अवमानना की कार्यवाही क्यों न हो? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर दागा सवाल, फिर CJI ने मान ली सरकार की बात

होमताजा खबरदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर दागा सवाल, फिर CJI ने मान ली सरकार की बात

Last Updated:

Supreme Court News: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों की कथित अनदेखी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर गरमा गया है. 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाएं ठप करने और आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगाने को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और डीएमआरसी चेयरपर्सन डी. थारा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर अदालत में बहस हुई.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों से पहले मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई जस्टिस वी. मोहना की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण बृहस्पतिवार तक टाल दी. 13 अक्टूबर को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ को कई याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई करनी थी.

तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद जस्टिस मोहना 13 अक्टूबर को सुनवाई में शामिल हुए. सुनवाई की शुरुआत में सीजेआई ने वकीलों से कहा कि जस्टिस मोहना की तबीयत खराब है, लेकिन इसके बावजूद वह अदालत आए हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से सुनवाई टालने का अनुरोध किया और कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और दूसरे वकीलों ने भी सुनवाई टालने पर सहमति जताई.

मेहता ने पीठ को बताया कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं करने के आरोप में दायर अवमानना याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को 13 अक्टूबर तक का समय दिया गया था. मेहता ने कहा, ‘हलफनामा तैयार है. मैं इसे और विस्तृत बनाने के लिए इसमें कुछ और बातें जोड़ना चाहता हूं.’ पीठ ने हलफनामा दाखिल करने के लिए समय बढ़ा दिया और कहा कि इसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकीलों को भी दी जाए.

10 अक्टूबर को प्रदर्शन संबंधी आदेशों के कथित उल्लंघन को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन डी. थारा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर कोर्ट में सवाल-जवाब किए गए. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी भी कोर्ट रूम में मौजूद रहे.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से पूछा था कि उसके आदेशों का पालन नहीं करने के मामले में उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में मेट्रो और ट्रेनों का संचालन अचानक बंद नहीं करने तथा लोगों की आवाजाही बाधित नहीं करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कानून के मुताबिक सभी सेवाएं बहाल रखी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को यह भी निर्देश दिया था कि जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं है, वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में नहीं लिया जाए. इसके साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत मेट्रो का नियमित संचालन जारी रखने का निर्देश दिया था.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को राहत देते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने और अवमानना नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय दिया. अब अधिकारियों को कोर्ट के आदेशों के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट और नोटिस पर अपना जवाब दाखिल करना होगा. इस मामले में आगे की सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.

About the Author

राकेश रंजन कुमार

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…

और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *