रामायण में माता सीता का किरदार निभाना सिर्फ अभिनय करना नहीं है, बल्कि उनके जीवन, धैर्य, त्याग और शक्ति को गहराई से समझना भी है. दिल्ली के ‘श्रीराम भारतीय कला केंद्र’ में पिछले करीब 7 साल से माता सीता की भूमिका निभा रहीं अनुशुआ चौधरी के लिए यह किरदार कुछ ऐसा ही अनूठा अनुभव लेकर आया है. खास बात यह है कि अनुशुआ कोई पेशेवर अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि एक डांस टीचर है. वह दिल्ली के धौलाकुआं स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में बच्चों को डांस सिखाती है. दिन में एक शिक्षिका की जिम्मेदारी निभाने के बाद, वह रामलीला के मंच पर माता सीता के रूप में नजर आती है.
अनुशुआ पिछले 13-14 साल से श्रीराम भारतीय कला केंद्र से जुड़ी हुई है. इसी केंद्र से उन्होंने कला की बारीकियां सीखी है. वह बताती हैं कि यहां उन्हें शोभा जी से बैले (ballet) के बारे में काफी कुछ सीखने का मौका मिला. इसके साथ ही, उन्होंने इस केंद्र के माध्यम से अपनी नृत्य कला को भी और ज्यादा निखारा है. उनके लिए यह जगह सिर्फ एक मंच नहीं, बल्कि सीखने और खुद को बेहतर बनाने का एक बेहतरीन जरिया है.
माता सीता का किरदार निभाना क्यों है चुनौतीपूर्ण
एक तरफ स्कूल में बच्चों को डांस सिखाना और दूसरी तरफ मंच पर माता सीता जैसे पवित्र किरदार को जीवंत करना, अनुशुआ चौधरी के लिए दोनों अनुभव बिल्कुल अलग है. वह कहती है कि एक शिक्षिका के रूप में उनकी जिम्मेदारी बच्चों को सही मार्गदर्शन देना और उन्हें डांस की बारीकियां सिखाना है. वहीं, माता सीता का किरदार निभाना उनके लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा है.
अनुशुआ के मुताबिक, इस किरदार ने उन्हें माता सीता के जीवन को बहुत करीब से समझने का मौका दिया। उन्होंने महसूस किया कि माता सीता ने अपने जीवन में कितनी कठिनाइयों का सामना किया. कितने त्याग किए और हर मुश्किल परिस्थिति में अपनी आंतरिक शक्ति का परिचय कैसे दिया. उनके लिए यह भूमिका सिर्फ मंच पर अदाकारी करना नहीं, बल्कि जीवन के कई अहम सबक सीखने का जरिया है.
माता सीता से सीखा धैर्य का पाठ
लगातार 7 साल तक माता सीता का किरदार निभाने के दौरान अनुशुआ ने इस चरित्र से बहुत कुछ सीखा है। जब उनसे पूछा गया कि माता सीता के किस गुण को वह अपने असल जीवन में सबसे ज्यादा अपनाना चाहती है, तो उन्होंने ‘धैर्य’ का नाम लिया. अनुशुआ कहती है कि हर महिला के भीतर अपनी एक अलग शक्ति होती है. लेकिन जीवन में धैर्य बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. माता सीता के किरदार ने उन्हें यही सिखाया है कि विपरीत और मुश्किल हालातों में भी इंसान को खुद को संभालकर आगे बढ़ना चाहिए. उनके लिए माता सीता शक्ति का एक ऐसा रूप है. जिसमें शालीनता, सुंदरता, भक्ति और धैर्य का अनूठा मेल देखने को मिलता है. अनुशुआ चाहती है कि रामायण के जरिए आज की नई पीढ़ी भी इन गुणों को समझे और अपने जीवन में इनसे प्रेरणा ले.
डेढ़ घंटे में माता सीता के रूप में होती हैं तैयार
मंच पर माता सीता के रूप को देखने वाले दर्शकों के लिए उनका मेकअप और वेशभूषा हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे है. हालांकि इस रूप में तैयार होने के लिए कलाकारों को काफी मेहनत करनी पड़ती है. अनुशुआ चौधरी बताती हैं कि किरदार के मुताबिक मेकअप करने में काफी समय लगता है. लेकिन शो की समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए उन्हें मात्र डेढ़ घंटे में ही पूरी तरह तैयार होना पड़ता है. इसके बावजूद जब वह माता सीता के रूप में मंच पर उतरती है और दर्शकों का प्यार उन्हें मिलता है तो उनकी सारी थकान और मेहनत सफल हो जाती है. वह कहती है कि जब भी उन्हें यह पवित्र भूमिका निभाने का मौका मिलता है तो वह खुद को बेहद खुशकिस्मत और धन्य महसूस करती है.
अनुशुआ चौधरी के लिए अपनी नौकरी और मंच की जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं है. उन्हें दोनों के लिए बहुत मेहनत से समय निकालना पड़ता है. वह बताती है कि उनका दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक स्कूल में पढ़ाने के साथ शुरू होता है. इसके बाद, वह बिना वक्त गंवाए श्रीराम भारतीय कला केंद्र पहुंचती है और अपनी भूमिका के लिए रिहर्सल व तैयारी करती है. यह दिनचर्या भले ही थोड़ी थका देने वाली और चुनौतीपूर्ण है. लेकिन डांस उनके पेशे और जुनून का हिस्सा है. इसलिए वह अपने समय और काम को बहुत अच्छे से मैनेज करती है.
