दिल्लीवालों जरा सावधान हो जाओ… राजधानी की कई व्यस्त सड़कें और चौराहे जानलेवा हादसों के लिहाज से बेहद खतरनाक बनकर उभरे हैं. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने साल 2025 में हुए सड़क हादसों का आंकड़ा खंगाला तो बेहद डरावनी तस्वीर उभरकर सामने आई है. इसके बाद शहर में 153 दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की गई है. इनमें ग्रैंड ट्रंक रोड, आउटर रिंग रोड, रिंग रोड और मथुरा रोड जैसी प्रमुख सड़कें भी शामिल हैं. इन सड़कों पर बार-बार जानलेवा दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित स्वरूप नगर में 13 जानलेवा सड़क हादसे दर्ज किए गए. यह राजधानी में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स में सबसे अधिक है. इसी सड़क पर मुकरबा चौक, लिबासपुर बस स्टैंड और सिंघु बॉर्डर भी हादसों के लिहाज से संवेदनशील स्थानों में शामिल हैं. इन तीनों जगहों पर सात-सात जानलेवा दुर्घटनाएं दर्ज की गईं.
यह आंकड़ा बताता है कि भारी वाहनों और दूसरे ट्रैफिक से लगातार व्यस्त रहने वाले इस मार्ग पर सड़क सुरक्षा की चुनौती कितनी गंभीर है. यहां ट्रैफिक मैनेजमेंट , सड़क की बनावट और दुर्घटनाओं को रोकने के उपायों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
आउटर रिंग रोड और रिंग रोड पर भी खतरा
राजधानी की आउटर रिंग रोड और रिंग रोड भी जानलेवा हादसों के लिहाज से प्रमुख संवेदनशील मार्गों में शामिल हैं. आउटर रिंग रोड पर भलस्वा चौक और हैदरपुर मेट्रो स्टेशन के पास साल 2025 में सात-सात जानलेवा दुर्घटनाएं दर्ज की गईं.
वहीं रिंग रोड पर आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पास आठ जानलेवा हादसे हुए, जबकि आजादपुर चौक पर छह ऐसे मामले दर्ज किए गए. ये इलाके बस टर्मिनल, मेट्रो स्टेशन और बड़े ट्रैफिक जंक्शनों के आसपास स्थित हैं, जहां वाहनों और पैदल चलने वालों की आवाजाही काफी अधिक रहती है.
मथुरा रोड से रोहतक रोड तक, इन सड़कों पर भी खतरा
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की सूची में जानलेवा दुर्घटनाओं की अधिक संख्या वाले 10 प्रमुख मार्गों में आउटर रिंग रोड, रिंग रोड, ग्रैंड ट्रंक रोड, अर्बन एक्सटेंशन रोड-II, रोहतक रोड, वजीराबाद रोड, नजफगढ़ रोड, एनएच-24, मथुरा रोड और एनएच-8 शामिल हैं.
मथुरा रोड पर मोदी मिल फ्लाईओवर और तुगलकाबाद रोड मेट्रो स्टेशन के पास चार-चार जानलेवा दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इसके अलावा आईटीओ/आईपी फ्लाईओवर, आनंद विहार आईएसबीटी, प्रेमबाड़ी पुल, एसजीटी नगर, हनुमान मंदिर, बारापुला फ्लाईओवर, पीतमपुरा स्थित वीआईपी कॉलेज, एम्स, पंजाबी बाग चौक, जहांगीरपुरी के ईई ब्लॉक और निजामुद्दीन-यमुना ब्रिज के आसपास का इलाका भी दुर्घटना संभावित स्थानों की सूची में शामिल है.
इन जगहों में बड़े चौराहे, फ्लाईओवर, बस अड्डे और मेट्रो स्टेशनों के आसपास के हिस्से शामिल हैं. ऐसे इलाकों में तेज रफ्तार, वाहनों का दबाव, सड़क पार करने की चुनौती और यातायात के अलग-अलग प्रवाह के कारण दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है.
पैदल चलने वालों के लिए भी खतरे की घंटी
दिल्ली में सड़क हादसों का खतरा केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है. ट्रैफिक पुलिस के आकलन के मुताबिक, 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच राजधानी में पैदल चलने वाले 492 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई.
इस अवधि में पैदल यात्रियों की मौत के अधिक मामले दर्ज करने वाले मार्गों में रिंग रोड, ग्रैंड ट्रंक रोड, आउटर रिंग रोड, नजफगढ़ रोड, रोहतक रोड, वजीराबाद रोड, अर्बन एक्सटेंशन रोड-II, महरौली-बदरपुर रोड, एनएच-24, बुलेवार्ड रोड और मथुरा रोड शामिल हैं.
गौर करने वाली बात यह है कि रिंग रोड, ग्रैंड ट्रंक रोड और आउटर रिंग रोड उन मार्गों में भी शामिल हैं, जहां जानलेवा दुर्घटनाएं अधिक दर्ज की गईं और जहां पैदल यात्रियों की मौत के मामले भी सामने आए. इससे इन सड़कों पर वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत भी सामने आती है.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस हर साल सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण कर उन स्थानों की पहचान करती है, जहां बार-बार हादसे होते हैं. इन स्थानों की सूची संबंधित सरकारी विभागों और सड़क निर्माण व रखरखाव करने वाली एजेंसियों को भेजी जाती है, ताकि जरूरी सुधार किए जा सकें. इस प्रक्रिया में दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल होती हैं.
इन एजेंसियों से अपेक्षा की जाती है कि वे दुर्घटना संभावित स्थानों पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं. इनमें सड़क की बनावट में सुधार, यातायात प्रबंधन, संकेतकों की व्यवस्था और पैदल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े उपाय शामिल हो सकते हैं. हालांकि, कौन-सा उपाय किस स्थान पर लागू किया जाएगा, यह संबंधित एजेंसियों के आकलन और जरूरत पर निर्भर करेगा.
साल 2025 के लिए चिन्हित 153 स्थानों की सूची एजेंसियों को यह तय करने में मदद करती है कि कहां पहले कदम उठाने की जरूरत है. इसके बाद दुर्घटनाओं के आंकड़ों के जरिए यह भी आंका जा सकता है कि किए गए सुधारों से हादसों में कमी आई या नहीं.
2026 में किन ट्रैफिक सर्किलों में सबसे ज्यादा हादसे?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 30 सितंबर 2026 तक ट्रैफिक सर्किल के हिसाब से सड़क दुर्घटनाओं का ब्योरा भी साझा किया है. इस अवधि में द्वारका सर्किल में सबसे अधिक 257 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इसके बाद नरेला में 254, नजफगढ़ में 184, समयपुर बादली में 183, अमन विहार में 166 और भजनपुरा में 158 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं.
अशोक विहार और नांगलोई में 145-145 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इसके अलावा तिलक नगर, मॉडल टाउन, पश्चिम विहार, शाहदरा, खजूरी खास, मधु विहार, सरिता विहार, तिमारपुर, रोहिणी, दिल्ली कैंट, पंजाबी बाग, राजौरी गार्डन, कोतवाली और बदरपुर समेत कई अन्य ट्रैफिक सर्किलों में भी इस अवधि के दौरान 100 से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं.
ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में सड़क सुरक्षा की चुनौती किसी एक सड़क या इलाके तक सीमित नहीं है. दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान पहला कदम है, लेकिन असली चुनौती इन जगहों पर प्रभावी सुधार लागू करने और उनके नतीजों की नियमित निगरानी करने की है.
