IMD की चेतावनी के बीच वैज्ञानिक की सलाह, मानसून से पहले किसान जरूर कर लें ये 5 काम

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IMD की चेतावनी के बीच वैज्ञानिक की सलाह, मानसून से पहले किसान जरूर करें ये काम

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आईएआरआई पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. बाना ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के अनुसार इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. अल नीनो के प्रभाव के कारण बारिश लंबे समय के औसत (LPA) के करीब 90 से 92 प्रतिशत रह सकती है.

नई दिल्ली: देश में मानसून के आगमन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. बारिश का मौसम खेती-किसानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में किसान भी अपनी फसलों और उत्पादन को लेकर चिंतित रहते हैं. मानसून से पहले किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कम बारिश की स्थिति में नुकसान से कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. बाना ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं.

घबराने की जरूरत नहीं
डॉ. आर.एस. बाना ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कुछ कम बारिश होने की संभावना है. अल नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा लंबे समय के औसत (LPA) से कम रह सकती है. हालांकि उन्होंने कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है. यदि वैज्ञानिक तरीकों से खेती की जाए तो कम बारिश की स्थिति में भी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है.

समय पर करें खेतों की तैयारी
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मानसून शुरू होने से पहले ही खेतों की तैयारी पूरी कर लें. देश का एक बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है, इसलिए बुवाई में देरी नहीं करनी चाहिए. मानसून आते ही फसलों की बुवाई कर देनी चाहिए ताकि उपलब्ध नमी का पूरा लाभ मिल सके. डॉ. बाना ने यह भी कहा कि किसान अनावश्यक रूप से भूजल का दोहन करने से बचें और उपलब्ध जल संसाधनों का संतुलित उपयोग करें. इससे भविष्य में पानी की कमी की समस्या से निपटना आसान होगा.

कम पानी वाली फसलों का करें चयन
वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार किसानों को ऐसी फसलों और किस्मों का चयन करना चाहिए जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं. कम अवधि वाली और सूखा सहन करने वाली फसलें कम वर्षा की स्थिति में बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचने में मदद मिलेगी.

अंकुरण पर रखें विशेष नजर
डॉ. बाना ने बताया कि किसान खेतों में नमी की स्थिति को देखते हुए बुवाई करें और जहां जरूरत हो वहां गैप फिलिंग का काम करें. यदि बुवाई के बाद 50 प्रतिशत से कम पौधों का अंकुरण होता है, तो दोबारा बुवाई करना लाभदायक रहेगा. इससे खेत में पौधों की संख्या संतुलित बनी रहेगी और उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि समय पर योजना बनाकर और वैज्ञानिक सलाह का पालन करके किसान कम बारिश या सूखे जैसी परिस्थितियों में भी अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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