Barapullah Phase-3 Flyover: 12 साल के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुआ बारापुला फेज-3 अब राहत की जगह आफत बन चुका है. दावा था कि मयूर विहार से एम्स का सफर सिर्फ 15 मिनट में सिमट जाएगा. हकीकत यह है कि उद्घाटन के महज दो हफ्ते बाद ही पूरा प्लान फेल नजर आ रहा है. एंट्री गेट पर वाहनों को रोक-रोक कर छोड़ा जा रहा है. आगे लंबा जाम न लगे, इसलिए पुलिस खुद ही गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रही है. सफर आसान होने की उम्मीद में पहुंचे लोग अब कतारों में फंसकर परेशान हो रहे हैं.
फ्लाईओवर की शुरुआत में ही लग गई ब्रेक
मयूर विहार से चढ़ते ही सफर फर्राटेदार होना चाहिए था. मगर यहां नजारा किसी टोल नाके से भी ज्यादा बदतर दिखता है. पुलिस ने शुरुआती पॉइंट पर ही बड़े-बड़े बैरिकेड लगा दिए हैं. गाड़ियों को एक-एक करके आगे बढ़ाया जा रहा है. इस रेंगती रफ्तार ने 15 मिनट के वादे की हवा निकाल दी है. लोग दफ्तर के लिए निकलते हैं लेकिन एंट्री पर ही फंस जाते हैं. 45 मिनट का पुराना सफर आज भी 45 मिनट का ही बना हुआ है.
डायवर्जन का खेल और सड़कों पर बढ़ती बेचैनी
पुलिस वाले सड़क पर खड़े होकर लोगों को दूसरा रास्ता लेने की सलाह दे रहे हैं. अगर आपको कतार में नहीं लगना है, तो आप एनएच-24 या डीएनडी की तरफ मुड़ जाएं. सवाल उठता है कि जब पुराने रास्तों पर ही जाना था, तो इस नए कॉरिडोर का क्या फायदा हुआ. पहले लगा था कि यह सिर्फ शुरुआती दिनों की समस्या है. मगर अब यह रोजमर्रा का नया सिरदर्द बन चुका है.
12 साल के भारी-भरकम निर्माण के बाद भी ट्रैफिक का कोई ठोस समाधान नहीं निकला. कॉरिडोर की शुरुआत में बैरिकेडिंग करके गाड़ियों को रोक-रोक कर आगे भेजा जा रहा है. कतार से बचने के लिए ड्राइवरों को डीएनडी या एनएच-24 की तरफ मोड़ा जा रहा है. 15 मिनट में सफर पूरा कराने का सरकारी दावा उद्घाटन के 14 दिन बाद ही हवा हो गया.
राहत की उम्मीद पर फिरा पानी
29 सितंबर को जब इसका फीता कटा था, तब लोगों को लगा था कि साउथ दिल्ली की राह आसान हो गई. पूर्वी दिल्ली से एम्स की दूरी अब चुटकियों में तय होगी. लेकिन जमीन पर प्लानिंग पूरी तरह से गायब दिखी. आगे जाकर फ्लाईओवर पर जाम न लगे, इस डर से एंट्री पर ही गाड़ियां रोकी जा रही हैं. यानी समस्या खत्म नहीं हुई, बल्कि उसका पता बदल गया है. दिल्ली वाले अब भी उसी पुराने जाम से जूझने को मजबूर हैं.
अधिकारियों ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि इस रास्ते पर और ज़्यादा जाम न लगे, न कि सिर्फ़ एंट्री पॉइंट पर ही ट्रैफ़िक को रोका जाए. समस्या तब और बढ़ जाती है जब Google Maps ऐप बारापुल्ला फेज III को काफी हद तक साफ दिखाता है, जबकि आगे ट्रैफिक में भारी जाम होता है. इस वजह से, ऐप पर भरोसा करने वाले ड्राइवर इस कॉरिडोर की ओर खिंचे चले आते हैं, जिससे गाड़ियों की भीड़ और बढ़ जाती है. यह समस्या खासकर सुबह के व्यस्त समय में ज्यादा होती है.
अधिकारियों के मुताबिक, यह समय सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चल सकता है. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि एंट्री को कंट्रोल करने से पहले से ही जाम वाले रास्ते पर और ज़्यादा गाड़ियों को आने से रोकने में मदद मिलती है. हालांकि, रोजाना सफर करने वालों के लिए, लाइन लगने के पीछे की वजह से उनके अनुभव में कोई खास फर्क नहीं पड़ता.
एक यात्री ने ऑनलाइन अपनी झुंझलाहट जाहिर करते हुए लिखा, “हाई-स्पीड कॉरिडोर 5 किमी/घंटा की रफ़्तार से चल रहा है. हाल ही में खुले मयूर विहार-एम्स (AIIMS) रूट पर 3 किमी की दूरी रेंगते हुए तय करने में 40 मिनट लग गए. इसे सीधे बारापुल्ला के जाम वाले हिस्से से जोड़ना ट्रैफिक प्लानिंग नहीं है, बल्कि रोज सफर करने वालों के साथ एक क्रूर मजाक है.” और उद्घाटन के दो हफ़्ते बाद यही विडंबना है. बारापुल्ला फेज III धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार पकड़ रहा है, लेकिन सचमुच तेज सफर का लक्ष्य अभी भी हासिल किया जाना बाकी है.
