नोएडा: नोएडा में सर्कल रेट बढ़ने की संभावना के बीच अब प्रॉपर्टी खरीदारों की नजर नई दरों पर है. अगर सर्कल रेट में बढ़ोतरी होती है, तो जमीन, फ्लैट और अन्य अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री पर लगने वाला खर्च बढ़ सकता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि नोएडा की अलग-अलग लोकेशन पर फिलहाल सर्कल रेट क्या हैं और संभावित बदलाव का खरीदारों पर कितना असर पड़ सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, नई दरों का असर प्रॉपर्टी खरीदने की लागत पर पड़ सकता है.
अलग लोकेशन पर अलग कीमत
आपको बता दें कि नोएडा में प्रॉपर्टी की कीमतें लोकेशन, सेक्टर, कनेक्टिविटी, सुविधाओं और संपत्ति के प्रकार के हिसाब से अलग-अलग होती हैं. प्रमुख सेक्टरों, एक्सप्रेसवे के आसपास के इलाकों और विकसित आवासीय क्षेत्रों में संपत्तियों की बाजार कीमतों में अंतर देखने को मिलता है. ऐसे में सर्कल रेट में किसी भी संभावित बदलाव का असर सभी इलाकों पर एक जैसा नहीं होता. खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में कीमत और सरकारी सर्कल रेट अलग-अलग हो सकते हैं.
नोएडा में संपत्ति के नए सर्किल रेट और नियम
प्रॉपर्टी डीलर अमित शर्मा के अनुसार, नोएडा में संपत्ति के सर्किल रेट विभिन्न श्रेणियों और सेक्टरों के आधार पर तय किए गए हैं. आवासीय क्षेत्रों में VIP जोन (A+ श्रेणी, जैसे सेक्टर 14A, 15A) के लिए सर्किल रेट ₹1,03,500 से ₹1,38,000 प्रति वर्ग मीटर या इससे अधिक हैं. वहीं, B श्रेणी में ₹72,000, C श्रेणी में ₹52,500 तथा D श्रेणी या बाहरी सेक्टरों जैसे सेक्टर 102, 115, 138, 140, 168 आदि में ₹40,000 से ₹46,200 प्रति वर्ग मीटर तक की दरें निर्धारित हैं. औद्योगिक क्षेत्रों में यह दर ₹60,000 से 80,000 प्रति वर्ग मीटर के बीच है.
व्यावसायिक संपत्तियों के सर्किल रेट आवासीय की तुलना में अधिक रखे गए हैं. सेक्टर 18 (अट्टा मार्केट) जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र में सर्किल रेट ₹3,00,000 प्रति वर्ग मीटर तक है, जबकि अन्य मुख्य बाजारों में यह दर लगभग ₹2,50,000 प्रति वर्ग मीटर है. अमित शर्मा ने बताया कि संपत्ति की रजिस्ट्री पर सामान्य तौर पर 7% स्टाम्प ड्यूटी लागू होती है. इसके अतिरिक्त, ओपन पार्किंग के लिए करीब ₹1.5 लाख और कवर्ड पार्किंग के लिए ₹3 लाख जोड़े जाते हैं. वहीं, लिफ्ट, जिम व स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं पर प्रत्येक सुविधा के लिए लगभग 3% अतिरिक्त मूल्य जोड़ा जाता है.
बीते दिनों इन महानगरों को नोएडा ने पछाड़ा
ब्लैक ओपल कंसल्टेंट लिमिटेड के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रसून चौहान के मुताबिक, नोएडा का रियल एस्टेट बाजार लंबे समय से बेहतर संभावनाओं वाला क्षेत्र रहा है. उनका कहना है कि रेरा, जीएसटी और संस्थागत कंपनियों की भागीदारी के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय के निवेश को लेकर तस्वीर बेहतर हुई है. प्रसून चौहान के अनुसार, नोएडा में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर भी बाजार की दिशा को प्रभावित करता है. उनके मुताबिक, यहां उम्मीद से ज्यादा डिमांड है, जबकि आपूर्ति सीमित रहने के कई कारण हैं. ऐसे में आने वाले समय में नोएडा रियल एस्टेट के लिए एक अच्छा विकल्प बना रह सकता है. बीते दिनों एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई, कोलकाता, बैंगलोर को नोएडा के रियल एस्टेट ने पीछे छोड़ा था कीमत में, संभावना है ये कुछ ही सालों में और बढ़ोतरी दिखेगी.
मांग के अनुसार छोटे घरों की हो सकती है पेशकश
प्रसून चौहान ने सस्ते आवास की जरूरत पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर निर्माण की लागत और फ्लैट की कीमतों पर पड़ता है. वहीं, मौजूदा समय में कई ग्राहक बड़े घरों की मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि खरीदारों की मांग के अनुसार डेवलपर्स छोटे आकार के घरों की पेशकश भी बढ़ा सकते हैं. संभावित सर्कल रेट बढ़ोतरी के बीच घर खरीदने वालों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रजिस्ट्री पर लगने वाले खर्च में कितना बदलाव आता है. यदि सर्कल रेट बढ़ते हैं, तो संपत्ति के मूल्यांकन और लागू स्टांप शुल्क के आधार पर खरीदारों का कुल खर्च बढ़ सकता है.
प्रसून चौहान ने बताया कि यह लिस्टिंग सेरेमनी का प्रोग्राम ऑर्गेनाइज किया था हमने आज. जो इन्वेस्टर्स थे, जिन्होंने इन्वेस्ट किया है और लॉन्ग-टरम हमारी कंपनी का फ्यूचर देखना चाहते हैं, तो वो लोग आए थे. एम्प्लॉइज ने भी हमारा बहुत कंट्रीब्यूशन किया, और बहुत सारे सपोर्ट्स, उन लोगों ने भी इसमें हिस्सा लिया.
