स्वराज बग्गोंकर
एक साल पहले GST रेशनलाइजेशन ने लग्जरी कारों को करीब 5-7 फीसदी सस्ता कर दिया था. लेकिन मर्सिडीज-बेंज, BMW और ऑडी की लगातार कीमत बढ़ोतरी ने वो बचत लगभग खत्म कर दी है. कुछ मॉडल तो अब उतने ही या उससे ज्यादा महंगे हो गए हैं, जितने GST कटौती से पहले थे.
मर्सिडीज-बेंज GLA 200 की कीमत GST लागू होने से पहले 22 सितंबर 2025 को 51.5 लाख रुपये थी. कटौती के बाद ये 49.7 लाख रुपये रह गई. अब ये बढ़कर 51.8 लाख रुपये हो गई है. यानी पुराने स्तर से 30 हजार रुपये ज्यादा. BMW X3 xDrive20d M Sport की कीमत 78.3 लाख से घटकर 73.1 लाख रुपये हो गई थी. अब ये फिर 78.2 लाख रुपये पर पहुंच गई है. करीब 5.2 लाख रुपये की बचत लगभग पूरी तरह उलट गई.
ये रिवर्सल इसलिए हुआ क्योंकि लग्जरी कार निर्माता रुपये के यूरो के मुकाबले कमजोर होने, लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने और ऑपरेटिंग कॉस्ट ऊंची होने से जूझ रहे हैं. GST की कम दर तो बनी हुई है, लेकिन कंपनियों ने खुद कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों का फायदा घटा दिया है.
ऑडी इंडिया ने इस साल दो बार कीमत बढ़ाई है. कुल बढ़ोतरी करीब 4 फीसदी हो गई है. ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों के मुताबिक, कंपनी ने GST के बाद कीमतें करीब 6-7 फीसदी घटाई थीं. ढिल्लों ने मनीकंट्रोल से कहा, हमें फॉरेक्स उतार-चढ़ाव की वजह से कई बार कीमत बढ़ानी पड़ी. पिछले साल रुपये में यूरो के मुकाबले 19 फीसदी गिरावट आई थी और इस साल पहले ही 6-7 फीसदी हो चुकी है. ये सब GST का सकारात्मक असर खत्म कर रहा है. हमने इस साल दो बढ़ोतरी की हैं.
क्यों लग्जरी कारें ज्यादा प्रभावित
लग्जरी कार निर्माता मुद्रा में उतार-चढ़ाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं क्योंकि वे आयातित वाहनों और पार्ट्स पर निर्भर करते हैं. मास-मार्केट कंपनियों के पास घरेलू सप्लायर नेटवर्क मजबूत होता है, लेकिन लग्जरी ब्रांड कम वॉल्यूम में काम करते हैं. इसलिए गहरी लोकलाइजेशन उनके लिए व्यावसायिक रूप से मुश्किल है. भारत में असेंबल होने वाले मॉडल भी अक्सर CKD किट, इंजन, ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य खास पार्ट्स आयात करते हैं. मर्सिडीज-बेंज, BMW और ऑडी जैसे जर्मन निर्माताओं के लिए इनमें से काफी हिस्सा यूरोप से आता है.
नतीजतन, रुपये के यूरो के मुकाबले कमजोर होने से खरीद और निर्माण की लागत बढ़ जाती है, भले ही मूल पार्ट की कीमत न बदली हो. लग्जरी गाड़ियों में पार्ट्स और इंपोर्ट वैल्यू ज्यादा होने से असर रुपये में भी बड़ा दिखता है. कंपनियां या तो ये अतिरिक्त खर्च खुद झेलें (मार्जिन पर दबाव) या ग्राहकों पर कीमत बढ़ाकर डालें. इसी वजह से GST का फायदा इतनी जल्दी खत्म हो गया. टैक्स कटौती एक बार की बचत थी, जबकि मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ते खर्च पूरे साल कंपनियों को प्रभावित करते रहे.
मर्सिडीज-बेंज ने दो बार बढ़ाई कीमतें
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने 2026 में दो बार कीमत बढ़ाई है और 1 अक्टूबर से एक और बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है. जनवरी में 2 फीसदी और अप्रैल में 2 फीसदी बढ़ाने के बाद अक्टूबर से फिर 2 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया है. कंपनी का कहना है कि हमने पिछले महीनों में बढ़ते खर्चों को खुद झेलकर ग्राहकों को तुरंत असर से बचाया. अब ये दबाव जारी है, इसलिए ये संतुलित समायोजन जरूरी हो गया है.
BMW ग्रुप इंडिया ने भी साल भर में कीमत संशोधन किए. अप्रैल से 2 फीसदी तक और जुलाई से फिर 2 फीसदी बढ़ाया. अगर दबाव बना रहा तो और बढ़ोतरी हो सकती है. BMW ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने कहा, मैक्रोइकॉनॉमिक हेडविंड्स खासकर रुपया गिरने और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च से अपने प्रीमियम स्टैंडर्ड्स को बचाने के लिए 2026 में कीमत बढ़ाई गई है. BMW की 2026 में कुल बढ़ोतरी मॉडल और संशोधन के हिसाब से 5 से 7 फीसदी के बीच रही है.
पिछले साल छह मर्सिडीज वेरिएंट्स के प्री और पोस्ट-GST दामों के आधार पर औसत शुरुआती कटौती करीब 6.1 फीसदी थी. बरार ने पहले बताया था कि 2026 की शुरुआत से रुपये में यूरो के मुकाबले करीब 7 फीसदी गिरावट आई है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है.
ग्रोथ में सुस्ती
GST फायदे के खत्म होने का असर तब दिख रहा है जब भारत का लग्जरी कार बाजार कई सालों की महामारी के बाद की तेजी के बाद धीमा पड़ रहा है. 2026 की पहली छमाही में सेगमेंट में सालाना करीब 4 फीसदी वृद्धि हुई. उद्योग के अधिकारियों को पूरा साल फ्लैट या सिंगल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है.
ढिल्लों का अनुमान है कि इस साल लग्जरी कार सेगमेंट 8-10 फीसदी बढ़ेगा, लेकिन उपभोक्ता सेंटिमेंट चिंता का विषय बना हुआ है. उन्होंने कहा, हमारा सेगमेंट भावनाओं से बहुत जुड़ा है. सेंटिमेंट बहुत मायने रखता है. शेयर बाजार 18 महीने से दो साल तक साइडवेज चल रहा है और फिर वेस्ट एशिया संकट. कुल मिलाकर ये पॉजिटिव सेंटिमेंट नहीं दे रहा.
GST रेशनलाइजेशन ने शुरू में खरीदारों को कीमत का प्रोत्साहन दिया था, खासकर ऐसे सेगमेंट में जहां छोटी प्रतिशत कटौती भी कई लाख रुपये की बचत बन जाती है. लेकिन बाद की कीमत बढ़ोतरी ने दिखा दिया कि आयात-निर्भर उद्योग में मुद्रा की चाल टैक्स कटौती के उपभोक्ता फायदे को कितनी जल्दी खत्म कर सकती है.
मर्सिडीज अक्टूबर में और बढ़ोतरी करने वाली है और BMW ने आगे और संशोधन की संभावना जताई है. इससे कीमतों पर और दबाव बन सकता है. लग्जरी कार खरीदारों के लिए टैक्स कटौती गायब नहीं हुई है. लेकिन एक साल बाद शुरुआती बचत का बड़ा हिस्सा ऊंची वाहन कीमतों में समा गया है. कुछ मॉडल अब फिर अपने प्री-GST स्तर पर या उससे ऊपर पहुंच गए हैं.
