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Neha Bora Bond Peace Delhi High Court Verdict: दिल्ली हाईकोर्ट ने एंटी-सीईसी प्रोटेस्ट से जुड़े शांति बॉन्ड नोटिस के खिलाफ नेहा बोरा की पिटीशन को डिसमिस कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि SEM यानी स्पेशल एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पास पूरे सेफगार्ड्स हैं. हालांकि, नेहा को राहत देते हुए सारा लीगल मटेरियल प्रोवाइड करने का ऑर्डर मिला है. साथ ही, धारा 135 BNSS के सही इम्प्लायमेंट पर भी ध्यान देने को कहा है. अब पूरी बॉल मजिस्ट्रेट के कोर्ट में है.
नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी
दिल्ली हाईकोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को जारी स्पेशल एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के नोटिस के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी है. नोटिस में 10,000 का निजी मुचलका भरने और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था. जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने याचिका खारिज की, लेकिन मजिस्ट्रेट के लिए अहम निर्देश भी दिए. अदालत ने कहा कि नेहा बोरा को उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा रही सभी सामग्री उपलब्ध कराई जाए. साथ ही मजिस्ट्रेट को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135 के प्रभाव पर भी विचार करना होगा.
असली सवाल: क्या शुरुआत में ही मुचलका जरूरी है?
इस मामले का सबसे अहम पहलू धारा 135 की व्याख्या है. हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट से विचार करने को कहा कि क्या इस प्रावधान के तहत शुरुआत में ही मुचलका मांगना जरूरी है. या फिर जांच के दौरान आगे कोई ऐसी घटना होनी चाहिए, जिससे शांति भंग होने का खतरा सामने आए. यही सवाल इस कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बनाता है. शांति बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं. लेकिन ऐसे कदमों का आधार और प्रक्रिया भी कानून के अनुरूप होनी चाहिए.
याचिका खारिज, लेकिन प्रक्रिया पर सवाल बरकरार
हाईकोर्ट का आदेश नेहा बोरा को तत्काल राहत नहीं देता, क्योंकि उनकी याचिका खारिज हो चुकी है. हालांकि, मजिस्ट्रेट को सामग्री उपलब्ध कराने और धारा 135 पर विचार करने का निर्देश आगे की प्रक्रिया में अहम हो सकता है. इससे साफ है कि अदालत ने मामले को केवल मुचलके की रकम तक सीमित नहीं रखा. अब मजिस्ट्रेट को संबंधित सामग्री और कानूनी प्रावधानों पर विचार करना होगा. इस मामले का व्यापक महत्व यही है कि शांति बनाए रखने की कार्रवाई में भी प्रक्रिया और कानूनी आधार की जांच जरूरी है.
नेहा बोरा के वकील ने कोर्ट में क्या कहा था?
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, नेहा बोरा की तरफ से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने मोर्चा संभालते हुए कहा था कि नेहा का प्रोटेस्ट एकदम पीसफुल था और उन्हें बिना किसी वैलिड रीजन के डिटेन किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि SEM ने बिना किसी प्रीलिमिनरी जांच के या बिना माइंड अप्लाई किए यह नोटिस मैकेनिकली इश्यू कर दिया. दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे ASG चेतन शर्मा ने कहा कि नेहा बोरा पर पहले से 6 FIR दर्ज हैं और उन्होंने रिजिम चेंज (सत्ता बदलने) जैसे भड़काऊ बयान दिए हैं. ASG ने तंज कसते हुए कहा कि “रिजिम चेंज वोटों से होता है, सड़कों पर हंगामा करने वाले तत्वों से नहीं.”
