Last Updated:
Inspiring Women Story: नवरात्रि में मां दुर्गा की शक्ति, साहस और संकल्प की झलक गाजियाबाद की उन महिलाओं की जिंदगी में भी दिखाई देती है, जो अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं. महापौर सुनीता दयाल से लेकर डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अफसर तक, इन महिलाओं ने अपने काम और संघर्ष से अलग पहचान बनाई है. किसी ने मरीजों की सेवा को अपना लक्ष्य बनाया, तो किसी ने महिला सुरक्षा और जनसेवा की जिम्मेदारी संभाली. वहीं, कुछ महिलाओं ने निजी जीवन की चुनौतियों के बीच भी हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा किया. नवरात्रि के इस खास मौके पर जानिए गाजियाबाद की इन 9 महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियां.
नवरात्रि में जब मां दुर्गा की शक्ति और साहस की बात होती है, तो गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल का नाम भी खास है. 2 अक्टूबर 1958 को जन्मीं सुनीता दयाल वर्ष 2023 से गाजियाबाद की प्रथम नागरिक यानी महापौर हैं. छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहीं सुनीता दयाल ने एबीवीपी से अपना सफर शुरू किया. महापौर के रूप में अतिक्रमण हटाने और प्रशासनिक कार्रवाई में उनकी सक्रियता चर्चा में रहती है. दृढ़ कार्यशैली के चलते उन्हें ‘लेडी सिंघम’ भी कहा जाता है. उनकी यात्रा महिलाओं को साहस, मेहनत और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
नवरात्रि के दौरान नारी शक्ति की चर्चा हो, तो सेवा और समर्पण के जरिए लोगों की मदद करने वाली महिलाओं का जिक्र भी जरूरी है. गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल की डॉ. दिव्या द्विवेदी चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. 27 जून 1985 को चंडीगढ़ में जन्मीं दिव्या एमएमजी जिला अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं. एमबीबीएस के बाद उन्होंने मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज से एमडी किया. दिसंबर 2021 से वह मरीजों का उपचार कर रही हैं. स्केबीज, सोरायसिस और कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों का इलाज करने के साथ मरीजों को जागरूक करना भी उनका लक्ष्य है. उनके लिए चिकित्सा सेवा का माध्यम है.
किसी बीमारी से लड़ रहे लोगों को इलाज के साथ सम्मान और आत्मविश्वास देना भी सेवा का अहम हिस्सा है. गाजियाबाद की डॉ. निहारिका केसरवानी इसी सोच के साथ कुष्ठ रोगियों के लिए काम कर रही हैं. मूल रूप से प्रयागराज की रहने वाली निहारिका गाजियाबाद में उप जिला कुष्ठ अधिकारी हैं. एमबीबीएस के बाद उन्होंने मेडिकल ऑफिसर के रूप में करियर शुरू किया. वर्तमान में वह कुष्ठ रोगियों की पहचान, जांच, उपचार और जागरूकता के लिए काम कर रही हैं. संजय नगर और लोनी में जांच प्रयोगशालाओं की शुरुआत से सुविधाओं का विस्तार हुआ है. उनका लक्ष्य कुष्ठ रोगियों को सम्मान और आत्मनिर्भरता दिलाना है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था संभालना और चुनौतियों का सामना करना आसान नहीं होता. गाजियाबाद की एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय अपनी कार्यशैली से महिलाओं के साहस और आत्मविश्वास की मिसाल पेश कर रही हैं. मूल रूप से गोंडा की रहने वाली उपासना 2016 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं. सितंबर 2025 में उनके नेतृत्व में महिला पुलिस टीम ने बिना किसी पुरुष पुलिसकर्मी की मदद के एनकाउंटर कर प्रदेश में पहली बार यह मिसाल कायम की. उपासना पांडेय की कार्यशैली महिलाओं को साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. उनका संदेश है कि महिलाएं दृढ़ संकल्प के साथ हर चुनौती का सामना कर सकती हैं.
