दिल्ली के स्कूल में बच्ची की हार्ट अटैक से मौत, अगर टीचर करती ये एक काम तो बच सकती थी बच्ची की जान!

दिल्ली के मयूर विहार में एक स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली 9 साल की बच्ची के हार्ट अटैक से निधन ने झकझोर दिया है. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है. जिसमें बच्ची अचानक भरी कक्षा में गिर पड़ती है और बेहोश हो जाती है.इस दौरान टीचर उसे उठाने और होश में लाने की कोशिश करती है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो कार्डियक अरेस्ट के मामले में एक काम बेहद जरूरी है, जो इस बच्ची के साथ भी होना चाहिए था, शायद उसकी जान बच सकती थी. अगर स्कूल टीचर जागरुक और ट्रेंड होती तो शायद यह बच्ची बच जाती. आइए जानते हैं कि टीचर से चूक कहां हुई? क्‍यों स्‍कूल में सेहत को लेकर जागरुकता की अभी भी कमी है?

मयूर विहार स्थित इस स्कूल का बच्ची की मौत से पहले का सीसीटीवी सामने आया है. जिसमें देखा जा सकता है कि बच्ची कक्षा में आती है. एक जगह पर खड़ी हो जाती है. उसने कमर पर हाथ रखा हुआ है और फिर वो अचानक से मुंह के बल गिर पड़ती है.बच्ची को जमीन पर गिरे देख टीचर तुरंत उसके पास आती हैं और उसे उठाती हैं. वीडियो में देख सकते हैं कि उस वक्त तक बच्ची में जान होती है और उसका शरीर खिंच रहा होता है, उसके पैरों में हरकत होती है.

टीचर बच्ची को उठाती है और उसे उसकी बैंच पर ले जाकर बिठाने की कोशिश करती है, हालांकि बच्ची पूरी तरह अचेत होकर वहां से भी नीचे सरकने लगती है. थोड़ी देर तक उसे उठाने की कोशिश करने के बाद टीचर उसे दूसरे बैंच पर बिठाती है, लेकिन बच्ची बेहोश होती है. एक बच्चा पानी की बोतल में से पानी देता है, शायद टीचर के मांगने पर ही, और टीचर उस बच्ची के मुंह पर पानी के छींटे मारती है, लेकिन बच्ची नहीं उठती. इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक से दो मिनट का समय लगता है.

अब समझिए कहां हुई गलती?

इस वीडियो को देखने के बाद सामान्यतौर पर यही लगता है कि कहीं कोई गलती नहीं हुई. टीचर ने तुरंत उठकर बच्ची को होश में लाने की कोशिश की, बच्चे भी छोटे थे तो क्या ही कर सकते थे. समय भी बहुत ज्यादा नहीं था, बस सेकेंडों की बात थी, तो होनी के आगे क्या ही किया जा सकता था?

लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो बस यहीं एक चूक हो गई. अगर यहां टीचर इतनी जागरुक और ट्रेंड होती कि वह तत्काल सिर्फ एक कदम उठा लेती तो शायद बच्ची की जान बचाई जा सकती थी.

बस सेकेंडों में करना था ये काम

डॉक्टरों का मानना है कि इस समय पर तत्काल बच्ची को फर्स्ट एड के तौर पर सीपीआर दी जानी थी. अगर टीचर बच्ची को होश में लाने के लिए उसके सीने की मालिश करने, उस पर पानी के छींटे मारने या उसे बैठाने की कोशिश में समय न गंवाती और बच्ची को तुरंत बैंच या डेस्क पर लिटाकर अपनी हथेलियों से उसके सीने पर बार-बार दबाव डालकर सीपीआर देती तो संभव है कि उसकी जान बच सकती थी और उसका हार्ट एक बार फिर काम करने लगता.

कक्षा में जो कमी हुई उसे टीचर की गलती नहीं कह सकते लेकिन इसे जागरुकता की कमी जरूर कहा जा सकता है. बेहद जरूरी है कि स्कूलों में सभी टीचर्स को फर्स्ट एड की बेसिक चीजें पता होनी चाहिए. आज के दौर में जबकि बच्चों में कार्डियक अरेस्ट की घटनाएं देखने को मिल रही हैं तो बेहद जरूरी है कि सभी टीचर्स को सीपीआर की ट्रेनिंग दी जाए और उन्हें ये समझाया जाए कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय क्या कदम उठाएं. सभी को इस गोल्डन मिनट को पहचानना सिखाया जाए.

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