आशुतोष रांका और सौरव दास की बढ़ने वाली हैं मुश्किलें? CJP नेताओं से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच के हवाले

होमताजा खबरदेश

आशुतोष रांका और सौरव दास से जुड़े मामलों की जांच करेगी क्राइम ब्रांच

Last Updated:

CJP Protest News: दिल्‍ली-एनसीआर में कुछ दिनों पहले हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई लगाातर जारी है. कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है.

आशुतोष रांका और सौरव दास से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है.

नई दिल्‍ली. दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास से जुड़े दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है. इनमें कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं से संबंधित मामले शामिल हैं. कनॉट प्लेस से जुड़े मामले को पहले ही क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया था, जबकि अब जंतर-मंतर मामले की जांच भी उसे सौंप दी गई है. इस बीच, दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत से संबंधित याचिका पर बुधवार 21 अक्‍टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी.

आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बंद गेट फांदकर परिसर में प्रवेश करने, तिरंगा लहराने और नारेबाजी करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रदर्शन करने को लेकर यह कार्रवाई की गई थी. दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. इसके बाद 19 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी थी. अब इस मामले में दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है.

दोनों मामलों में अलग-अलग धाराओं के तहत FIR

पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस थाने में दर्ज पहले मामले में दोनों नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 332 और 61(2) लगाई गई हैं. ये धाराएं लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा, अपराध करने के इरादे और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं. वहीं, जंतर-मंतर की घटना से संबंधित दूसरी एफआईआर संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई थी. इसमें बीएनएस की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) लगाई गई हैं.

किस आरोप में लगती हैं ये धाराएं

ये धाराएं लोक सेवक के काम में बाधा डालने, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने, उसे कर्तव्य निभाने से रोकने के लिए चोट पहुंचाने और साझा मंशा से जुड़े अपराधों से संबंधित हैं. दिल्ली पुलिस के इस फैसले के बाद अब दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी. हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई में दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत से जुड़े मामले पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…

और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *