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मेरठ का नाम आते ही अक्सर क्रिकेट बैट और स्पोर्ट्स सामान का ख्याल आता है, लेकिन यहां बनने वाले कैरम बोर्ड भी विदेशों तक पहुंचते हैं. दुबई, सऊदी अरब, कुवैत, मस्कट और बहरीन जैसे देशों में इनकी मांग है. खास बात यह है कि मेरठ में आज भी कैरम बोर्ड बनाने के काम में पारंपरिक तरीके और कारीगरों के हुनर की अहम भूमिका है. यहां 250 रुपये से लेकर 9 हजार रुपये तक के बोर्ड तैयार किए जाते हैं.
मेरठ के कैरम बोर्ड सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इस्तेमाल किए जाते हैं. सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार सिंघल के मुताबिक, दुबई, सऊदी अरब, कुवैत, जद्दा, मस्कट और बहरीन जैसे देशों में इनकी सप्लाई होती है. गर्मियों में इन देशों में कैरम खेलने का चलन बढ़ने से मांग में भी इजाफा होता है.
कैरम बोर्ड बनाने के लिए लिप्टिस और कीकर की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. ये लकड़ियां मेरठ और आसपास के इलाकों में आसानी से उपलब्ध हैं. बोर्ड की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है, ताकि खेलते समय गोटियां आसानी से चल सकें और खिलाड़ियों को परेशानी न हो.
मेरठ में अलग-अलग साइज और क्वालिटी के कैरम बोर्ड बनाए जाते हैं. इनका आकार 18×18 इंच से लेकर 52×52 इंच तक होता है. सामान्य बोर्ड की कीमत करीब 250 रुपये से शुरू होती है, जबकि बेहतर क्वालिटी और बड़े आकार के बोर्ड की कीमत 9 हजार रुपये तक पहुंच जाती है.
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स्पोर्ट्स गुड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के मुताबिक, मेरठ में कैरम बोर्ड बनाने वाली 500 से ज्यादा इकाइयां हैं. शहर में स्पोर्ट्स कारोबार करीब 800 करोड़ रुपये सालाना का बताया जाता है, जिसमें कैरम बोर्ड की हिस्सेदारी लगभग 8 से 10 फीसदी है. इस कारोबार से बड़ी संख्या में कारीगर और दूसरे लोग जुड़े हुए हैं.
कैरम बोर्ड बनाने के लिए सबसे पहले लकड़ी काटकर उसके चारों किनारे तैयार किए जाते हैं. फिर चारों हिस्सों को जोड़कर ढांचा बनाया जाता है और उसमें प्लाई फिट की जाती है. मजबूती के लिए चारों तरफ लकड़ी का सपोर्ट लगाया जाता है. इसके बाद बोर्ड पर जरूरी डिजाइन बनाया जाता है और चारों ओर छेद किए जाते हैं. अंत में फिनिशिंग का काम होता है.
मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद मेरठ में कैरम बोर्ड बनाने का काम काफी हद तक पारंपरिक तरीके से होता है. एक बोर्ड तैयार करने में करीब तीन से चार कारीगरों की जरूरत पड़ती है. लकड़ी को सही आकार देने से लेकर जोड़ने और फिनिशिंग करने तक हर चरण में कारीगरों के अनुभव और हाथ के हुनर की अहम भूमिका होती है.
