Ground Report : 'मेहमानों को बुलाने में शर्म आती है', ये कैसी मुसीबत में घिरी चोटपुर कॉलोनी? गगनचुंबी इमारतों के बीच एक नोएडा ऐसा भी

नोएडा. यूपी के नोएडा का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में ऊंची-ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और आधुनिक सुविधाओं की तस्वीर उभरती है, लेकिन इसी नोएडा में चोटपुर कॉलोनी की तस्वीर बिल्कुल अलग है. स्थानीय लोग से बात करने जब लोकल 18 की टीम पहुंची तो हालात बेहद खराब निकले. लोगों का कहना है कि यहां बड़ी आबादी आज भी सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है. संकरी और बदहाल गलियां, बिजली कटौती और पानी की समस्या ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेपटरी कर दिया है. हाल के दिनों में बिजली की समस्या इतनी बढ़ गई कि स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाईं और जल्द समाधान की मांग की.

कहीं लाइट, कहीं कटौती

लोकल 18 से स्थानीय निवासी विवेक शुक्ला ने आरोप लगाया है कि बिजली संकट को लेकर लगातार आवाज उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा. उनका कहना है कि कॉलोनी के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति हो रही है, जबकि कुछ हिस्सों में कटौती जारी है. उन्होंने इसे लोगों को बांटने की कोशिश बताते हुए कॉलोनीवासियों से एकजुट रहने की अपील की. लोगों का कहना है कि अपनी समस्याओं को लेकर उन्हें खुद ही संघर्ष करना पड़ रहा है. जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है. विवेक कहते हैं कि बिजली की अनियमित आपूर्ति ने घरों के साथ-साथ कामकाजी लोगों की दिनचर्या भी बिगाड़ दी है.

हटाए जा रहे तार

कॉलोनी निवासी सुनीता देवी ने बताया कि बिजली न होने से पानी की व्यवस्था प्रभावित होती है, जिससे खाना बनाने और घर के अन्य जरूरी कामों में परेशानी आती है. कई जगह बिजली के तार हटाए जा रहे हैं और बिजली संकट के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. लोगों का यह भी कहना है कि चुनाव के दौरान सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन इलाके की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. कई निवासियों ने यह सवाल भी उठाया कि जब उनसे प्लॉट और अन्य प्रक्रियाओं के लिए भुगतान लिया गया है, तो उन्हें मूलभूत सुविधाओं से क्यों वंचित रखा जा रहा है.

5 लाख आबादी

स्थानीय निवासी वीरेश यादव ने दावा किया कि चोटपुर कॉलोनी में करीब पांच लाख की आबादी रहती है और यहां लगभग 30 से 40 हजार घर हैं. बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों और उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों से रोजगार की तलाश में यहां बसे हैं. कॉलोनी में सड़क, बिजली और पानी की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं. कुछ लोगों का कहना है कि बारिश या मौसम खराब होने पर बिजली व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के बाद जब बिजली आती है तो एक साथ पानी भरने के लिए मोटर चलने से लोड बढ़ जाता है, जिससे आपूर्ति फिर प्रभावित होने लगती है.

50 हजार प्रति गज प्लाट

बिजली पानी न होने के कारण लोगों को नहाने, खाना बनाने और दूसरी दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. कामकाजी लोगों ने बताया कि रात में बिजली न होने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिसका असर अगले दिन उनकी नौकरी और काम पर पड़ता है. एक निवासी ने कहा कि उनके गांव में बिजली कटौती या खराब सड़कों की ऐसी स्थिति नहीं है, जैसी यहां देखने को मिलती है. लोगों का कहना है कि रिश्तेदार या मेहमान जब कॉलोनी में आते हैं तो उन्हें इलाके की बदहाल सड़कों और सुविधाओं की कमी को लेकर असहज महसूस होता है. बुलाने पर शर्म आने लगी है. यहां जमीन के रेट की बात करें तो फिलहाल 40-50 हजार प्रति गज प्लाट काटे जा रहे हैं. ऐसा निवासियों का आरोप है.

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