नई दिल्लीः भारत में हर साल सड़क हादसों की एक बड़ी वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है. ऐसे हादसों को रोकने के लिए एक नई टेक्नोलॉजी आई है जो गाड़ी स्टार्ट होने से पहले ही पता लगा लेगी कि ड्राइवर ने शराब पी है या नहीं. ड्रेगर सेफ्टी इंडिया और एग्रोविजन ग्रीन एनर्जी ने मिलकर व्हीकल इग्निशन इंटरलॉक सिस्टम शुरू किया है. इस सिस्टम की खास बात यह है कि अगर ड्राइवर नशे में है, तो गाड़ी स्टार्ट नहीं होगी.
कैसे काम करता है यह सिस्टम
यह सिस्टम सीधे वाहन के इग्निशन सिस्टम से जुड़ा होता है. जब भी कोई व्यक्ति गाड़ी स्टार्ट करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले Breath Test देना होगा. अगर टेस्ट में यह साबित हो जाता है कि ड्राइवर ने शराब नहीं पी है, तभी वाहन स्टार्ट होगा. अगर ड्राइवर नशे में पाया जाता है, तो गाड़ी स्टार्ट नहीं होगी
कैमरा भी रखेगा पूरी नजर
इस सिस्टम को वाहन के कैमरे से भी जोड़ा जा सकता है. इससे यह रिकॉर्ड हो जाता है कि Breath Test किसने दिया और हादसे के समय वाहन कौन चला रहा था. कई मामलों में दुर्घटना के बाद लोग यह दावा करते हैं कि वे गाड़ी नहीं चला रहे थे. ऐसे मामलों में यह तकनीक सही ड्राइवर की पहचान करने में मदद कर सकती है.
विदेश में पहले से इस्तेमाल हो रही टेक्नोलॉजी
कंपनी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपियन देशों में ऐसे ही सिस्टम पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति नशे में गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो सरकार उसकी गाड़ी में यह सिस्टम लगाना ज़रूरी कर सकती है. फिर उनकी हरकतों पर नज़र रखी जाती है. अगर वे बार-बार नशे में अपनी गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है और उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है.
ब्रीद टेस्टिंग से फ़ैसला होगा, AI से नहीं
कंपनी का कहना है कि मार्केट में कई सिस्टम ड्राइवर के व्यवहार का अंदाज़ा लगाने के लिए AI और कैमरों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, यह टेक्नोलॉजी सीधे ड्राइवर की सांस को मापती है. इसमें जर्मनी में डेवलप किया गया एक इलेक्ट्रोकेमिकल सेल सेंसर इस्तेमाल होता है, जिसे बहुत सटीक और भरोसेमंद माना जाता है.
कमर्शियल वाहनों के लिए भी फायदेमंद
यह सिस्टम प्राइवेट कारों, ट्रकों और कमर्शियल गाड़ियों के अलावा, जिनमें आग पकड़ने वाली या ज़हरीली चीज़ें होती हैं, उनमें भी लगाया जा सकता है. अगर ऐसी गाड़ी का ड्राइवर नशे में है, तो गाड़ी स्टार्ट नहीं होगी. इससे बड़े एक्सीडेंट का खतरा काफी कम हो सकता है.
कई बड़ी ऑटो कंपनियों के साथ काम चल रहा है
कंपनी के मुताबिक, वह BMW, स्कैनिया, वोल्वो और स्विच जैसी कंपनियों के साथ इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है. उनका मानना है कि भविष्य में यह सिस्टम भारत में रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
