दिल्ली के 850 से ज्यादा स्कूलों की इमारतें खस्ताहाल; 172 में बदहाल टॉयलेट और टूटी दीवारें, एक्शन में MCD कमिश्नर

Delhi MCD Schools: राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा कराए गए ताजा सर्वे में सामने आया है कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले आधे से ज्यादा स्कूल मरम्मत की बाट जोह रहे हैं. सर्वे में शामिल 1,460 स्कूल भवनों में से 850 से अधिक परिसरों की हालत चिंताजनक पाई गई. इनमें से 250 इमारतों को तुरंत बड़े रेनोवेशन (जीर्णोद्धार) की जरूरत है, जबकि 600 स्कूलों में छोटे-मोटे रिपेयर कार्य तुरंत कराने की सिफारिश की गई है.

अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुए इस औचक निरीक्षण में बाउंड्री वॉल, गेट, टॉयलेट्स, पीने के साफ पानी, बिजली, फर्नीचर और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखी गई. जांच में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एमसीडी ने ‘क्रॉस-जोन इंस्पेक्शन’ का अनोखा तरीका अपनाया, जिसके तहत दूसरे जोन के प्रिंसिपलों और स्कूल प्रमुखों से बाहरी स्कूलों की स्वतंत्र जांच कराई गई. इस दौरान सिर्फ टूटी-फूटी दीवारों का हिसाब ही नहीं रखा गया, बल्कि बच्चों की अटेंडेंस, पढ़ाई के तौर-तरीके और मूलभूत साक्षरता कार्यक्रमों के असर का भी बारीकी से मूल्यांकन किया गया.

सर्वे में खुली बुनियादी सुविधाओं की पोल
निगम के स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं.
850 से ज्यादा इमारतें खस्ताहाल: कुल 1,460 स्कूलों के सर्वे में आधे से ज्यादा भवनों में तत्काल मरम्मत और सुधार की जरूरत पाई गई.
250 स्कूलों में बड़ा संकट: लगभग 250 स्कूल भवनों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां बड़े स्तर पर निर्माण और रेनोवेशन जरूरी है.
फायर सेफ्टी से लेकर पानी तक की जांच: स्कूलों में बिजली के तारों, अग्निशमन सुरक्षा, साफ-सफाई और फर्स्ट-एड सुविधाओं का स्वतंत्र ऑडिट हुआ.

क्रॉस-जोन चेकिंग से सुनिश्चित की गई निष्पक्षता
एमसीडी ने रिपोर्ट में किसी भी तरह के पक्षपात या लीपापोती को रोकने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई.
दूसरे जोन के प्रिंसिपलों ने की जांच: किसी भी स्कूल की जांच उसी इलाके के अफसरों से न कराकर दूसरे जोन के हेड्स को जिम्मेदारी सौंपी गई.
पढ़ाई के स्तर पर भी पैनी नजर: जांच में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि कक्षाओं में बच्चों की मौजूदगी और पढ़ाई के नतीजों का भी लेखा-जोखा तैयार किया गया.

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में यह भी पाया गया कि 50 स्कूलों में मुख्य गेट और बाउंड्री वॉल से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े सुधार की जरूरत है, जबकि 300 से ज्यादा स्कूलों में छोटी-मोटी मरम्मत की जरूरत है. 112 स्कूलों में टॉयलेट की हालत खराब पाई गई और उनमें काफी सुधार की जरूरत है. स्कूलों और जोन में मिली जानकारी को एक साथ लाने और आगे की कार्रवाई पर नजर रखने में मदद के लिए एक डिजिटल इंस्पेक्शन रिपोर्ट और डैशबोर्ड बनाया गया है. अधिकारी ने कहा, “इस सिस्टम से शिक्षा विभाग स्कूलों और जोन की जानकारी की समीक्षा कर सकेगा, जरूरी कामों की पहचान कर सकेगा और कार्रवाई पर नजर रख सकेगा.”

इस प्रक्रिया को ‘एक्शन-टेकन रिपोर्ट’ सिस्टम से भी जोड़ा गया है, जिसमें जोनल प्रमुखों को पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है. सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं, खासकर खतरनाक या जर्जर इमारतों को प्राथमिकता दी गई है. MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने इंजीनियरिंग विभाग को सर्वे के दौरान पहचानी गई इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है. एक अन्य अधिकारी ने कहा, “कुछ कमियां तो हैं, लेकिन इंजीनियरिंग समेत दूसरे विभागों की मदद से उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक करने की कोशिश की जा रही है.”

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