-इंडिया रैकेट था. कई राज्यों के युवक इसके शिकार हुए थे. गिरोह फर्जी प्रोफाइल, इंटरनेट से ली गई फोटो और स्टेज किए गए कॉल्स से लड़कों के मन में पूरा भ्रम पैदा करता था. पीड़ितों को लगता था कि वे असली मैचमेकिंग सर्विस ले रहे हैं. जबकि हकीकत कुछ और थी.

यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं है. यह उन हजारों युवकों की कहानी है जो शादी की जल्दी में फर्जी वादों के जाल में फंस जाते हैं. ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट्स पर आजकल बहुत सावधानी बरतनी जरूरी है. डीसीपी कहते हैं कि कोई भी पैसा देने से पहले प्रोफाइल की पूरी जांच कर लें, परिवार से मिलें, वीडियो कॉल पर बात करें और जरूरत पड़े तो पुलिस से सलाह लें.

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