लॉरेंस-गोल्डी सिंडिकेट को झटका: फर्जी पासपोर्ट बनवाकर उड़न छू होने वाला था गोदारा का गुर्गा, दबोचा गया 'काजू'

दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लॉरेंस बिश्नोई-जितेंद्र गोगी सिंडिकेट के सबसे खतरनाक शूटरों में से एक, कर्मवीर उर्फ काजू को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. विदेश में बैठे गैंगस्टर रोहित गोदारा के इस बेहद करीबी गुर्गे को राजस्थान के कोटपुतली स्थित एक होटल से उस वक्त दबोचा गया, जब वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे देश छोड़कर भागने की तैयारी में था. 9 गंभीर मामलों में वांटेड काजू की गिरफ्तारी न केवल दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी जीत है, बल्कि इससे आने वाले समय में होने वाली कई बड़ी गैंगवार और रंगदारी की वारदातों पर भी लगाम लग गई है.

स्पेशल सेल का बिछाया जाल और फिल्मी स्टाइल में गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि कुख्यात शूटर कर्मवीर उर्फ काजू, जो लंबे समय से फरार चल रहा है, अपनी लोकेशन बदल रहा है. इंस्पेक्टर पवन कुमार के नेतृत्व और एसीपी नीरज कुमार की देखरेख में एक स्पेशल टीम गठित की गई. टीम ने रोहतक, गुरुग्राम, जयपुर और हरिद्वार में ताबड़तोड़ छापेमारी की. तकनीकी निगरानी और ग्राउंड इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस को पता चला कि काजू राजस्थान के सीकर की ओर भाग रहा है.

पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए उसका पीछा किया और आखिरकार 11 मार्च 2026 की सुबह उसे एनएच-08, कोटपुतली के एक होटल से घेर लिया. गिरफ्तारी के समय आरोपी सफेद रंग की हुंडई वेन्यू कार में सवार था.

कौन है कर्मवीर उर्फ काजू?
38 वर्षीय कर्मवीर उर्फ काजू हरियाणा के झज्जर जिले के सोलधा गांव का रहने वाला है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह रोहित गोदारा और जितेंद्र गोगी गैंग का सक्रिय सदस्य और शार्प शूटर है. उस पर दिल्ली और हरियाणा में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, डकैती और आर्म्स एक्ट जैसे 9 संगीन मामले दर्ज हैं. वह साल 2024 में एक हत्या के मामले में अंतरिम जमानत पर बाहर आया था, लेकिन उसके बाद वह कोर्ट में पेश होने के बजाय फरार हो गया. मई 2025 में अदालत ने उसे ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया था.

फर्जी पहचान और नेपाल कनेक्शन
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए काजू ने शातिर चालें चलीं. जमानत से फरार होने के बाद वह सीधे नेपाल भाग गया था, जहां वह करीब एक साल तक छिपा रहा. इस दौरान वह लगातार विदेश में बैठे गैंगस्टर रोहित गोदारा के संपर्क में था. दिसंबर 2024 में भारत से भागने से पहले उसने गुरुग्राम के दो नामी क्लबों पर ग्रेनेड हमले की साजिश रची थी. यह हमला रंगदारी वसूलने के लिए गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा के इशारे पर किया गया था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली थी.

विदेश भागने का था मास्टर प्लान
काजू सितंबर 2025 में वापस भारत लौटा और अपनी पहचान छिपाकर असम, गोवा, मुंबई और हिमाचल के बद्दी में छिपता रहा. पिछले कुछ महीनों से वह हरियाणा के कैथल में ठिकाना बनाए हुए था. यहाँ उसने अपने साथियों की मदद से फर्जी आधार कार्ड, फर्जी वोटर आईडी और एक फर्जी पासपोर्ट तैयार करवा लिया था. उसका इरादा फर्जी पहचान के सहारे विदेश निकल जाने का था ताकि वह वहां से गैंग की गतिविधियों को अंजाम दे सके.

काजू के पास से बरामद हुए फर्जी पासपोर्ट-आधार कार्ड
पुलिस का मानना है कि काजू की गिरफ्तारी से दिल्ली-NCR के कई व्यापारियों और प्रतिद्वंदी गैंग के सदस्यों की जान बच गई है. पूछताछ में पता चला है कि गैंग उसे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपने वाला था. पुलिस ने उसके पास से फर्जी पासपोर्ट के अलावा दो फर्जी आधार कार्ड और एक वोटर आईडी भी बरामद की है. फिलहाल स्पेशल सेल ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं और पासपोर्ट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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