दिल्ली की एक अदालत ने अलग रह रही पत्नी रश्मि उर्फ रेशमा की हत्या के मामले में उसके पति अमन को दोषी ठहराया है. हालांकि, अदालत ने अमन और उसकी मां संगीता को दहेज हत्या और क्रूरता के आरोपों से बरी कर दिया. अदालत के मुताबिक, दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के आरोप पर्याप्त ठोस सबूत से साबित नहीं हो सके.
प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग मामले की सुनवाई कर रहे थे. अदालत ने 27 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि रश्मि के चरित्र को लेकर अमन के मन में शक उनके वैवाहिक विवाद की मुख्य वजह था. अदालत ने यह संभावना भी जताई कि रश्मि की मौत के बाद दहेज संबंधी प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हों.
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रश्मि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में एक किराये के मकान में अपनी मां और शिशु बेटी के साथ रह रही थी. 25 फरवरी 2025 को अमन उससे मिलने वहां पहुंचा था. आरोप है कि दोनों के बीच झगड़ा हुआ और इसी दौरान अमन ने रश्मि की चुन्नी से उसका गला घोंट दिया.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इस घटना के बाद अमन अपनी बेटी को लेकर पुलिस थाने पहुंचा. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने हत्या से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में हत्या का कोई चश्मदीद नहीं था और अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर अपना मामला पेश किया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रश्मि की मौत गला घोंटने से हुई थी. रिपोर्ट के अनुसार, गला घोंटने से हुई चोटें सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त थीं.
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अमन को हत्या के मामले में दोषी ठहराया. हालांकि, दहेज हत्या और क्रूरता से जुड़े आरोपों पर अदालत का निष्कर्ष अलग रहा.
दहेज में मोटरसाइकिल और डेढ़ लाख मांगने का आरोप
अमन और उसकी मां संगीता पर दहेज हत्या और क्रूरता से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए थे. रश्मि के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि उसे मोटरसाइकिल और डेढ़ लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाता था.
हालांकि, अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों में ये आरोप सामान्य रूप से लगाए गए थे और उनके समर्थन में विशिष्ट विवरण तथा ठोस पुष्टि का अभाव था. अदालत के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों से यह भी संकेत मिला कि रश्मि के विवाहेतर संबंध होने को लेकर अमन का संदेह दोनों के बीच विवाद का मुख्य कारण था.
दहेज हत्या और क्रूरता के आरोपों से क्यों मिली राहत?
अदालत ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि रश्मि की मौत के बाद दहेज संबंधी क्रूरता के आरोप लगाए गए हों. दहेज प्रताड़ना के आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं मानते हुए अदालत ने अमन और उसकी मां संगीता को दहेज हत्या तथा क्रूरता के आरोपों से बरी कर दिया.
