ये है दिल्ली की 'मोस्ट वांटेड' कार, जिसके सिर पर दर्ज 42 चालान, नियम तोड़ने में निकली सबकी बाप

दिल्ली में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. यहां नियमों को और कड़ा किया जा रहा है. हालांकि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो नियमों की धज्जियां तो उड़ा ही रहे हैं. अपनी गाड़ी के सिर पर चालान और जुर्माने का भारी बोझ भी लादकर फर्राटा भर रहे हैं. हाल ही में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड में ऐसी ही एक कार मिली है जो चलती-फिरती चालान बैंक बन गई है. इस एक ही लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार के नाम पर 42 चालान दर्ज हैं. जिनमें से 24 चालान तो सिर्फ पिछले एक साल के भीतर ही हुए हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक दिल्ली की सड़कों पर प्रदूषण नियंत्रण के सख्त नियमों के बावजूद कुछ वाहन चालक बार-बार कानून तोड़ने की आदत छोड़ नहीं पा रहे हैं. राजधानी में ग्रैप स्टेज-1 के प्रतिबंध लागू किए जा चुके हैं और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) को सभी वाहनों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है. फिर भी कई मोटरिस्ट चालान कटवाने से न डर रहे हैं और न ही उसमें सुधार कर रहे हैं.

देखा जा रहा है कि ये चालान सिर्फ एक-दो बार के नहीं, बल्कि बार-बार दोहराए जाने वाले उल्लंघन हैं.

नियम तोड़ने में बीएमडब्ल्यू कार ने सभी को पछाड़ा

1 अक्टूबर से दिल्ली में बिना वैलिड PUC सर्टिफिकेट के वाहन चलाना भारी पड़ सकता है. (फाइल फोटो)

इस कड़ी में सभी को पीछे धकेलते हुए पहले नंबर पर आई है एक 2019 मॉडल की बीएमडब्ल्यू कार. इस लग्जरी गाड़ी का रिकॉर्ड प्रीमियम तो दूर, उल्टा चिंताजनक है. इस कार पर साल 2019 से अभी तक बिना वैध पीयूसीसी के ड्राइविंग करने के लिए 42 चालान कट चुके हैं. अकेले इस साल ही 24 चालान हो चुके हैं.

जानकारी के मुताबिक इस कार की पीयूसीसी 2024 से ही एक्सपायर पड़ी हुई है, बार-बार हिदायतें देने के बाद भी इस कार चालक ने पीयूसीसी को अपडेट नहीं कराया है. ऐसे में दिल्ली के लिए सबसे बड़े सिरदर्द बन चुके प्रदूषण की पहली शर्त को ही यह गाड़ी लगातार तोड़ रही है. राजधानी की हवा पहले से ही दमघोंटू है, लेकिन मालिक को अभी भी नहीं लग रहा है कि एक बार अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र पर जाकर प्रमाणपत्र बनवा लेना चाहिए.

क्या कहता है नियम?

मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 190(2) साफ कहती है कि हर वाहन को निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा करना होगा और अधिकृत केंद्र से जारी वैध पीयूसीसी रखना अनिवार्य है. नई गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद पीयूसीसी बनवानी होती है, जबकि पुरानी गाड़ियों को हर छह महीने में पॉल्यूशन सर्टिफिकेट का नवीनीकरण कराना पड़ता है. कुछ अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के मामले में यह अवधि तीन महीने भी हो सकती है.

बीएमडब्ल्यू के पीछे बारात भी मौजूद

बीएमडब्ल्यू इस सूची में अकेली नहीं है. दिल्ली के बार-बार उल्लंघन करने वाले टॉप पांच में चार जगह दोपहिया वाहनों की है. एक 2023 मॉडल की सुजुकी मोटरसाइकिल के 33 पीयूसीसी चालान कट चुके हैं, जिनमें से 29 इसी साल के हैं. आखिरकार इसके पास वैध प्रमाणपत्र आ गया, लेकिन बार-बार याद दिलाने के बाद आया. वहीं एक एक्टिवा पर 32 चालान हैं, जिनमें 26 चालान इसी साल 2026 के हैं और अभी भी इसकी पीयूसीसी एक्सपायर है. 2012 मॉडल की एक ऐस मालवाहक गाड़ी पर 28 चालान हैं, जबकि 2025 मॉडल की टीवीएस राइडर पर 24 चालान हैं और सभी इसी साल के हैं. दोनों के प्रमाणपत्र अभी भी एक्सपायर हैं.

बार बार उल्लंघन गलती नहीं आदत है

कुछ लोग देर-सबेर पालन तो कर लेते हैं, लेकिन इसके लिए कई बार चेतावनी और चालान की जरूरत पड़ती है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि बार-बार उल्लंघन को आदत माना जाता है, न कि गलती. एक अधिकारी ने बताया कि वाहन मालिक भी वैध पीयूसीसी सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं. दस से ज्यादा लंबित पीयूसीसी चालान वाले मामलों में साफ दिखता है कि कानून की अनदेखी जानबूझकर की जा रही है. जहां तुरंत चालान संभव नहीं होता, वहां मामले कोर्ट में ले जाए जाते हैं.

क्यों जरूरी प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र?
प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यह पुष्टि करता है कि वाहन के उत्सर्जन निर्धारित सीमा के अंदर हैं. लेकिन बार-बार उल्लंघन की इतनी बड़ी संख्या से सवाल उठता है कि क्या सिर्फ चालान काटना काफी है.

परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा का मानना है कि वाहन संबंधी कानूनी जरूरतों के बारे में जागरूकता अभी भी असमान है. कई मालिक पीयूसीसी और बीमा की शर्तों से अनजान हैं. सरकार का प्रदूषण रोकथाम संदेश जमीन तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है. उन्होंने ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति का समर्थन किया, जिससे ज्यादा लोग प्रमाणपत्र बनवाने को मजबूर होंगे. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि वैध प्रमाणपत्र न होना खुद में यह साबित नहीं करता कि उत्सर्जन सीमा से ज्यादा है. इसके लिए भौतिक परीक्षण जरूरी है और जमीन पर जांच व प्रवर्तन प्रभावी होना चाहिए.

दिल्ली की सांसें पहले से तंग हैं. ऐसे में बार-बार कानून तोड़ने वाले वाहन मालिकों की यह आदत सिर्फ जुर्माने का मसला नहीं, बल्कि शहर की हवा को और जहरीला बनाने का कारण भी बन रही है.

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