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Noida ki local news : मार्केट में ऐसी क्लीनिंग मशीनें दस्तक दे चुकी हैं, जिन्हें बनाने में रिसाइक्लेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल हुआ है. इन मशीनों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई फीचर्स दिए गए हैं. Eco Mode पर मशीन चलाने पर पानी की खपत करीब 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है. कम पानी इस्तेमाल होने के साथ मशीन की बैटरी ज्यादा देर तक चल सकती है, डिटर्जेंट की भी बचत होती है. कार्चर कंपनी के प्रोडक्ट मैनेजर रोमिल टिक्कू बताते हैं कि उनके पास मैन्युअल क्लीनिंग मशीनें भी हैं, जिनमें किसी तरह के ईंधन का इस्तेमाल नहीं होता.
नोएडा. क्लीनिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक कंपनी ने ऐसी कई मशीनें लॉन्च की हैं, जिनमें रिसाइकिल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है. इन मशीनों को बनाने में रिसाइक्लेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल हुआ है. कंपनी के प्रोडक्ट मैनेजर रोमिल टिक्कू कहते हैं कि कंपनी का फोकस ऐसी क्लीनिंग मशीनें तैयार करने पर है, जिनसे कम से कम संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए बेहतर और ज्यादा सफाई की जा सके. कंपनी की ओर से भारत में तैयार की जा रही इन मशीनों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई फीचर्स दिए गए हैं. इनमें स्वीपर, स्क्रबर ड्रायर और प्रेशर वॉशर जैसी मशीनें शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह की सफाई के लिए किया जा सकता है. इन मशीनों में दिया गया Eco Mode इसे खास बनाता है. रोमिल टिक्कू लोकल 18 से कहते हैं कि Eco Mode पर मशीन चलाने पर पानी की खपत करीब 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है. रोजाना होने वाली सफाई में हर बार मशीन को पूरी क्षमता पर चलाने की जरूरत नहीं. कम पानी इस्तेमाल होने के साथ मशीन की बैटरी ज्यादा देर तक चल सकती है, बिजली और डिटर्जेंट की खपत में भी बचत होती है.
कम संसाधन में बेहतर परफॉर्मेंस
कार्चर कंपनी मशीनों में रिसाइकिल्ड प्लास्टिक के इस्तेमाल को भी अपनी बड़ी खासियत बता रही है. रोमिल टिक्कू के मुताबिक, कंपनी के पास मैन्युअल क्लीनिंग मशीनें भी हैं, जिनमें किसी तरह के ईंधन का इस्तेमाल नहीं होता. KM 70/20 स्वीपर पूरी तरह मैन्युअल तरीके से काम करता है. कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) मार्कस लिमबर्गर बताते हैं कि इन मशीनों को डिजाइन करते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि कम से कम संसाधनों का इस्तेमाल करके बेहतर क्लीनिंग हासिल की जा सके. यानी मशीन की डिजाइन से लेकर उसके संचालन तक पर्यावरण और संसाधनों की बचत को प्राथमिकता दी गई है.
हर काम के लिए अलग मशीन
स्वीपर का इस्तेमाल बिल्डिंग के बाहर के कंपाउंड या खुले क्षेत्र में पत्तियों और दूसरे कचरे की सफाई के लिए किया जा सकता है. स्क्रबर ड्रायर फर्श पर जमी गंदगी को पहले स्क्रब करता है और फिर उसे वैक्यूम कर साफ करता है. कंपनी के प्रोडक्ट मैनेजर के मुताबिक, पारंपरिक पोछे से सफाई करने में गंदगी एक जगह से दूसरी जगह फैल सकती है, जबकि स्क्रबर ड्रायर गंदगी को उसी जगह से हटाकर साफ करता है. कंपनी ने प्रेशर वॉशर भी बनाया है, जिसका इस्तेमाल वाहन, दीवार और फर्श जैसी सतहों की सफाई में कर सकते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
