दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित 125 साल पुरानी ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद पर डिमोलिशन की तलवार लटकी है. मस्जिद से जुड़े लोगों का दावा है कि L&DO की तरफ से उन्हें छह दिनों के भीतर मस्जिद परिसर खाली करने के लिए कहा गया है. इसके साथ ही मस्जिद में बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है. इस मामले पर अब एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से लेकर कश्मीरी नेता मीरवाइज उमर फारूक तक ने चिंता जताते हुए सरकार से दखल की मांग की है. ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मामले में तत्काल दखल देने का आग्रह किया है. वहीं, मीरवाइज ने सवाल उठाया है कि अगर कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त और वक्फ संपत्ति के तौर पर अधिसूचित मस्जिद की सुरक्षा नहीं हो सकती, तो अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
दरअसल, रेसकोर्स मस्जिद 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और इसे धरोहर स्थल के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है. इसके बावजूद इसे खाली करने का आदेश दिया गया है. मीरवाइज ने वक्फ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि वे इसका बचाव करने में विफल रहे हैं.
1977 से वक्फ संपत्ति होने का दावा
मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘यह बेहद चिंताजनक है कि दिल्ली की ऐतिहासिक ‘रेस कोर्स मस्जिद’, जो 1977 से एक वक्फ संपत्ति है और एक धरोहर स्थल भी है, उसे छह दिन के भीतर खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है. उतनी ही चिंता की बात यह भी है कि वक्फ अधिकारी इसका बचाव करने में विफल रहे हैं. क्या मुसलमानों के इबादत स्थलों के लिए यही अब नई परिपाटी बनती जा रही है?’
उन्होंने लिखा, ‘यही वह मुख्य कारण है, जिसकी वजह से हमने वक्फ संशोधनों और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार का नियंत्रण बढ़ाने का कड़ा विरोध किया था. अगर कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त एक मस्जिद को भी नहीं बचाया जा सकता, तो फिर बाकी जगहों के लिए क्या सुरक्षा उपाय बचते हैं?’
ओवैसी ने रिजिजू से की तुरंत दखल की मांग
उधर एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद के मामले में दखल देने की गुजारिश की है. हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस मामले में रिजिजू के तत्काल दखल की जरूरत है.
ओवैसी ने बताया कि 1977 से ही यह मस्जिद एक वक्फ संपत्ति है, फिर भी वक्फ बोर्ड ने इसके गिराए जाने के आदेश को चुनौती नहीं दी. साथ ही, उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने की कोई कोशिश भी नहीं की. उन्होंने कहा, ‘वक्फ संशोधन अधिनियम भी मस्जिद की सुरक्षा करता है, क्योंकि यह ‘वक्फ बाय यूज’ यानी उपयोग के आधार पर वक्फ है. अतीत में पंजीकृत ऐसी सभी संपत्तियां सुरक्षित हैं. फिर भी, कोई प्रयास नहीं किया गया.’ उन्होंने आगे कहा, ‘2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, इसलिए इस मामले को सुलझाना मंत्री की जिम्मेदारी है. हालांकि, बोर्ड के सीईओ भी इसमें हस्तक्षेप कर सकते थे, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ.’
‘मस्जिद ‘हुजरा कुआं’ को गिराने की कोशिश गलत’
इससे पहले एक पोस्ट में, उन्होंने रेस कोर्स के पास स्थित ऐतिहासिक मस्जिद ‘हुजरा कुआं’ को गिराने की कोशिश की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने बताया कि लोगों को इस मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है, जबकि 1977 के गजट में इसका विधिवत जिक्र है और इसकी देखभाल करने वाले को मस्जिद गिराने की धमकी दी गई है, जबकि इस संबंध में कोई औपचारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया है.
सांसद ने कहा, ‘मुसलमानों के इबादतगाहों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? वक्फ संशोधन अधिनियम और धार्मिक स्थल अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर हमारी आशंकाएं सच होती दिख रही हैं. सरकार को इन गैरकानूनी धमकियों को वापस लेना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि मस्जिद के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.’
मस्जिद के गेट बंद, नामाजियों को पहुंचने में परेशानी
मस्जिद से करीब 40 वर्षों से जुड़े इमाम मोहम्मद हारून ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया कि अधिकारियों ने उन्हें छह दिनों के भीतर परिसर खाली करने के लिए कहा है. उनके मुताबिक, मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है और भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने सभी गेट बंद कर दिए हैं, जिससे नमाजियों को मस्जिद तक पहुंचने में परेशानी हो रही है.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी मंत्री को सौंपा ज्ञापन
रेस कोर्स मस्जिद के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी हस्तक्षेप की मांग की है. संगठन के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 19 अक्टूबर को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन में दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद और सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित उससे सटे कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग की गई. जमीयत ने मस्जिद की बिजली-पानी की सप्लाई बहाल करने, नमाज की अदायगी सुनिश्चित करने और परिसर को ध्वस्त किए जाने की आशंका के बीच तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया.