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर जागरूकता बढ़ाना पुलिस की अहम जिम्मेदारियों में शामिल है. गाजियाबाद की एसीपी एल.आई.यू. अन्विता उपाध्याय भी इसी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देती हैं. 2 अगस्त 1986 को सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में जन्मीं अन्विता वर्ष 2014 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं. गाजियाबाद में तैनाती से पहले वह 47वीं वाहिनी पीएसी में सेवाएं दे रही थीं. 4 जुलाई 2026 से गाजियाबाद में तैनात अन्विता का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पुलिस की प्राथमिकता है. उनका संदेश है कि महिलाएं किसी भी परेशानी में चुप न रहें और बेझिझक पुलिस की मदद लें.
नारी शक्ति का मतलब सिर्फ चुनौतियों का सामना करना नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा के लिए भी आगे आना है. गाजियाबाद की एसीपी महिला सुरक्षा सुचिता सिंह अपने काम के जरिए इसी जिम्मेदारी को निभा रही हैं. 16 जनवरी 1992 को प्रतापगढ़ में जन्मीं सुचिता के पिता अखिलेश सिंह पीसीएस अधिकारी रह चुके हैं. हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडल हासिल करने वाली सुचिता ने यूपीपीएससी 2018 में प्रदेश में दूसरी रैंक प्राप्त की. प्रशिक्षण में उन्हें सर्वांग सर्वोत्तम पुरस्कार भी मिला. मेरठ में सीओ रह चुकीं सुचिता अब डिजिटल वॉलंटियर फोर्स और मिशन शक्ति वाहनों के जरिए महिला सुरक्षा और जागरूकता के लिए काम कर रही हैं.
सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत और लगातार आगे बढ़ने का जज्बा जरूरी है. गाजियाबाद की एसीपी वेव सिटी प्रिया श्रीपाल की कहानी भी इसी बात को दिखाती है. 2 जून 1989 को जन्मीं प्रिया ने यूपीपीसीएस में ऑल इंडिया 33वीं रैंक हासिल कर पुलिस सेवा में कदम रखा. वर्ष 2018 बैच की अधिकारी की पहली तैनाती वाराणसी में हुई. पुलिस सेवा से पहले उन्होंने पांच साल अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम किया. विश्वविद्यालय टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट प्रिया को ग्लोबल वूमन अचीवर्स अवॉर्ड भी मिला. उनका मानना है कि महिलाओं को समान मुकाम हासिल करने के लिए अपना 200 प्रतिशत देना पड़ता है.
जिंदगी में अचानक आने वाली मुश्किलें इंसान की हिम्मत की परीक्षा लेती हैं. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओएसडी डॉ. कनिका कौशिक ने भी मुश्किल दौर में हार मानने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों को संभालते हुए आगे बढ़ने का रास्ता चुना. 27 मार्च 1989 को दिल्ली में जन्मीं कनिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और एमबीए किया. महिंद्रा एंड महिंद्रा में नौकरी और शिक्षण के बाद 2023 में पति के निधन ने उनकी जिंदगी बदल दी. तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने हार नहीं मानी. 16 मार्च 2024 को जीडीए में ओएसडी बनीं कनिका आज प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ बच्चों का भविष्य संवार रही हैं.
अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करते रहना ही सफलता की राह बनाता है. गाजियाबाद की मोदीनगर एसडीएम कोमल पंवार का सफर भी महिलाओं को यही संदेश देता है. 20 मई 1991 को जन्मीं कोमल मूल रूप से बागपत के सुनहेड़ा गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने 2011 में दिल्ली के सरकारी स्कूल में शिक्षिका के रूप में करियर शुरू किया. इसी दौरान सिविल सेवा की तैयारी भी जारी रखी. वर्ष 2016 में यूपीपीएससी में 85वीं और 2018 में 74वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में पहुंचीं. उनका सफर महिलाओं को मेहनत से सपने पूरे करने की प्रेरणा देता है.
