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दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में लोग घर-फ्लैट और प्लॉट खरीदते हैं. दिवाली पर खरीदारी शुभ मानी जाती है. प्लॉट-दुकान और मकान में दिवाली के चलते बंपर छूट मिलती है. दिल्ली-एनसीआर में ऑफिस और बाजार आते-जाते आपने भी कई तरह के विज्ञापन देखे होंगे. फ्लैट-प्लॉट, गेटेड सोसाइटी, जड़ से मकान आसान किश्तों में, इस तरह के होर्डिंग पर नजर गई होगी. नोएडा-गाजियाबाद में कौन से प्लॉट वैध हैं, कौन से अवैध हैं, कहां पर प्लॉट-फ्लैट खरीदना चाहिए, आइये जानते हैं…..
दिल्ली-एनसीआर में घर का सपना हर कोई देखता है. घर का सपना पूरा करने के लिए लोग रात-दिन मेहनत करते हैं. पाई-पाई जोड़कर मकान खरीदते हैं. दिवाली के समय तो दिल्ली-एनसीआर में फ्लैट-प्लॉट की सेल खूब होती है. जगह-जगह पर प्रॉपर्टी में डिस्काउंट के होर्डिंग नजर आते हैं. कहीं जड़ से मकान तो कहीं पर आसान किश्तों में प्लॉट के विज्ञापन नजर आते हैं. नोएडा-गाजियाबाद में तो इस तरह के लुभावने विज्ञापन खूब देखने को मिल जाएंगे. अगर आप सावधान नहीं रहेंगे तो आपका पूरा पैसा डूब जाएगा. गाजियाबाद प्राधिकरण तो समय-समय अवैध कालोनियों की लिस्ट भी जारी करता रहता है.
15 रुपये की किश्त में प्लॉट, सिर्फ 4 लाख के डाउन पेमेंट पर जड़ से मकान, दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में इस तरह के होर्डिंग-विज्ञापनों पर आपकी नजर जरूर गई होगी. बायर्स जानकारी के अभाव में नई कॉलोनी, नई बसाहट में प्लॉट-मकान खरीद लेते हैं. फ्लैट-प्लॉट बेचने वाले अक्सर झांसा देते हैं और कहते है कि रजिस्ट्री करवा लीजिए, म्यूटेशन करवा लीजिए, आपका घर अपना हो जाएगा. आपको लगता है कि कागज पूरे हो गए हैं और घर खरीद लेते हैं लेकिन यह सच्चाई इसके उलट है. कॉलोनी में प्लॉट, जड़ से मकान लेने से पहले कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें. कई कॉलोनी में रजिस्ट्री के बावजूद घर तोड़ दिया जाता है. आपका पैसा डूब जाता है.
नोएडा-गाजियाबाद में ज्यादातर प्लॉटिंग कृषि भूमि में ही किए जाते हैं. बिल्डर अक्सर बड़ी जमीन पर प्लॉटिंग करते हैं. 20-30 फीट सड़क छोड़कर प्लॉटिंग करते हैं. खरीदारों को लुभाने के लिए सड़क पक्की बनवा देते हैं. 50-100 गज के प्लॉट काटते हैं. आसान किश्तों में प्लॉट देते हैं. पहले बिल्डर अकेले इस जमीन का मालिक होता है और फिर 80-100 खरीदार इस कृषि जमीन के मालिक हो जाते हैं. सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन का मालिक बिल्डर ही होता है. जब तक सड़क का मालिक कोई व्यक्ति विशेष होगा, सरकार या प्राधिकरण उस कॉलोनी को अधिकृत नहीं मानेगी. ऐसे में ऐसी जगह पर अपनी गाढ़ी कमाई से प्लॉट न खरीदें.
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नोएडा-गाजियाबाद में कई जगह पर बने बनाए सिंप्लेक्स डुप्लेक्स मकान भी मिलते हैं. ये मकान जड़ से बने होते हैं. बहुत ही आसान किश्तों में मिल जाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस तरह की कॉलोनी के दोनों किनारे पर गेट लगे होते हैं. बिल्डर इसे गेटेड सोसायटी बताते हैं. एनबीएफसी से लोन की सुविधा भी देते हैं. हर गली चौड़ी मिल जाएगी. जानकारी के अभाव में खरीदार प्रॉपर्टी का अप्रूव्ड नक्शा नहीं मांगते. अथॉरिटी से अप्रूव्ड ले आउट की कॉपी नहीं मांग पाते. इसे अनुज्ञा पत्र-स्वीकृत पत्र भी कहा जाता है. ऐसी जगह पर प्लॉट या फ्लैट लेने पर भविष्य में कभी भी बुल्डोजर कार्रवाई हो सकती है. इस संबंध में एक सिंपल सा लॉजिक आपको लगाना चाहिए. अगर गांव-कस्बे में घर बनाने के लिए ग्राम पंचायत-नगर पंचायत की मंजूरी चाहिए होती है, तो नोएडा-गाजियाबाद में कोई घर बिना नक्शे के कैसे बना सकते हैं.
अगर आप किसी अधिकृत कॉलोनी में प्लॉट या फ्लैट लेना चाहते हैं तो भी कुछ बातों का ध्यान रखें. जिस भी इलाके में प्लॉट-फ्लैट ले रहे हैं, उस इलाके का बैकग्राउंड जरूर देखें. कॉलोनी कितने साल पहले बसी, हॉस्पिटल-स्कूल की दूरी, सीवर-पाइपलाइन, मेट्रो-बस कितनी दूर है, हाइवे कितनी दूर है, इन सब बातों को अच्छे से पता कर लें. ये सब मूलभूत सुविधाएं हैं. सब्जी मंडी, मार्केट, आटो-बस सेवा इन बातों के बारे में अच्छे से जानकारी जुटाएं. इन बातों को अनदेखा करके अगर आप फ्लैट-प्लॉट लेंगे तो भविष्य में मुश्किल होगी.
अगर आप नोएडा-गाजियाबाद की किसी कॉलोनी में फ्लैट-प्लॉट लेते हैं तो यह जरूर देखें कि सड़क कम से कम 18 फीट चौड़ी हो. साथ ही उस कॉलोनी में पार्क है या नहीं, यह जरूर चेक कर लें. अगर कॉलोनी अप्रूव्ड नहीं होगी तो जमीन बहुत सस्ती होगी. आपको सोचना चाहिए कि किसी सोसायटी में कोई फ्लैट अगर 70-80 लाख का मिल रहा है तो कॉलोनी में 4-5 हजार गज की सस्ती जमीन कैसे संभव है? अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका पैसा डूबेगा नहीं.
