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Kalibari Durga Puja Noida : नोएडा के कालीबाड़ी मंदिर का इलाका इन दिनों मिनी कोलकाता में बदल चुका है. यहां हर साल होने वाली दुर्गा पूजा देखते ही बनती है. इस बार कालीबाड़ी में ‘ग्राम बांग्ला’ थीम पर पंडाल तैयार किया गया है. मिट्टी के घरों की शैली, ऊपर डाला गया छप्पर और धान की पराली से तैयार सजावट दिल चुरा रही है. लोकल 18 से कालीबाड़ी समिति के सदस्य अचिंत्य खटक बताते हैं कि हर साल दुर्गा पूजा के लिए थीम बदली जाती है. अचिंत्य के मुताबिक कालीबाड़ी में दुर्गा पूजा के दौरान ऐसा माहौल बनता है कि जैसे आप बंगाल या कोलकाता पहुंच गए हों. रोज 15 से 20 हजार लोग पहुंचते हैं.
नोएडा. यूपी के नोएडा में सेक्टर-26 स्थित कालीबाड़ी मंदिर का इलाका दुर्गा पूजा में देखते ही बनता है. इस दौरान पूरा इलाका ‘मिनी कोलकाता’ में बदल जाता है. यहां पश्चिम बंगाल से जुड़े परिवार बड़ी संख्या में मां दुर्गा की पूजा करने और दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस बार कालीबाड़ी में ‘ग्राम बांग्ला’ थीम पर पंडाल तैयार किया गया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों के घर और वहां की पारंपरिक जीवनशैली को दिखाने की कोशिश की गई है. मिट्टी के घरों की शैली, ऊपर डाला गया छप्पर और धान की पराली से तैयार सजावट इस थीम को खास बना रही है. आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बंगाल के ग्रामीण जीवन और विरासत से परिचित कराना है. लोकल 18 से कालीबाड़ी समिति के सदस्य अचिंत्य खटक बताते हैं कि हर साल दुर्गा पूजा के लिए थीम बदली जाती है. इस बार ग्राम बांग्ला थीम पर सहमति बनी.
अचिंत्य कहते हैं कि नई पीढ़ी बंगाल के गांवों में बने पारंपरिक घरों और वहां की सजावट से ज्यादा परिचित नहीं है. ऐसे में पंडाल के जरिए उस संस्कृति को सामने लाने का प्रयास किया गया है. उनके मुताबिक कालीबाड़ी में दुर्गा पूजा के दौरान ऐसा माहौल बनता है कि लोगों को लगता है जैसे वे बंगाल या कोलकाता पहुंच गए हों. यहां रोज 15 से 20 हजार लोग पहुंचते हैं.
इस थीम में सिर्फ पंडाल की सजावट ही नहीं, बल्कि बंगाल के ग्रामीण परिवेश की झलक देने पर जोर दिया गया है. मिट्टी से बने घरों जैसी संरचना के ऊपर धान की फसल से निकलने वाली पराली का इस्तेमाल छप्पर के तौर पर किया गया है. युवा सदस्य ऋत्विक चटर्जी के मुताबिक, कंक्रीट के बीच रहने वाली नोएडा की नई पीढ़ी और यहां आने वाले दूसरे लोगों को यह दिखाने की कोशिश है कि पश्चिम बंगाल के गांव किस तरह दिखाई देते हैं और वहां की समृद्ध विरासत कैसी है. उनका कहना है कि यह थीम अपनी संस्कृति को याद रखने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश भी है.
रोज 4 हजार लोगों का भोग
दुर्गा पूजा के दौरान सेक्टर-26 और आसपास का इलाका सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि बंगाली समुदाय के मिलन का केंद्र भी बन जाता है. समिति के सदस्यों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर रहने वाले बंगाली परिवार इन चार-पांच दिनों के उत्सव में कालीबाड़ी पहुंचते हैं और एक-दूसरे से मिलते हैं. यहां पूजा, आरती और पुष्पांजलि के साथ भोग की भी व्यवस्था होती है. समिति के अनुसार रोजाना करीब 3000 से 4000 लोगों के लिए भोग की व्यवस्था की जाती है. शाम के समय फूड स्टॉल पर पारंपरिक बंगाली व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यहां वेज और नॉनवेज दोनों तरह के व्यंजन होते हैं.
1984 में बना पहला मंदिर
कालीबाड़ी समिति के सदस्य सुजय पाल के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण 1984 में हुआ. यहां बे समय से बंगाली समुदाय धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है. समिति के अनुसार कालीबाड़ी में करीब 2000 बंगाली सदस्य जुड़े हैं. नोएडा में अलग-अलग जगहों पर दुर्गा पूजा के कई आयोजन होते हैं, लेकिन सेक्टर-26 की कालीबाड़ी की खासियत यहां मौजूद स्थायी मंदिर और उससे जुड़ी सामुदायिक परंपरा है. दुर्गा पूजा के दिनों में यहां उमड़ती भीड़, बंगाली खान-पान, सांस्कृतिक माहौल और इस बार की ‘ग्राम बांग्ला’ थीम मिलकर सेक्टर-26 और आसपास के इलाके को मिनी कोलकाता का रूप दे देते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
