मध्य प्रदेश में जो बीमारी फैल रही वो क्या है, क्यों इसने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है?

केरल में दिमाग खाने वाले अमीबा का कहर है, अब तक इसकी वजह से 19 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. अभी भी दर्जनों लोग इसकी चपेट में हैं और अपना इलाज करा रहे हैं. इस बीच मध्य प्रदेश से भी डराने वाली खबर आ रही है. यहां एक नए बैक्टीरिया मैलियोइडोसिस ने दस्तक दी है, यह तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है.

मेलियोइडोसिस एक गंभीर बीमारी है जो बैक्टीरिया से होती है. हालांकि इसके शिकार बन चुके ज्यादातर लोग इसके बारे में जानते ही नहीं हैं. हाल ही में एम्स भोपाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी के पूरे लक्षण टीबी की तरह होते हैं. अगर इसके शिकार लोगों को समय पर इलाज न मिले तो 40% मरीजों की मौत भी हो सकती है. खासतोर से डायबिटीज, लीवर या किडनी की बीमारी से पीड़ित या कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले लोगों को ज्यादा खतरा है.

कैसे फैलता है ये बैक्टीरिया?

मेलियोइडोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो इंसानों और जानवरों दोनों को प्रभावित करता है. खास तौर से यह दूषित मिट्टी, पानी या हवा से शरीर में प्रवेश करता है. खासतौर से अगर त्वचा पर घाव है तो यह बैक्टीरिया जल्दी शिकार बना सकता है, इसके अलावा दूषित खाने या पानी की वजह से भी ये शरीर में प्रवेश कर जाता है. ये किसी व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता. खासतौर से बारिश, तूफान या बाढ़ के बाद इसके मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं क्योंकि यह बैक्टीरिया मिट्टी की सतह पर आ जाता है. पहले इस बीमारी के मामले कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा में ज्यादा सामने आते हैं, मगर अब यह मध्य प्रदेश में तेजी से पैर पसार रही है.

20 जिलों में सामने आए मामले

मेलियोइडोसिस बैक्टीरिया के मामले अब तक मध्य प्रदेश के 20 जिलों में सामने आ चुके हैं. खास तौर से ये ग्रामीण इलाकों में ज्यादा फैल रहा है, अब तक मध्य प्रदेश में इसके 130 मामले सामने आ चुके हैं. AIIMS भोपाल की ओर से हाल ही में इस पर एक रिपोर्ट भी जारी की गई है, इसमें बताया गया है कि इस बीमारी की वजह से हर 10 में से 4 लोगों की मौत हो जाती है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि यह बैक्टीरिया पानी, मिट्टी की वजह से फैल रहा है.

टीबी जैसे लक्षण, अनदेखी न करें

एम्स भोपाल की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बैक्टीरिया के लक्षण टीबी की तरह हैं, हाल ही में इसके 14 नए मामले सामने आए हैं जो मध्य प्रदेश के अलग अलग हॉस्पिटल्स में इलाज करा रहे हैं. एम्स की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर किसी को टीबी के लक्षण भी नजर आएं तो तुरंत जांच कराएं. रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में एक 45 वर्षीय किसान मेलियोइडोसिस से पीड़ित था, लेकिन वह कई महीने तक टीबी का इलाज ही कराता रहा, जिससे उसकी हालत बिगड़ती रही, बाद में बैक्टीरिया की बात सामने आने के बाद ही उसे बचाया जा सका.

क्या हैं इसके लक्षण, कब आते हैं नजर?

मेलियोइडोसिस का सबसे बड़ा लक्षण बुखार है. बैक्टीरिया के संपर्क में आने से खासी और सीने में दर्द की शिकायत हो सकती है. इसके अलावा शरीर में फोड़े और घाव की समस्या भी हो सकती है. इसके अलावा सिरदर्द, पेट दर्द, मांसपेशियों में दर्द की शिकायत रह सकती है. गंभीर मामलों में निमोनिया, सेप्सिस तथा मौत तक हो सकती है. इसके लक्षण 1 से 3 सप्ताह में दिख सकते हैं, कई बार इसके लक्षण महीनों या सालों बाद भी नजर आ सकते हैं. यह किसी एक अंग को या पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है. एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को डायबिटीज, लिवर या किडनी की बीमारी पहले से, उन्हें इससे ज्यादा खतरा है. इसके अलावा कैंसर रोगी, कमजोर इम्युन सिस्टम वाले लोगों को भी इससे सावधान रहना चाहिए.

बचाव के लिए क्या करें?

मेलियोइडोसिस एक घातक बीमारी है, 10 से 4 लोगों की इससे मौत हो सकती है. इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत ही इसका इलाज लेना चाहिए. बीमारी के बारे में जानकारी होने के बाद 2 से 8 सप्ताह तक एंटीबायोटिक्स इंजेक्शन लगते हैं, इसके अलावा 3 से 6 माह तक दवा खानी होनी होती है, बस इसका कोर्स करना जरूरी है. इससे बचाव के लिए जरूरी ये है कि अगर घाव है तो मिट्टी और दूषित पानी से दूर रहें, डॉक्टरों को लक्षण बताएं.

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