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GPS Mapping of Transformer: बिजली विभाग ट्रांसफॉर्मरों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. गाजियाबाद के करीब 20 हजार ट्रांसफॉर्मरों की GPS मैपिंग की जा रही है. इसके तहत उनकी सटीक लोकेशन, क्षमता और संबंधित फीडर की जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगी. इस व्यवस्था से खराबी आने पर संबंधित ट्रांसफॉर्मर की पहचान, रखरखाव की योजना और लोकेशन का सत्यापन आसान हो सकता है.
ट्रांसफ़ॉर्मर की हो रही है डिजिटल मैपिंग. (एआई की मदद से तस्वीर बनाई गई है)
Ghaziabad News: अक्सर गर्मियों और त्योहारों के सीजन में ट्रांसफॉर्मर फुंकने या खराब होने पर बिजली गुल हो जाती है. लोगों को घंटों बिजली विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं. इस समस्या से निजात दिलाने के लिए विद्युत निगम ने एक जबरदस्त टेक्निकल जुगाड़ निकाला है. अब जिले में लगाए गए लगभग 20 हजार ट्रांसफॉर्मरों की डिजिटल मैपिंग का काम तेजी से किया जा रहा है जिससे ट्रांसफॉर्मर के खराब होते ही उसकी सटीक लोकेशन सीधे विभाग के पास पहुंच जाएगी और मेंटेनेंस टीम तुरंत मौके पर पहुंच जाएगी.
विद्युत निगम जिले में बिजली व्यवस्था को अधिक दुरुस्त करने के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल मैपिंग का काम कर रहा है. इसके तहत करीब 20 हजार ट्रांसफॉर्मरों को रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा. जोन-प्रथम में अब तक लगभग 7,700 ट्रांसफॉर्मरों की पहचान की जा चुकी है. मैपिंग पूरी होने के बाद विभाग के पास यह जानकारी उपलब्ध होगी कि कौन-सा ट्रांसफॉर्मर कहां लगा है, उसकी क्षमता कितनी है और वह किस फीडर से जुड़ा हुआ है.
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खराबी आने पर आसान होगी ट्रांसफॉर्मर की पहचान
अभी तक ट्रांसफॉर्मरों की लोकेशन, क्षमता और फीडर से उनके जुड़ाव का समेकित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था. इसके कारण अधिकारियों को यह पता लगाने में परेशानी होती थी कि किसी फीडर से कितने ट्रांसफॉर्मर जुड़े हैं और उनकी कुल क्षमता कितनी है. डिजिटल मैपिंग से यह जानकारी आसानी से मिल सकेगी. यदि किसी इलाके में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या आती है, तो संबंधित ट्रांसफॉर्मर की लोकेशन और तकनीकी विवरण पहचानने में मदद मिलेगी. इससे मरम्मत के लिए कर्मचारियों को सही स्थान तक पहुंचने और रखरखाव की योजना बनाने में सहूलियत हो सकती है.
ट्रांसफॉर्मर की क्षमता और फीडर का भी रहेगा रिकॉर्ड
इस परियोजना में केवल GPS लोकेशन दर्ज करना ही शामिल नहीं है, बल्कि तकनीकी मैपिंग के जरिए प्रत्येक ट्रांसफॉर्मर को संबंधित फीडर नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा. इससे फीडरवार ट्रांसफॉर्मरों की संख्या और उनकी क्षमता का ब्योरा तैयार किया जा सकेगा. विभाग को बिजली नेटवर्क की स्थिति समझने और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक योजना बनाने में भी मदद मिलेगी. एसई अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, GPS के माध्यम से पूरे विद्युत ढांचे का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. इसमें ट्रांसफॉर्मरों की जगह और उनकी क्षमता की जानकारी दर्ज की जाएगी. निजी नलकूप कनेक्शनों की लोकेशन भी रिकॉर्ड में शामिल की जा रही है.
ट्रांसफॉर्मर शिफ्टिंग पर भी रहेगी नजर
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से ट्रांसफॉर्मरों की वास्तविक लोकेशन का सत्यापन करना आसान होगा. यदि किसी ट्रांसफॉर्मर को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है, तो उसकी निगरानी और रिकॉर्ड का मिलान बेहतर तरीके से किया जा सकेगा. इससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका कम करने में मदद मिलेगी.
खराबी का नहीं मगर सटीक लोकेशन की मिलेगी जानकारी
कुल मिलाकर, यह पहल बिजली विभाग के नेटवर्क को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. हालांकि, GPS मैपिंग अपने आप ट्रांसफॉर्मर की खराबी का पता नहीं लगाएगी और न ही मरम्मत टीम को स्वतः सक्रिय करेगी. इसके बावजूद, सटीक लोकेशन और तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध होने से खराबी की स्थिति में संबंधित उपकरण की पहचान और रखरखाव की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
