नोएडा: नोएडा के सेक्टर-120 स्थित आरजी रेसीडेंसी सोसाइटी के निवासियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर खुशी जताई है, जिसमें मेंटेनेंस चार्ज नहीं देने वाले निवासियों की बिजली आपूर्ति काटने के मामले में AOA के पक्ष में फैसला सुनाया गया है. निवासियों का कहना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से न केवल उनकी सोसाइटी में लंबे समय से चल रहा विवाद सुलझा है, बल्कि नोएडा समेत प्रदेशभर की अन्य सोसाइटियों में मेंटेनेंस चार्ज को लेकर चल रहे विवादों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
आरजी रेसीडेंसी के निवासियों के मुताबिक, सोसाइटी की व्यवस्थाओं को संचालित करने के लिए नियमित मेंटेनेंस चार्ज बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि सुरक्षा, साफ-सफाई, लिफ्ट, कॉमन एरिया की बिजली और अन्य सुविधाओं के संचालन में इसी राशि का इस्तेमाल किया जाता है.
सोसाइटी निवासियों ने फैसले का किया स्वागत
अशोक बिंदलिश बोर्ड मेंबर, प्रदीप जायसवाल एक्स प्रेसिडेंट, अर्नव साहा, पुष्पेंद्र सिंह, सौरभ कनौजिया, रजनी अग्रवाल, वेद अरोरा बोर्ड मेंबर, अविनाश अरुण और अन्य निवासियों ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मेंटेनेंस चार्ज को लेकर सोसाइटी में एक बैठक हुई थी. बैठक में तय किया गया था कि मेंटेनेंस चार्ज की राशि बिजली बिल के साथ समायोजित की जाएगी. हालांकि, सोसाइटी के कुछ निवासी इस व्यवस्था के खिलाफ पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड यानी PVVNL के पास पहुंच गए. इसके बाद सोसाइटी को विद्युत निगम की ओर से दो नोटिस मिले. सोसाइटी की ओर से इन नोटिस के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया गया. निवासियों के मुताबिक, मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने AOA के पक्ष में फैसला सुनाया.
दोनों राशियां अलग-अलग ऐप में दिखेगी
निवासियों का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला सिर्फ आरजी रेसीडेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर नोएडा की दूसरी सोसाइटियों में मेंटेनेंस चार्ज को लेकर चल रहे विवादों पर भी पड़ सकता है. एक निवासी ने बताया कि सोसाइटी में बिजली बिल और मेंटेनेंस चार्ज की राशि अलग-अलग दिखाई देती है. जिस ऐप के जरिए बिजली बिल का भुगतान और कटौती होती है, उसमें दोनों राशियां अलग-अलग दिखाई देती हैं, जिन्हें निवासी रोजाना देख सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं. उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहती है.
निवासियों ने कहा कि सोसाइटी चलाने के लिए मेंटेनेंस चार्ज की नियमित वसूली जरूरी है. वहीं, आरजी रेसीडेंसी की पूर्व AOA सदस्य रहीं एक महिला ने बताया कि मेंटेनेंस चार्ज की वसूली सोसाइटी के लिए हमेशा बड़ी चुनौती रही है. उनके मुताबिक, बिना मेंटेनेंस चार्ज के सोसाइटी की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो जाता है.
सोसाइटी को चलाने में होगी आसानी
निवासियों के मुताबिक, सोसाइटी में रहने वाले लोगों को लगातार बेहतर सुविधाएं देने के लिए मेंटेनेंस चार्ज का नियमित भुगतान जरूरी है. सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, लिफ्ट संचालन, कॉमन एरिया की बिजली और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च के लिए यह राशि महत्वपूर्ण होती है. निवासियों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले से AOA को मेंटेनेंस चार्ज की वसूली में आसानी होगी और इससे सोसाइटी प्रबंधन और निवासियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है. उनका कहना है कि फैसले से व्यवस्था को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी और सोसाइटी के संचालन में आने वाली परेशानियां कम हो जाएगी.
