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आज के समय में फ्रिज के बिना बर्फ की कल्पना भी मुश्किल है, लेकिन इतिहास में राजा-महाराजाओं के पास बर्फ को सुरक्षित रखने के ऐसे अनोखे जुगाड़ थे, जो आज भी हैरान कर देते हैं. बिना किसी आधुनिक तकनीक के भी उस दौर में बर्फ का इस्तेमाल कैसे होता था?
आज के समय में बर्फ हमारे दैनिक जीवन का सामान्य हिस्सा बन चुकी है. घर में रखा रेफ्रिजरेटर कुछ ही घंटों में पानी को बर्फ में बदल देता है. गर्मियों में ठंडा पानी पीना हो, शरबत बनाना हो या फिर आइसक्रीम का आनंद लेना हो, बर्फ हर जगह मौजूद है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब न बिजली थी, न फ्रीजर और न ही आधुनिक तकनीक, तब लोग बर्फ का इस्तेमाल कैसे करते थे? हैरानी की बात यह है कि बर्फ का इतिहास हजारों साल पुराना है और इसे सुरक्षित रखने के लिए प्राचीन सभ्यताओं ने कई अनोखी तकनीकें विकसित की थीं.
इतिहासकारों के अनुसार, लगभग 4000 साल पहले मेसोपोटामिया और प्राचीन चीन की सभ्यताओं में लोग सर्दियों के दौरान प्राकृतिक रूप से जमी बर्फ को इकट्ठा करते थे. इस बर्फ को विशेष गड्ढों, पत्थर के कमरों और भूमिगत भंडारों में सुरक्षित रखा जाता था. गर्मियों में इसका उपयोग खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को ठंडा रखने के लिए किया जाता था. उस समय बर्फ एक मूल्यवान संसाधन मानी जाती थी और इसका उपयोग मुख्य रूप से शासक वर्ग और संपन्न लोगों द्वारा किया जाता था.
फारसियों की अनोखी तकनीक ने दुनिया को चौंकाया
लगभग 500 ईसा पूर्व प्राचीन फारस, यानी आज के ईरान में, “यखचल” नामक विशेष संरचनाएं बनाई जाती थीं. ये विशाल गुंबदनुमा भंडार मिट्टी, रेत और ईंटों से तैयार किए जाते थे. इनकी मोटी दीवारें गर्मी को अंदर पहुंचने से रोकती थीं. यखचल में बर्फ को महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता था, यहां तक कि रेगिस्तानी इलाकों में भी. इसे इतिहास की सबसे उन्नत प्राकृतिक शीतलन प्रणालियों में से एक माना जाता है.
भारत में कैसे पहुंची बर्फ?
भारत में बर्फ का उपयोग प्राचीन और मध्यकालीन समय में सीमित रूप से होता था. मुगल काल के दौरान हिमालयी क्षेत्रों और कश्मीर से बर्फ लाकर शाही दरबारों में पहुंचाई जाती थी. इसका उपयोग ठंडे पेय, शरबत और विशेष व्यंजनों में किया जाता था. बाद में 19वीं सदी में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान अमेरिका से जहाजों में प्राकृतिक बर्फ भारत लाई जाने लगी. कोलकाता, मुंबई और मद्रास जैसे शहरों में विशेष “आइस हाउस” बनाए गए, जहां बर्फ को संग्रहित किया जाता था. उस समय बर्फ इतनी महंगी थी कि यह आम लोगों की पहुंच से बाहर थी.
पहली आर्टिफिशियल बर्फ कब बनी?
1748 में स्कॉटिश वैज्ञानिक विलियम कुलेन ने आर्टिफिशियल बर्फ बनाने का सफल प्रदर्शन किया. हालांकि यह तकनीक व्यावसायिक रूप से उपयोगी नहीं बन सकी, लेकिन इसे आधुनिक रेफ्रिजरेशन की शुरुआत माना जाता है. 19वीं सदी में वैज्ञानिकों ने शीतलन तकनीक को और विकसित किया, जिसके बाद मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर बर्फ का उत्पादन संभव हो गया.
कैसे बदली दुनिया?
20वीं सदी में रेफ्रिजरेटर के आम होने के बाद बर्फ बनाना बेहद आसान हो गया. जो बर्फ कभी राजाओं, नवाबों और अमीर व्यापारियों की शान मानी जाती थी, वह धीरे-धीरे हर घर तक पहुंच गई. आज बर्फ बनाने के लिए न पहाड़ों से बर्फ लाने की जरूरत है और न ही विशेष भंडार बनाने की. एक बटन दबाते ही आधुनिक तकनीक यह काम कर देती है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें
