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Moong cultivation: रीवा कृषि महाविद्यालय के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरपी जोशी ने बताया कि इस समय किसानों के लिए मूंग की खेती करना बेहद फायदेमंद हो सकता है. रिपोर्ट- वंदना रेवांचल तिवारी
आलू की खोदाई और सरसों की कटाई के बाद अधिकतर किसानों के खेत धान लगाने तक खाली रहते हैं. ऐसे में मूंग की खेती से न केवल अतिरिक्त आमदनी होगी, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी.
मूंग एक दलहन फसल है, जिसे कम मेहनत और कम पानी में आसानी से उगाया जा सकता है. यह जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे मिट्टी और अधिक उपजाऊ बनती है. मूंग की कटाई 60-65 दिनों में पूरी हो जाती है, और इसे अन्य फसलों के साथ भी उगाया जा सकता है.
डॉ. जोशी के अनुसार, 20 मार्च से अप्रैल के अंत तक मूंग की बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए. देर से बुवाई करने पर मानसून की बारिश से फसल खराब हो सकती है. बुवाई के लिए 10-12 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें.
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बीज उपचार: बोने से पहले बीज को थीरम या कैप्टान फफूंदनाशी (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करें. बुवाई के 36 घंटे के भीतर पेंडामेथिलिन खरपतवारनाशी (3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें.
उन्नत किस्में जो अधिक उपज देंगीः मूंग की उन्नत प्रजातियां: नरेंद्र मूंग-1, मेहा, विराट, आईपीएम 2-3, एचयूएम-15 उर्द की उन्नत प्रजातियां: पंत ऊर्द-31, आजाद ऊर्द-2, प्रताप-1
रीवा कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को मूंग की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है और समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर रहा है. डॉ. जोशी ने बताया कि मूंग की खेती से किसान गर्मी में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं, क्योंकि यह दाल और अन्य उत्पादों के लिए उपयोगी होती है.
