गाजियाबाद: गाजियाबाद प्रशासन ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. 28 मार्च 2026 को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने 800 बसों की व्यवस्था करने का आदेश जारी किया है. इनके जरिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को समारोह स्थल तक पहुंचाया जाएगा. मगर, खास बात यह है कि 800 बसें स्कूली होगीं न कि UPSRTC की. इस आदेश के साथ ही एक और फरमान सुनाया गया था, जिस पर विवाद गहरा गया था. हालांकि, समय रहते जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मंदर ने आदेश को संशोधित कर जारी कर दिया, जिसके बाद मामला शांत हो गया. आइए जानते हैं सबकुछ….
यह है मामला
गाजियाबाद प्रशासन ने एक नोटिफिकेशन जारी कर 28 मार्च को जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में लोगों को ले जाने के लिए 800 बसों की मांग की थी. साथ ही जिले के सभी स्कूलों में उस दिन क्लासें ऑनलाइन करने का आदेश दिया गया था. इस पर कांग्रेस नेता डोली शर्मा ने सरकार को खरीखोटी सुनाई.
क्या कहां कांग्रेस नेता ने ?
डोली शर्मा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक सरकारी कार्यक्रम के लिए बच्चों की पढ़ाई को बाधित किया जा रहा है. क्या अब शिक्षा भी प्रचार का माध्यम बन गई है? प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम के नाम पर 800 बसों की व्यवस्था करना और छात्रों की कक्षाएं बंद कराना- यह प्रशासनिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकता का गलत उदाहरण है. हम पूछना चाहते हैं- क्या बच्चों का भविष्य ज्यादा महत्वपूर्ण है या सत्ता का दिखावा? कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर मानती है कि शिक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. अगर व्यवस्था करनी थी, तो वैकल्पिक साधन अपनाए जाते, न कि छात्रों की पढ़ाई को रोक दिया जाता. यह आदेश बताता है कि सरकार के लिए ‘इवेंट मैनेजमेंट’ ज्यादा महत्वपूर्ण है, और शिक्षा पीछे छूट गई है. हम मांग करते हैं कि ऐसे फैसलों की समीक्षा हो और भविष्य में बच्चों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ न किया जाए.
फिर लिया गया यूटर्न
स्कूल कराएंगे बस उपलब्ध
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मंदर द्वारा मंगलवार शाम जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि कार्यक्रम के सुचारू संचालन और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए 800 बसों की व्यवस्था करने की जरूरत है. इसलिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जाए. किसी को परेशानी न हो इसके लिए ये कदम उठाया गया है. प्रशासन को बसों को अधिग्रहित करने का अधिकार है और इस प्रक्रिया में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) लाभार्थियों की संख्या और संबंधित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएंगे. हालांकि, अब विवाद होने के बाद इस आदेश में बदलाव कर दिया गया है. स्कूल भौतिक रूप से खोले जाएंगे. मगर, बसें उपलब्ध कराने का आदेश बरकरार है.
क्यों लिया गया ये फैसला?
परिवहन व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी पीके सिंह ने बताया कि 800 बसें मुख्य रूप से स्कूलों से ली जा रही हैं, हालांकि अंतिम संख्या में बदलाव संभव है. उन्होंने यह भी बताया कि जेवर तक प्रति बस आने-जाने का खर्च लगभग 12,000 रुपये आंका गया है. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों का उपयोग इसलिए नहीं किया जा रहा क्योंकि उनका किराया करीब 22,000 रुपये प्रति 200 किलोमीटर के हिसाब से तय हैं, जो तुलना में काफी अधिक है.
इस फैसले को लेकर कुछ स्कूल प्रबंधन ने चिंता भी जताई है. श्री राम यूनिवर्सल स्कूल की निदेशक ज्योति गुप्ता ने कहा कि उस दिन चलने वाले स्कूलों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. हमें बसें उपलब्ध कराने का निर्देश मिला है. प्रशासन को स्कूल बसों के बजाय सरकारी या निजी बसों का इस्तेमाल करना चाहिए. स्कूलों को ईंधन, ड्राइवर और कंडक्टर का इंतजाम करना पड़ता है. इससे हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है.
इस बीच, प्रशासन द्वारा जारी आदेश की प्रति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और जिले के सभी स्कूलों के प्राचार्यों को भी भेजी गई है, ताकि सभी स्तरों पर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके.
